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न साजिश खुली, न भैय्याजी मिला तो कातिल कौन
अमर उजाला/ ब्यूरो
Updated Thu, 08 Sep 2016 01:34 AM IST
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न साजिश खुली, न भैय्याजी मिला तो कातिल कौन
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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धर्मेंद्र चौधरी की 10 जनवरी की देर शाम हत्या के बाद 25 जनवरी को जब तत्कालीन एसएसपी ने शूटरों द्वारा उधारी में हत्या का खुलासा किया था। उस समय कहा गया था कि बिल्डर एसोसिएशन और जमीन से जुड़े विवाद में हरेंद्र वीरेश ने यह हत्या कराई है। इसके पीछे किसी कथित भैय्याजी का हाथ शूटरों ने स्वीकारा है। इसके बाद से लेकर आज तक पुलिस उस भैय्याजी का भी सुराग नहीं लगा पाई। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर कातिल कौन है।
धर्मेंद्र के पिता और पत्नी ने ही अदालत में अपनी गवाही के दौरान इस खुलासे पर यह कहते हुए सवाल खड़ा कर दिया कि उनका कोई विवाद इन लोगों से नहीं। इसके बाद बचाव पक्ष के अधिवक्ता नीरज चौहान की दलीलों व सवालों का जवाब भी अभियेाजन पक्ष से गवाही देने आए पुलिस विवेचक व गवाह नहीं दे पाए। मुकदमे में पब्लिक के 12 व एक डॉक्टर की गवाही के अलावा बाकी पुलिस के गवाह थे।
बचाव पक्ष के सवाल और दलील
खुलासे के दूसरे ही दिन पिता ने मीडिया को दिए बयान में असहमति जताई।
हरेंद्र व वीरेश से जमीनी या किसी अन्य तरह की रंजिश सिरे से नकारी थी।
पहले दिन मुकदमे में बाइक सवार दो अज्ञात, फिर कई शूटरों के नाम खोले।
खुलासे व शूटरों तक पहुंचने के कोई साक्ष्य पुलिस ने विवेचना में नहीं खोले।
गिरफ्तार शूटरों के नाम व चेहरे मौके के गवाहों ने अपने बयानों में नहीं पहचाने।
गिरफ्तारी के बाद किसी गवाह से शूटरों की शिनाख्त कार्रवाई नहीं कराई गई।
घटना की साजिश हरेंद्र-वीरेश के मार्केट पर रचने की कहानी का गवाह नहीं।
कौन सी व कहां की जमीन का हरेंद्र-वीरेश से धर्मेंद्र का विवाद, नहीं पता है।
मौके पर .38 बोर के खोखा बरामद, शूटरों से 315 बोर के कट्टे बरामद किए।
इतने बड़े प्लांड मर्डर में प्रयोग कोई मोबाइल या सीडीआर तक नहीं दिखाया।
हत्या में प्रयुक्त कोई दुपहिया वाहन भी पुलिस आज तक बरामद नहीं कर पाई।
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धर्मेंद्र के पिता और पत्नी ने ही अदालत में अपनी गवाही के दौरान इस खुलासे पर यह कहते हुए सवाल खड़ा कर दिया कि उनका कोई विवाद इन लोगों से नहीं। इसके बाद बचाव पक्ष के अधिवक्ता नीरज चौहान की दलीलों व सवालों का जवाब भी अभियेाजन पक्ष से गवाही देने आए पुलिस विवेचक व गवाह नहीं दे पाए। मुकदमे में पब्लिक के 12 व एक डॉक्टर की गवाही के अलावा बाकी पुलिस के गवाह थे।
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बचाव पक्ष के सवाल और दलील
खुलासे के दूसरे ही दिन पिता ने मीडिया को दिए बयान में असहमति जताई।
हरेंद्र व वीरेश से जमीनी या किसी अन्य तरह की रंजिश सिरे से नकारी थी।
पहले दिन मुकदमे में बाइक सवार दो अज्ञात, फिर कई शूटरों के नाम खोले।
खुलासे व शूटरों तक पहुंचने के कोई साक्ष्य पुलिस ने विवेचना में नहीं खोले।
गिरफ्तार शूटरों के नाम व चेहरे मौके के गवाहों ने अपने बयानों में नहीं पहचाने।
गिरफ्तारी के बाद किसी गवाह से शूटरों की शिनाख्त कार्रवाई नहीं कराई गई।
घटना की साजिश हरेंद्र-वीरेश के मार्केट पर रचने की कहानी का गवाह नहीं।
कौन सी व कहां की जमीन का हरेंद्र-वीरेश से धर्मेंद्र का विवाद, नहीं पता है।
मौके पर .38 बोर के खोखा बरामद, शूटरों से 315 बोर के कट्टे बरामद किए।
इतने बड़े प्लांड मर्डर में प्रयोग कोई मोबाइल या सीडीआर तक नहीं दिखाया।
हत्या में प्रयुक्त कोई दुपहिया वाहन भी पुलिस आज तक बरामद नहीं कर पाई।