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60 मिनट तक दिल और फेफड़े की हरकत रोक किया ऑपरेशन
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जेएन मेडिकल कॉलेज में 9 साल के बच्चे के हृदय के वाल्ब की जटिल और सफल सर्जरी की गई है। इसके लिए डॉक्टरों ने बच्चे के दिल और फेफड़े की हरकत को 60 मिनट तक रोके रखा। ऑपरेशन के बाद मरीज की हालत में सुधार हो रहा है और वह आईसीयू से बाहर है। डॉक्टरों की इस सफलता पर कुलपति ने उनको बधाई दी है।
जिले के गभाना निवासी नौ वर्षीय नवनीत को सांस लेने में तकलीफ थी। उसकी हालत दिन-ब-दिन बिगड़ती जा रही थी। नवनीत के माता-पिता ने कई डाक्टरों से सलाह उसको जेएन मेडिकल कॉलेज लेकर आए। यहां पीडियाट्रिक कार्डिएक इवोल्यूशन एंड कार्डिएक सर्जरी यूनिट (पीसीई-सीएसयू)) के डा. शाद अबकरी ने इको के माध्यम से वाल्ब लीकेज बताया और सर्जरी के लिए रेफर किया।
डा. मयंक यादव और डा. सैयद शमायल रब्बानी के साथ सर्जिकल टीम का नेतृत्व करने वाले कार्डियोथोरेसिक सर्जरी विभाग के अध्यक्ष प्रो. मुहम्मद आजम हसीन ने कहा कि हमने वाल्ब की सर्जरी करने का फैसला किया क्योंकि नौ साल के बच्चे के वाल्ब को बदलना संभव नहीं था।
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डा. दीप्ति चाना, डा. नदीम रजा और डा. मनजिर अतहर ने मरीज को एनेस्थीसिया दिया। प्रो. हसीन ने बताया कि सर्जरी के दौरान मरीज के दिल और फेफड़ों को 60 मिनट के लिए रोक दिया गया था। क्लीनिकल परफ्यूजनिस्ट डा. साबिर अली खान ने हृदय और फेफड़े के फंक्शन पर कार्य किया।
निशुल्क हुआ है ऑपरेशन
मेडिकल कालेज में डीईआईसी के संयोजक कामरान अफजाल ने कहा कि भारत सरकार की आरबीएस योजना के तहत हजारों बच्चों का निशुल्क आपरेशन किया जा रहा है। यह ऑपरेशन भी निशुल्क हुआ है।
- महामारी के दौरान भी यहां नियमित रूप से जीवन रक्षक सर्जरी की जा रही है। अप्रैल में लाकडाउन के बाद से कार्डियोथोरेसिक सर्जरी विभाग में 50 से अधिक हृदय की सर्जरी की जा चुकी है।
- प्रो. तारिक मंसूर, कुलपति, एएमयू
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जिले के गभाना निवासी नौ वर्षीय नवनीत को सांस लेने में तकलीफ थी। उसकी हालत दिन-ब-दिन बिगड़ती जा रही थी। नवनीत के माता-पिता ने कई डाक्टरों से सलाह उसको जेएन मेडिकल कॉलेज लेकर आए। यहां पीडियाट्रिक कार्डिएक इवोल्यूशन एंड कार्डिएक सर्जरी यूनिट (पीसीई-सीएसयू)) के डा. शाद अबकरी ने इको के माध्यम से वाल्ब लीकेज बताया और सर्जरी के लिए रेफर किया।
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डा. मयंक यादव और डा. सैयद शमायल रब्बानी के साथ सर्जिकल टीम का नेतृत्व करने वाले कार्डियोथोरेसिक सर्जरी विभाग के अध्यक्ष प्रो. मुहम्मद आजम हसीन ने कहा कि हमने वाल्ब की सर्जरी करने का फैसला किया क्योंकि नौ साल के बच्चे के वाल्ब को बदलना संभव नहीं था।
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डा. दीप्ति चाना, डा. नदीम रजा और डा. मनजिर अतहर ने मरीज को एनेस्थीसिया दिया। प्रो. हसीन ने बताया कि सर्जरी के दौरान मरीज के दिल और फेफड़ों को 60 मिनट के लिए रोक दिया गया था। क्लीनिकल परफ्यूजनिस्ट डा. साबिर अली खान ने हृदय और फेफड़े के फंक्शन पर कार्य किया।
निशुल्क हुआ है ऑपरेशन
मेडिकल कालेज में डीईआईसी के संयोजक कामरान अफजाल ने कहा कि भारत सरकार की आरबीएस योजना के तहत हजारों बच्चों का निशुल्क आपरेशन किया जा रहा है। यह ऑपरेशन भी निशुल्क हुआ है।
- महामारी के दौरान भी यहां नियमित रूप से जीवन रक्षक सर्जरी की जा रही है। अप्रैल में लाकडाउन के बाद से कार्डियोथोरेसिक सर्जरी विभाग में 50 से अधिक हृदय की सर्जरी की जा चुकी है।
- प्रो. तारिक मंसूर, कुलपति, एएमयू