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शेयर मार्केट में नई सरकार का बेसब्री से इंतजार
Sat, 18 May 2019 01:35 AM IST
राजेश सिंह
आशीष निगम, अलीगढ़।
आशीष निगम, अलीगढ़।
Published by: राजेश सिंह
Updated Sat, 18 May 2019 01:35 AM IST
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शेयर बाजार
- फोटो : अमर उजाला
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राजनीतिक दल हो या आम जनता, सभी को लोकसभा चुनाव 2019 के नतीजों का बेसब्री से इंतजार है। हर दिन के साथ ये इंतजार बेचैनी बढ़ाता जा रहा है। अब नतीजे घोषित होने में पांच दिन हैं। शेयर बाजार को भी ये इंतजार अब खल रहा है, यहां अब 23 मई तक केवल दो कार्यदिवस बाकी हैं। 18 और 19 मई को अवकाश है। इसके बाद 20, 21 और 22 मई को तीन कार्यदिवस और मिलेंगे। 23 मई को नतीजे आ जाएंगे। जिसका असर शेयर बाजार और अलीगढ़ के निवेशकों पर भी होगा।
शेयर बाजार और आर्थिक मामलों के जानकार विजय पचीसिया कहते हैं कि वर्ष 2009 में लोकसभा चुनाव के नतीजे घोषित होने पर मनमोहन सिंह सरकार की दोबारा से ताजपोशी हुई थी। ये नतीजा आने पर शेयर बाजार में जबरदस्त तेजी आई और बाजार को समय पूर्व बंद कर दिया गया। वर्ष 2014 के चुनाव नतीजे आने पर भी शेयर बाजार झूमा था और निवेशकों को लाभ हुआ। बाद 2019 में भी ऐसे ही अप्रत्याशित नतीजों की उम्मीद लगाई जा रही है। इसलिए इन दिनों इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी के शेयरों में निवेशकों का रुझान बढ़ रहा है। जिसमें बैंक, सीमेंट, स्टील, इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी, एफएमसीजी कंपनियाें के शेयर शामिल हैं। अलीगढ़ के हजारों निवेशक भी एक्सपर्ट की राय लेकर चुनिंदा शेयरों में निवेश कर रहे हैं। इसकी एक वजह ये भी है कि चुनाव के दौरान मई महीने के गुजरे 15 दिन में कई शेयरों में गिरावट हुई है, जिससे लोगों में खरीदारी का रुझान बढ़ा है।
बहरहाल, इस पूरे चुनाव में राजनीतिक बहस का केंद्र रहा राफेल लड़ाकू विमान सौदा भी शेयर बाजार की चर्चा में बना है। अनिल अंबानी की कंपनी रिलांयस नवेल ने इसका सौदा किया है। इस कंपनी का शेयर शुक्रवार को 7.50 रुपये के निचले स्तर पर बंद हुआ। इससे पहले ये शेयर 120 रुपये के रेट पर भी पहुंच चुका है, जिससे निवेशकों को अच्छा लाभ भी मिला है। लेकिन वर्तमान में अनिल अंबानी ग्रुप की सभी कंपनियों की तरह रिलायंस नवेल की हालात भी खराब है। अलीगढ़ में भी सैकड़ों निवेशकों के पास इसके शेयर हैं, जिनको नुकसान हुआ है।
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निवेशक सीपी जौहरी ने बताया कि उनको उम्मीद थी राफेल सौदे के बाद इस रिलांयस नवेल के शेयर बढ़ेंगे लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उल्टा कई गुना नुकसान हो गया। इसी तरह सेे अंबानी ग्रुप के रिलांयस निपोन एसेट मैनेजमेंट 210 रुपये, रिलांयस पॉवर 6 रुपये, रिलांयस आर काम 6 रुपये, रिलांयस कैपिटल 109 रुपये और रिलांयस इंफ्रा का प्रति शेयर रेट 105 रुपये के इर्दगिर्द है।
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शेयर बाजार और आर्थिक मामलों के जानकार विजय पचीसिया कहते हैं कि वर्ष 2009 में लोकसभा चुनाव के नतीजे घोषित होने पर मनमोहन सिंह सरकार की दोबारा से ताजपोशी हुई थी। ये नतीजा आने पर शेयर बाजार में जबरदस्त तेजी आई और बाजार को समय पूर्व बंद कर दिया गया। वर्ष 2014 के चुनाव नतीजे आने पर भी शेयर बाजार झूमा था और निवेशकों को लाभ हुआ। बाद 2019 में भी ऐसे ही अप्रत्याशित नतीजों की उम्मीद लगाई जा रही है। इसलिए इन दिनों इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी के शेयरों में निवेशकों का रुझान बढ़ रहा है। जिसमें बैंक, सीमेंट, स्टील, इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी, एफएमसीजी कंपनियाें के शेयर शामिल हैं। अलीगढ़ के हजारों निवेशक भी एक्सपर्ट की राय लेकर चुनिंदा शेयरों में निवेश कर रहे हैं। इसकी एक वजह ये भी है कि चुनाव के दौरान मई महीने के गुजरे 15 दिन में कई शेयरों में गिरावट हुई है, जिससे लोगों में खरीदारी का रुझान बढ़ा है।
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बहरहाल, इस पूरे चुनाव में राजनीतिक बहस का केंद्र रहा राफेल लड़ाकू विमान सौदा भी शेयर बाजार की चर्चा में बना है। अनिल अंबानी की कंपनी रिलांयस नवेल ने इसका सौदा किया है। इस कंपनी का शेयर शुक्रवार को 7.50 रुपये के निचले स्तर पर बंद हुआ। इससे पहले ये शेयर 120 रुपये के रेट पर भी पहुंच चुका है, जिससे निवेशकों को अच्छा लाभ भी मिला है। लेकिन वर्तमान में अनिल अंबानी ग्रुप की सभी कंपनियों की तरह रिलायंस नवेल की हालात भी खराब है। अलीगढ़ में भी सैकड़ों निवेशकों के पास इसके शेयर हैं, जिनको नुकसान हुआ है।
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निवेशक सीपी जौहरी ने बताया कि उनको उम्मीद थी राफेल सौदे के बाद इस रिलांयस नवेल के शेयर बढ़ेंगे लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उल्टा कई गुना नुकसान हो गया। इसी तरह सेे अंबानी ग्रुप के रिलांयस निपोन एसेट मैनेजमेंट 210 रुपये, रिलांयस पॉवर 6 रुपये, रिलांयस आर काम 6 रुपये, रिलांयस कैपिटल 109 रुपये और रिलांयस इंफ्रा का प्रति शेयर रेट 105 रुपये के इर्दगिर्द है।