विदाई: तबादला होने पर अलीगढ़ से मुराबाद जाते हुए छलकीं कमिश्नर संगीता की आंखें, बोलीं- अच्छा, अब चलते हैं
तबादला एक अधिकारी के लिए सामान्य प्रक्रिया है, पर सीनियर आईएएस संगीता सिंह के अलीगढ़ से लगाव को, विदाई समारोह में उनकी भावुकता बयां कर रही थी। उनका मुराबाद के लिए तबादला हो चुका है। अलीगढ़ से विदाई के समय वह इतनी भावुक हो गईं कि उनके आंसू छलक उठे।
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अलीगढ़ कमिश्नर संगीता सिंह को 25 अगस्त को भावभीनी विदाई दी गई। सभागार में सभी ने उन्हें विदाई दी। विदाई समारोह के बाद वह अपनी नवीन तैनाती वाले मुरादाबाद मंडल के लिए रवाना हो गईं। संगीता सिंह ने अलीगढ़ मंडल में एक वर्ष सात माह का कार्यकाल पूरा किया।
तबादला एक अधिकारी के लिए सामान्य प्रक्रिया है, पर सीनियर आईएएस संगीता सिंह के अलीगढ़ से लगाव को, विदाई समारोह में उनकी भावुकता बयां कर रही थी। उनका मुराबाद के लिए तबादला हो चुका है। अलीगढ़ से विदाई के समय वह इतनी भावुक हो गईं कि उनके आंसू छलक उठे। उन्हें प्रकृति और वन्य जीवों से बड़ा लगाव है। उनका प्रकृति और लेखन से गहरा जुड़ाव रहा है, जिसके तहत उन्होंने सेमल के पेड़ और पक्षियों पर विशेष रचनाएं और लेख लिखे हैं। सेमल के पेड़ पर उन्होंने पूरी किताब ही लिख डाली।
उन्होंने बताया कि अलीगढ़ उनके लिए अपरिचित नहीं था, क्योंकि उनकी दादी यहीं के चकाथल की थीं। प्रारंभ में असहजता महसूस हुई, पर भगवान श्रीकृष्ण पर छोड़कर निष्ठा से कार्य किया। अलीगढ़ के अनुभव और स्मृतियां वह हमेशा अपने साथ लेकर जाएंगी। उन्होंने कहा कि तैनाती के दौरान वह एक फोटोग्राफर और लेखिका भी बन गईं। उनकी दो पुस्तकें पाइपलाइन में हैं, अलीगढ़ की यादें रचनात्मक यात्रा का हिस्सा बनेंगी।
विदाई है हर्ष और विषाद, दोनों का अवसर: अपर आयुक्त प्रशासन
अपर आयुक्त प्रशासन अरुण कुमार ने संगीता सिंह की विदाई को हर्ष और विषाद का अवसर बताया। उन्होंने उनके सहज, विनम्र व्यवहार, अनुशासन और त्वरित निर्णय लेने की क्षमता की सराहना की। अरुण कुमार ने उनके प्रकृति प्रेम और बहुआयामी व्यक्तित्व का भी उल्लेख किया।
अधीनस्थ अधिकारियों को दिया मार्गदर्शन: अपर आयुक्त न्यायिक
अपर आयुक्त न्यायिक अखिलेश कुमार ने उनकी नई सोच और पात्रों तक योजना लाभ पहुंचाने पर जोर दिया। उन्होंने पोषण पोटली, बाल विकास योजनाओं और बालिकाओं के लिए एचपीवी वैक्सीनेशन जैसे प्रयासों को प्राथमिकता दी। शिकायतों के गुणवत्तापूर्ण निस्तारण पर भी उन्होंने विशेष ध्यान दिया। संगीता सिंह ने अधीनस्थ अधिकारियों को मार्गदर्शन दिया और रचनात्मक कार्यों के लिए प्रेरित किया। उनके नेतृत्व में अधिकारियों को जिम्मेदारी से कार्य करने की प्रेरणा मिली।
गुरुजी, अब चलते हैं...
मंडलायुक्त संगीता सिंह ने विदाई समारोह में अपने निजी स्टाफ के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि किसी भी अधिकारी के कार्यकाल को सफल बनाने में व्यक्तिगत स्टाफ की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने पेशकार अरुण कुमार, वैयक्तिक सहायक विकास गंगल और अर्दली जसवंत एवं प्रदीप के समर्पण को विशेष रूप से याद किया।
उन्होंने कहा कि पेशकार अरुण कुमार ने पूरी जिम्मेदारी से न्यायालयीय कार्यों का निर्वहन किया, जबकि उनसे उम्र में काफी छोटे वैयक्तिक सहायक विकास गंगल ने दायित्वों से आगे बढ़कर पिता की तरह उनकी हर छोटी-बड़ी जरूरत का ख्याल रखा। जसवंत और प्रदीप के सहयोग की भी उन्होंने सराहना की। विदाई के बाद जब वह शासकीय वाहन की ओर बढ़ीं तो नजदीक खड़े सूचना फोटोग्राफर विकास भारद्वाज से बोलीं “गुरुजी, अब चलते हैं।” उनका यह सहज संबोधन भावुक विदाई के बीच आत्मीयता की यादगार तस्वीर छोड़ गया।