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डायलिसिस में खेल... पांच की जगह 10 बार हो रहा डायलाइजर का इस्तेमाल
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पं. दीनदयाल उपाध्याय संयुक्त चिकित्सालय परिसर स्थित हीमो डायलिसिस यूनिट में मरीजों की डायलिसिस में खेल चल रहा है। यहां पर डायलाइजर का इस्तेमाल पांच के बदले दस बार किया जा रहा है। ज्यादा बार इस्तेमाल से डायलाइजर की क्षमता कम होती जाती है और मरीजों को कम फायदा होता है। इस संबंध में एडी हेल्थ ने कंपनी को नोटिस जारी किया है। साथ ही एनएचएम को भी लिखा है। इसके अलावा, उन्होंने यूनिट को पेसेंट फ्रेंडली बनाने के दिशा निर्देश जारी किए हैं।
वर्ष 2018 से पं. दीनदयाल उपाध्याय संयुक्त चिकित्सालय में हीमो डायलिसिस यूनिट संचालित हो रही है। एडी हेल्थ डॉ. एसके उपाध्याय ने बताया कि जांच में पाया गया कि यूनिट में पांच के बदले डायलाइजर का दस बार इस्तेमाल किया जा रहा है, जबकि अनुबंध के अनुसार डायलाइजर का इस्तेमाल पांच बार किया जाना है। उन्होंने बताया कि डायलिसिस के दौरान शरीर से निर्धारित मात्रा में खून बाहर निकाल कर शुद्ध किया जाता है। इस शुद्धिकरण के लिए डायलाइजर नामक फिल्टर का इस्तेमाल किया जाता है। ज्यादा बार इस्तेमाल करने से डायलाइजर की क्षमता कम होती जाती है और मरीजों को कम फायदा होता है। बाजार में डायलाइजर की कीमत करीब 600-700 रुपये है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में कंपनी को नोटिस दिया गया है। एनएचएम को भी लिखा गया है।
एडी हेल्थ ने बताया कि सेंटर को पेसेंट फ्रेंडली बनाने के लिए अन्य कदम उठाए जा रहे हैं ताकि मरीज एवं तीमारदारों को भटकना न पड़े। सेंटर पर एक रुपये के पर्चे पर डायलिसिस की जाती है लेकिन मरीजों को दवाएं आदि बाहर से लानी पड़ती है। ऐसे में यूनिट पर ही एरीथ्रोपाईटिन इंजेक्शन उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा। रक्त की मात्रा बढ़ाने के लिए मरीजों को दो-तीन सप्ताह में एक बार इंजेक्शन लगवाना पड़ता है। इंजेक्शन की कीमत अधिक होने के कारण मरीजों को परेशानी होती है। यूनिट पर खून की जांच की सुविधा नहीं है। दीनदयाल चिकित्सालय के सीएमएस से बात कर ऑन कॉल एलटी उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है ताकि मरीजों को जांच एवं रिपोर्ट के लिए दूसरी जगह भटकना नहीं पड़े।
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वर्ष 2018 से पं. दीनदयाल उपाध्याय संयुक्त चिकित्सालय में हीमो डायलिसिस यूनिट संचालित हो रही है। एडी हेल्थ डॉ. एसके उपाध्याय ने बताया कि जांच में पाया गया कि यूनिट में पांच के बदले डायलाइजर का दस बार इस्तेमाल किया जा रहा है, जबकि अनुबंध के अनुसार डायलाइजर का इस्तेमाल पांच बार किया जाना है। उन्होंने बताया कि डायलिसिस के दौरान शरीर से निर्धारित मात्रा में खून बाहर निकाल कर शुद्ध किया जाता है। इस शुद्धिकरण के लिए डायलाइजर नामक फिल्टर का इस्तेमाल किया जाता है। ज्यादा बार इस्तेमाल करने से डायलाइजर की क्षमता कम होती जाती है और मरीजों को कम फायदा होता है। बाजार में डायलाइजर की कीमत करीब 600-700 रुपये है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में कंपनी को नोटिस दिया गया है। एनएचएम को भी लिखा गया है।
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एडी हेल्थ ने बताया कि सेंटर को पेसेंट फ्रेंडली बनाने के लिए अन्य कदम उठाए जा रहे हैं ताकि मरीज एवं तीमारदारों को भटकना न पड़े। सेंटर पर एक रुपये के पर्चे पर डायलिसिस की जाती है लेकिन मरीजों को दवाएं आदि बाहर से लानी पड़ती है। ऐसे में यूनिट पर ही एरीथ्रोपाईटिन इंजेक्शन उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा। रक्त की मात्रा बढ़ाने के लिए मरीजों को दो-तीन सप्ताह में एक बार इंजेक्शन लगवाना पड़ता है। इंजेक्शन की कीमत अधिक होने के कारण मरीजों को परेशानी होती है। यूनिट पर खून की जांच की सुविधा नहीं है। दीनदयाल चिकित्सालय के सीएमएस से बात कर ऑन कॉल एलटी उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है ताकि मरीजों को जांच एवं रिपोर्ट के लिए दूसरी जगह भटकना नहीं पड़े।
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