{"_id":"5c857359bdec2213f10dceda","slug":"the-dark-answer-will-be-dark-and-dark","type":"story","status":"publish","title_hn":"अंधेरे का जवाब अंधेरे से देंगे तो और अंधेरा होगा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अंधेरे का जवाब अंधेरे से देंगे तो और अंधेरा होगा
Mon, 11 Mar 2019 01:58 AM IST
राजेश सिंह
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
Published by: राजेश सिंह
Updated Mon, 11 Mar 2019 01:58 AM IST
विज्ञापन
साहित्यिक महोत्सव में मौजूद प्रो. अपूर्वानंद, हर्ष मंदर एवं डॉ. शाह आलम।
- फोटो : Amar Ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सेवानिवृत्त आईएएस एवं सामाजिक कार्यकर्ता हर्षमंदर ने कहा कि अभी अजीब तरह का नफरत का दौर है। अंधेरे का जवाब अंधेरा से देंगे तो और अंधेरा होगा। नफरत का जवाब मोहब्बत से दे।
हर्ष मंदर एएमयू के कल्चरल एजूकेशन सेंटर (सीईसी) की डिबेटिंग एंड लिटरेरी सोसाइटी के तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय साहित्यिक महोत्सव के आखिरी दिन सामूहिक बातचीत कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। यह कार्यक्रम साहित्य एवं प्रतिरोध विषय पर आयोजित था। इसमें दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रो. अपूर्वानंद एवं एम्स के चिकित्सक व साहित्यकार डॉ. शाह आलम शामिल हुए।
हर्षमंदर ने कहा कि मॉब लिचिंग के शिकार तमाम लोगों के घर जाएंगे और उन्हें बताएंगे कि वह अकेले नहीं है। कानून की लड़ाई में सहायता करेंगे और जब तक लोगों की जमीर न जाग जाए तब तक कहानी बताते रहेंगे।
विज्ञापन
फांसीवाद एवं मॉब लिचिंग आदि की ओर इशारा करते हुए डॉ. शाह आलम ने कहा कि इसके विरुद्ध नहीं बोलने का मतलब है कि आप उनके साथ है। आखिर में आपसे पूछा जाएगा कि आप चुप क्यों थे, जब सब कुछ हो रहा था। उन्होंने कहा कि प्रतिरोधी साहित्य कभी खत्म नहीं होगा।
जो आज अपने आप को खुदा समझते है, वह भी खत्म होंगे। डीयू के प्रो. अपूर्वानंद ने कहा कि साहित्य के स्वभाव में ही प्रतिरोध है। साहित्य ही कह सकता है कि मैं आखिरी जवाब नहीं दे सकता। धर्म राजनीतिक सत्ता से अधिक ताकतवर है।
विज्ञापन
हर्ष मंदर एएमयू के कल्चरल एजूकेशन सेंटर (सीईसी) की डिबेटिंग एंड लिटरेरी सोसाइटी के तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय साहित्यिक महोत्सव के आखिरी दिन सामूहिक बातचीत कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। यह कार्यक्रम साहित्य एवं प्रतिरोध विषय पर आयोजित था। इसमें दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रो. अपूर्वानंद एवं एम्स के चिकित्सक व साहित्यकार डॉ. शाह आलम शामिल हुए।
विज्ञापन
हर्षमंदर ने कहा कि मॉब लिचिंग के शिकार तमाम लोगों के घर जाएंगे और उन्हें बताएंगे कि वह अकेले नहीं है। कानून की लड़ाई में सहायता करेंगे और जब तक लोगों की जमीर न जाग जाए तब तक कहानी बताते रहेंगे।
विज्ञापन
फांसीवाद एवं मॉब लिचिंग आदि की ओर इशारा करते हुए डॉ. शाह आलम ने कहा कि इसके विरुद्ध नहीं बोलने का मतलब है कि आप उनके साथ है। आखिर में आपसे पूछा जाएगा कि आप चुप क्यों थे, जब सब कुछ हो रहा था। उन्होंने कहा कि प्रतिरोधी साहित्य कभी खत्म नहीं होगा।
जो आज अपने आप को खुदा समझते है, वह भी खत्म होंगे। डीयू के प्रो. अपूर्वानंद ने कहा कि साहित्य के स्वभाव में ही प्रतिरोध है। साहित्य ही कह सकता है कि मैं आखिरी जवाब नहीं दे सकता। धर्म राजनीतिक सत्ता से अधिक ताकतवर है।