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रूबी हत्या कांडः 100 लोगों से पूछताछ में सामने आया दादा-दादी का सुराग

Sat, 25 Sep 2021 01:23 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Sat, 25 Sep 2021 01:23 AM IST
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The clues of grandparents came out in the interrogation of 100 people
टप्पल में 20 सितंबर को आठ साल की बच्ची रूबी की हत्या की घटना ने पुलिस प्रशासन को 2019 में हुई घटना की याद दिला दी थी। उसके कटु अनुभवों से सबक लेकर पुलिस टीमें काम कर रही थीं। एसपी देहात खुद कैंप किए रहे। इस दौरान 100 से ज्यादा लोगों से हुई पूछताछ में जब दादा-दादी का नाम उजागर हुआ तो बेहद बारीकी से जांच करते हुए साक्ष्य जुटाए और जब उन साक्ष्यों को पूछताछ के लिए बुलाए गए दादा-दादी के सामने रखा तो वे टूट गए।
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बेटे के करियर की चाह ने बनाया कातिल
पुलिस पूछताछ में खुद दादा-दादी ने बताया कि दो माह पहले उनका छोटा बेटा ओमप्रकाश छूटकर आ गया तो उसको कहीं काम नहीं मिल पा रहा था। इसी बीच समझौते पर भी सामने वाला पक्ष तैयार नहीं हो रहा था। इन्हीं बातों को सोचकर उन्होंने झूठी घटना में फंसाने का प्लान बनाया। उन्हें लगा कि ऐसा कुछ करेंगे, जिससे विपक्षी फंस जाएगा और हमारे बेटे का करियर संवर जाएगा। इसी योजना के तहत कई माह से स्कूल नहीं जा रही नातिन को जबरन तैयार कराकर घटना वाले दिन स्कूल भेजा गया। वह जाते समय दादी से झगड़ाकर बिना मर्जी के निकली थी। दादी से तू तड़ाक में बात कर टॉफी आदि के लिए रुपये मांगे हैं। मगर दादी ने इंकार कर दिया है। चूंकि वह उस दिन अकेली अचानक स्कूल के लिए गई। तो कोई अन्य बच्चा भी साथ नहीं था। उसके दादा दादी ही आगे पीछे जाते हुए लोगों ने देखा था। यही बात पूछताछ में सामने आई कि बच्ची घटना के दिन ही स्कूल गई और घटना हो गई। इसी बिंदु पर पुलिस का माथा ठनका और परिवार के इर्द-गिर्द शक की सुई घूमने लगी।
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बेटे के सामने पुलिस ने कराया सच से सामना
पुलिस के सामने जब दोनों ने हत्या की बात स्वीकार ली तो मृत बच्ची रूबी के पिता को उनके सामने बैठाकर सामना कराया गया। इस पर दोनों ने बिलखते हुए हत्या करना स्वीकारा और कहा कि पता नहीं था कि हम ही फंस जाएंगे। उन्होंने बताया कि 11 बजे करीब वही खुद बच्ची का स्कूल बैग व चप्पल लेकर घर पहुंचे हैं। इस पर बहू से पूछा भी है कि ये रास्ते में मिला है। फिर वापस दादा स्कूल में बच्ची को देखने पहुंचे हैं तो वहां पता चला कि यहां नहीं आई। इसके बाद लौटते में दादी ने ही शव को उस खेत से तलाश लिया, जिसमें फेंका गया था।
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कचहरी के खर्च से भी तंग आ गए थे दोनों
दोनों ने पूछताछ में यह भी बताया कि कोर्ट में भी उनका काफी खर्चा हो गया था और वहीं मृत बच्ची के एक भाई का भी लंबे समय से इलाज चल रहा था। ऐसे में घर के खर्च में दिक्कत आने और कोर्ट कचहरी में और खर्चा न करना पड़े इसके चलते यह साजिश रची थी।
माहौल समझने के बाद एसपी देहात ने किया काम
एसपी देहात ने बताया कि जब 2019 में टप्पल में बच्ची की हत्या हुई थी। उस समय वे जिले में एएसपी थे। उस समय के घटनाक्रम से परिचित होने के कारण, इस घटना के बाद उन्होंने पहले माहौल समझा। फिर जब तथ्या उजागर होते चले गए तो खुलासा करने में मदद मिल गई।
तहरीर में देरी बनी परिवार पर शक का दूसरा कारण
। पुलिस को परिवार पर सबसे पहला शक उस हुआ, जब परिवार बार-बार दबाव डालने के बाद भी घटना वाली रात तक तहरीर देने को तैयार नहीं हुआ था। पुलिस उसी समय इस बात को दबी जुबां से कह रही थी कि कहीं ऐसा तो नहीं कि कोई खिचड़ी पकाई गई हो। चूंकि बच्ची की मौत हुई थी। इसलिए पुलिस ने परिवार की बात मानी और शव पोस्टमार्टम के बाद गांव पहुंचने पर तहरीर मिली। जिसे दर्ज किया गया। खास बात यह भी है कि परिवार हत्या में उसी खेत स्वामी को नामजद करने का मन बना रहा था। मगर, शव मिलने के बाद शाम होते होते पूरे गांव में इस बात की चर्चा होने लगी थी कि जिसकी बेटी से दुष्कर्म के आरोप में लेखराज के बेटे को जेल भेजा गया था, उसे ही फंसाने की साजिश हो रही थी।

इस वर्ष 18वीं वारदात में अपनों का ही निकला हाथ
ये कोई और नहीं, बल्कि जिला पुलिस का रिकार्ड कह रहा है। इस वर्ष अब तक 18वीं हत्या की वारदात में अपनों का हाथ निकलकर आया है। इस तरह 18वीं हत्या की वारदात में अपनों को जेल भेजा गया है। पुलिस रिकार्ड पर गौर करें तो सबसे पहले जनवरी में कोतवाली में बेटे के कत्ल में मां व उसका प्रेमी, फरवरी में क्वार्सी में सराफ की पत्नी की हत्या में उसका बेटा, मार्च में अतरौली के खड़िया बहादुरगढ़ी में, अप्रैल में तेवथू में, पिसावा के डेटा खुर्द में, मई में हरदुआगंज के बरौठा में, जुलाई में अतरौली, हरदुआगंज में लगातार तीन, पिसावा, अकराबाद, बरला, मडराक, रोरावर और अब टप्पल में ये घटनाएं हुई हैं। जिनमें अपनों को जेल भेजा गया है।
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