{"_id":"57dafde34f1c1b3c3dd48728","slug":"the-biggest-issue-is-security-and-increase-fees","type":"story","status":"publish","title_hn":"सुरक्षा और फीस वृद्धि सबसे बड़ा मुद्दा ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सुरक्षा और फीस वृद्धि सबसे बड़ा मुद्दा
अमर उजाला, अलीगढ़
Updated Fri, 16 Sep 2016 01:33 AM IST
विज्ञापन
सुरक्षा और फीस वृद्धि सबसे बड़ा मुद्दा
- फोटो : amar ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
26 सितंबर को एएमयू छात्र संघ चुनाव है। गुरुवार से प्रत्याशियों को नामांकन पत्र मिलना शुरू हो गया है और 17 सितंबर से नामांकन शुरू हो जाएगा। अभी तक जो संकेत मिले हैं इससे साफ जाहिर होता है कि चुनाव के दौरान सुरक्षा एवं फीस वृद्धि का मुद्दा सबसे बड़ा होगा।
बता दें कि पिछले साल एएमयू कैंपस में दिन दहाड़े आलमगीर की गोलियों मारकर हत्या कर दी गई थी। इस दुखद घटना को छात्र भूले भी नहीं थे कि 22-23 अप्रैल की रात प्रॉक्टर ऑफिस के पास दो पूर्व छात्रों की हत्या कर दी गई। इन घटनाओं से छात्रों में भय एवं आक्रोश है।
एएमयू प्रशासन ने सुरक्षा दृष्टिकोण से प्रॉक्टर ऑफिस, आफताब हॉल, सीनियर सेकेंडरी स्कूल आदि साइड का गेट बंद कर दिया है। छात्र नेता इसे चुनावी मुद्दा बनाने की तैयारी में है। दलील दे रहे है कि गेट बंद कर देना सुरक्षा नहीं है। इससे छात्रों की परेशानी और बढ़ गई है। हत्या के लिए छात्र नहीं प्रॉक्टोरियल टीम जिम्मेदार है। ऐसी घटनाओं के बाद सुरक्षा के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर क्यों नहीं कार्रवाई होती।
विज्ञापन
अंग्रेजी विभाग के शोध छात्र अब्दुल फराह शाजली कहते है कि 2012 से 2015 के बीच एएमयू में करीब तीन सौ प्रतिशत फीस वृद्धि हुई है। एक तरफ मुसलमानों की स्थिति दलितों से भी पीछे है। वहीं दूसरी तरफ सब कुछ जानते हुए इतनी वृद्धि क्यों की जा रही है। उन्होंने कहा कि हमारे कुलपति बड़े घर के आदमी है, उन्होंने कभी गरीबी नहीं देखी है।
यदि देखी होती तो इतनी फीस वृद्धि नहीं करने देते। अमीरों के पास सौ विकल्प है, लेकिन गरीब छात्र का नाम मेरिट लिस्ट में नहीं आता तो वह एक या दो साल इंतजार कर पूरी तैयारी के साथ एएमयू में प्रवेश के लिए कोशिश करता है।
उसके परिजनों के पास इतने पैसे नहीं होते कि वह किसी प्राइवेट यूनिवर्सिटी एडमीशन ले कर पढ़ाई कर ले। एएमयू इतिहास विभाग के शोधार्थी मो. अनस कहते है कि 2012 में पीएचडी में एडमीशन लिया था तो मात्र 2100 रुपये लगे थे। अब हर साल 5600 रुपये कंटीन्यूशन के रूप में ले लेते है। विश्वविद्यालय को प्राथमिकता तय करनी होगी।
विज्ञापन
बता दें कि पिछले साल एएमयू कैंपस में दिन दहाड़े आलमगीर की गोलियों मारकर हत्या कर दी गई थी। इस दुखद घटना को छात्र भूले भी नहीं थे कि 22-23 अप्रैल की रात प्रॉक्टर ऑफिस के पास दो पूर्व छात्रों की हत्या कर दी गई। इन घटनाओं से छात्रों में भय एवं आक्रोश है।
विज्ञापन
एएमयू प्रशासन ने सुरक्षा दृष्टिकोण से प्रॉक्टर ऑफिस, आफताब हॉल, सीनियर सेकेंडरी स्कूल आदि साइड का गेट बंद कर दिया है। छात्र नेता इसे चुनावी मुद्दा बनाने की तैयारी में है। दलील दे रहे है कि गेट बंद कर देना सुरक्षा नहीं है। इससे छात्रों की परेशानी और बढ़ गई है। हत्या के लिए छात्र नहीं प्रॉक्टोरियल टीम जिम्मेदार है। ऐसी घटनाओं के बाद सुरक्षा के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर क्यों नहीं कार्रवाई होती।
विज्ञापन
अंग्रेजी विभाग के शोध छात्र अब्दुल फराह शाजली कहते है कि 2012 से 2015 के बीच एएमयू में करीब तीन सौ प्रतिशत फीस वृद्धि हुई है। एक तरफ मुसलमानों की स्थिति दलितों से भी पीछे है। वहीं दूसरी तरफ सब कुछ जानते हुए इतनी वृद्धि क्यों की जा रही है। उन्होंने कहा कि हमारे कुलपति बड़े घर के आदमी है, उन्होंने कभी गरीबी नहीं देखी है।
यदि देखी होती तो इतनी फीस वृद्धि नहीं करने देते। अमीरों के पास सौ विकल्प है, लेकिन गरीब छात्र का नाम मेरिट लिस्ट में नहीं आता तो वह एक या दो साल इंतजार कर पूरी तैयारी के साथ एएमयू में प्रवेश के लिए कोशिश करता है।
उसके परिजनों के पास इतने पैसे नहीं होते कि वह किसी प्राइवेट यूनिवर्सिटी एडमीशन ले कर पढ़ाई कर ले। एएमयू इतिहास विभाग के शोधार्थी मो. अनस कहते है कि 2012 में पीएचडी में एडमीशन लिया था तो मात्र 2100 रुपये लगे थे। अब हर साल 5600 रुपये कंटीन्यूशन के रूप में ले लेते है। विश्वविद्यालय को प्राथमिकता तय करनी होगी।