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बाबरी मंडी बवाल से जुड़े तारिक हत्याकांड में 5 माह बाद बहस पूरी
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महानगर के बाबरी मंडी में सांप्रदायिक झड़प के दौरान हुए बहुचर्चित तारिक हत्याकांड में पांच माह बाद बहस पूरी हो गई। सत्र न्यायालय में बुधवार को बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं की ओर से बहस पूरी की गई। इसके बाद अदालत ने निर्णय के लिए 6 जुलाई तारीख नियत कर दी है। बचाव पक्ष की ओर से फरवरी माह से लगातार इस मुकदमे में बहस के लिए समय मांगा जा रहा था।
ऊपरकोट कोतवाली क्षेत्र में 23 फरवरी 2020 को सीएए-एनआरसी विरोधी उपद्रव की आंच बाबरी मंडी तक पहुंची थी, जहां सांप्रदायिक टकराव में तारिक नाम के युवक के गोली लगी थी। कई दिन बाद जेएन मेडिकल कॉलेज में तारिक की मौत हो गई। इस मुकदमे में भाजपा के बूथ अध्यक्ष व युवा भाजपा नेता विनय वार्ष्णेय, इलाके के ही त्रिलोकी व सुरेंद्र आरोपी बने। सभी को जेल भेजा गया। मामले में त्रिलोकी व सुरेंद्र को जमानत मिल गई। मगर विनय आज भी एटा जेल में बंद है।
इस मुकदमे में फरवरी माह में गवाही व साक्ष्य की प्रक्रिया पूरी हो गई, मगर उसके बाद से बचाव पक्ष बहस के स्तर पर अदालत से समय मांग ले रहा था। बुधवार को नियत तारीख पर बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं ने बहस की, जिसमें बचाव पक्ष से रामबाबू शर्मा, नीरज चौहान, हरिओम वार्ष्णेय आदि अधिवक्ता शामिल रहे। डीजीसी धीरेंद्र सिंह तोमर के अनुसार इस मामले में बहस पूरी होने पर अदालत ने अब निर्णय के लिए 6 जुलाई तारीख नियत कर दी है। बता दें कि विनय वार्ष्णेय ने जेल से ही शहर विधानसभा सीट से भाजपा के बागी के रूप में निर्दल नामांकन दाखिल किया था। हालांकि नामांकन पत्र की जांच में उसका नामांकन खारिज हुआ था।
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ऊपरकोट कोतवाली क्षेत्र में 23 फरवरी 2020 को सीएए-एनआरसी विरोधी उपद्रव की आंच बाबरी मंडी तक पहुंची थी, जहां सांप्रदायिक टकराव में तारिक नाम के युवक के गोली लगी थी। कई दिन बाद जेएन मेडिकल कॉलेज में तारिक की मौत हो गई। इस मुकदमे में भाजपा के बूथ अध्यक्ष व युवा भाजपा नेता विनय वार्ष्णेय, इलाके के ही त्रिलोकी व सुरेंद्र आरोपी बने। सभी को जेल भेजा गया। मामले में त्रिलोकी व सुरेंद्र को जमानत मिल गई। मगर विनय आज भी एटा जेल में बंद है।
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इस मुकदमे में फरवरी माह में गवाही व साक्ष्य की प्रक्रिया पूरी हो गई, मगर उसके बाद से बचाव पक्ष बहस के स्तर पर अदालत से समय मांग ले रहा था। बुधवार को नियत तारीख पर बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं ने बहस की, जिसमें बचाव पक्ष से रामबाबू शर्मा, नीरज चौहान, हरिओम वार्ष्णेय आदि अधिवक्ता शामिल रहे। डीजीसी धीरेंद्र सिंह तोमर के अनुसार इस मामले में बहस पूरी होने पर अदालत ने अब निर्णय के लिए 6 जुलाई तारीख नियत कर दी है। बता दें कि विनय वार्ष्णेय ने जेल से ही शहर विधानसभा सीट से भाजपा के बागी के रूप में निर्दल नामांकन दाखिल किया था। हालांकि नामांकन पत्र की जांच में उसका नामांकन खारिज हुआ था।
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