फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Aligarh News ›   tanjil murder

बटला, जामिया की भीड़ में खोज थी जटिल..लौटी पुलिस

Fri, 08 Apr 2016 01:49 AM IST
अभिषेक शर्मा
अभिषेक शर्मा Updated Fri, 08 Apr 2016 01:49 AM IST
विज्ञापन
tanjil murder
मुनीर - फोटो : अलीगढ़/ब्यूरो
बिजनौर में डिप्टी एसपी तंजील अहमद की हत्या के बाद पश्चिमी यूपी की पुलिस, एसटीएफ और अन्य जांच एजेंसियों के निशाने पर आए एएमयू के पूर्व छात्र शूटर मुनीर मेहताब का अभी कोई सुराग नहीं लगा। मगर उसके पिछले दो साल की फरारी पर गौर करें तो दिल्ली के पुलिस के लिए चुनौती भरे बटला हाउस-जामिया इलाके में शरण पाता है। बिना मोबाइल और बिना किसी परिचित के संपर्क में रहे वह किसी दस्यू की तरह रहता है और खुद जरूरत आने पर किसी से भी मिलता है। आलमगीर की हत्या के बाद जब मुनीर को लेकर बटला-जामिया में खबरें मिलीं और टीम वहां पहुंची भी। मगर वहां का माहौल देख और सटीक सूचना न होने पर टीम हाथ खड़े कर लौट आई।
विज्ञापन

एएमयू कैंपस में 9 सितंबर को आलमगीर की हत्या के बाद जब मुनीर की गिरफ्तारी को लेकर छात्रों के दबाव बना तो सिविल लाइंस पुलिस, सर्विलांस और क्राइम ब्रांच की मदद से उसकी गिरफ्तारी के हर संभव प्रयास किए। पुलिस ने मुखबिरों की मदद जो जानकारियां जुटाईं। उनसे यही पता चलता कि उसे आते-जाते जरूर देखा। मगर कहां रुकता है और कहां आता-जाता है, कुछ नहीं पता। काफी समय के प्रयास के बाद दिल्ली की लोकेशन ट्रैस हुई। मगर गिरफ्तारी में सफलता हाथ नहीं लगी। पीठ पर बैग और उसमें हथियारों व कारतूसों का जखीरा लेकर चलने वाला यह अपराधी बिना मोबाइल के ही चलता। जब उसे किसी से मिलना होता तो खुद पहुंच जाता। या फिर उसे किसी पब्लिक बूथ से फोन कर संपर्क करता। इसलिए उसकी मुखबिरी नहीं मिल पाई। हाल यह रहा कि परिजनों या दोस्तों से भी दूरी बना लेता। खुद एएमयू के ही दूसरे निलंबित छात्र व फहद हत्याकांड में उसके साथी आशुतोष मिश्रा से भी गिरफ्तारी के बाद वह आज तक नहीं मिला। मगर जेल से ही मिले उसके एक इशारे पर उसने आलमगीर को जरूर मार गिराया।
विज्ञापन


मुनीर के एएमयू छात्र होने पर खड़ा हुआ विवाद
अलीगढ़। एएमयू के ही निलंबित लॉ छात्र आशुतोष मिश्रा के दोस्त मुनीर का नाम कई साल की फरारी के बाद जब तंजील अहमद जैसे अफसर की हत्या से जुड़ा तो मुनीर के एएमयू छात्र होने पर ही विवाद खड़ा हो गया। एएमयू प्रॉक्टर ने अपने कार्यालय के 2007 तक के रिकार्ड के अनुसार उसे एएमयू का छात्र मानने से ही इंकार कर दिया। उनका कहना है कि उसने यहां कभी प्रवेश ही नहीं लिया। दावा यहां तक है कि हो सकता है कि एएमयू उसकी आपराधिक गतिविधियों का केंद्र रहा हो। इसलिए बाहर लोगों से बचने के लिए खुद को छात्र बताता हो।
विज्ञापन
विज्ञापन

मगर एएमयू से जुड़े इस ग्रुप के छात्र इस बात पर नाइत्तफाकी जता रहे हैं।
एएमयू प्रॉक्टर प्रो. मोहसीन खान से मुनीर को लेकर जब मीडिया जानकारी मांगी तो उन्होंने साफ-साफ कह दिया कि मुनीर कभी एएमयू का छात्र नहीं रहा। उन्होंने अपने कार्यालय में मौजूद वर्ष 2007 तक के दस्तावेजों को इसके साक्ष्य के रूप में पेश किया। हालांकि एएमयू इंतजामिया के इस तर्क को आशुतोष मिश्रा व मुनीर गुट के छात्र मानने को तैयार नहीं हैं। इन्हीं से जुड़े कुछ जानकार बताते हैं कि मुनीर ने दाखिला लिया था। मगर एएमयू के नियम के अनुसार वह दाखिले के कुछ माह बाद ही आपराधिक गतिविधयों में आने के कारण निलंबित कर दिया गया। एक साल से पहले निलंबित होने के प्रकरण में नियम है कि उसे पूर्व छात्र का भी दर्जा नहीं मिलेगा और न एएमयू से मिलने वाला छात्र एकभनोलेजमेंट कोड मिलेगा। इसी नियम के तहत इंतजामिया उसे पूर्व या निलंबित छात्र नहीं मान रही। वहीं पुलिस सूत्र भी बता रहे हैं कि फहद हत्याकांड में नाम आने के बाद जब एएमयू से पूछा गया तो मौखिक तौर पर उसे निलंबित छात्र बताया गया था।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed