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Aligarh News: ये जमीन क्यों न फटी और फलक क्यों न गिरा...
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एएमयू के बैतुस्सलात में मुहर्रम के जुलूस में मातम करते लोग।
- फोटो : samvad
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दसवीं मुहर्रम (यौमे आशूरा) पर शुक्रवार की सुबह आठ बजे से ही अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) के बैतुस्सलात में अजादारों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई। दुआ के बाद ताजिया-अलम का जुलूस निकाला गया। अजादारों ने पढ़ा- पुश्ते जिन्दान से रातों को ये आती है सदा, ये जमीन क्यों न फटी और फलक क्यों न गिरा।
इससे पहले काले लिबास में अजादार कर्बला में हजरत इमाम हुसैन और उनके साथियों की शहादत की याद में मजलिस में शामिल हुए। ईरान के कुम शहर से आए मौलाना सैयद सादिक अब्बास रिजवी ने जैसे ही कर्बला के मंजर को बयां किया, वैसे ही अजादारों की सिसकियाें से इमामबाड़ा गूंज उठा। उनकी आंखें नम हो गईं। वहीं, मौलाना का भी गला रूंध गया। दो मिनट के लिए खामोशी छा गई।
इसके बाद जुलूस आफताब हॉल के रास्ते से होते हुए शमशाद मार्केट पहुंचा। इस दौरान या हुसैन और या अब्बास की सदाओं से रास्ता गूंज रहा था। शमशाद मार्केट पर मौलाना नवेद अब्बास ने कहा कि कर्बला की जंग हक और बातिल के बीच की थी।
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उन्होंने कहा कि हजरत इमाम हुसैन ने इंसानियत, न्याय और सच्चाई की रक्षा के लिए अपना सब कुछ कुर्बान कर दिया, लेकिन अत्याचार के सामने सिर नहीं झुकाया। उनका पैगाम पूरी दुनिया के लिए अमन, सब्र और इंसाफ का संदेश है। शमशाद मार्केट पर अजादारों ने जंजीरी मातम किया।
इसके बाद जुलूस जेल रोड, जेल पुल, गूलर रोड, थाना देहली गेट होते हुए कर्बला शाहजमाल पहुंचा। 149 ताजिया जुलूस सुपुर्द-ए-खाक किया गया। भुजपुरा, बाबरी मंडी, घास मंडी सहित अन्य इलाकों से ताजिया जुलूस पहुंचा। उधर, जीवनगढ़ और जमालपुर में भी ताजियों को सुपुर्द-ए-खाक किया गया। उमस भरी गर्मी के चलते कर्बला में काशिफ और आरिफ की तबीयत बिगड़ गई। खुले में उन्हें बिठाया गया, तब उनकी हालत में सुधार हुआ। वहीं, जगह-जगह शरबत पिलाया गया।
मुहर्रम बलिदान व मानवता की सीख देता है : सादिक
कर्बला में मौलाना सैयद सादिक अब्बास ने कहा कि 10 मुहर्रम आतंक विरोधी दिवस है, क्याेंकि 1400 साल पहले यजीदी हुकूमत के अन्या और अत्याचार के खिलाफ इमाम हुसैन खड़े हुए थे। उन्होंने कहा कि मुहर्रम हमें त्याग, बलिदान और मानवता की सेवा की सीख देता है। इमाम हुसैन की शहादत केवल मुसलमानों की नहीं, बल्कि हर उस इंसान की विरासत है, जो सत्य और न्याय में विश्वास रखता है। हमें उनके बताए रास्ते पर चलकर समाज में प्रेम और भाईचारा बढ़ाना चाहिए। कर्बला का संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है, जितना 1400 साल पहले था। इमाम हुसैन ने सिखाया कि अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना और इंसानियत की रक्षा करना हर व्यक्ति का कर्तव्य है।
ये अंजुमन हुईं शामिल
अंजुमन-ए-असगरी, अंजुमन-ए-अब्बासिया, अंजुमन-ए-सकीना, अंजुमन-ए-अकबरी, लश्करी हुसैन, यादगारे कर्बला, सोगवारे कर्बला, वफादार-ए-हुसैन अन्य।
एएमयू परिसर में ही रहा 35 फीट ऊंचा अलम
एएमयू परिसर में ही 35 फीट ऊंचा अलम रहा। यह अलम परिसर में घूमकर बैतुस्सलात में वापस हो गया। प्रशासन के निर्देश के बाद ऐसा किया गया। एक अलम की ऊंचाई 12 फीट से ज्यादा थी। उसकी छड़ बदलवाकर छोटा कराया गया, फिर वह जुलूस में शामिल हुआ।
अजादारों को शरबत पिलाया
पूर्व महापौर प्रत्याशी सलमान शाहिद ने शिविर लगाकर अजादारों की सेवा की और शरबत बांटा। कर्बला पर रक्तदान कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। मौके पर पार्षद हारून अहमद, पार्षद शकील, अब्दुल कबीर, अजीम उर्फ लाला, ताहिर, नवेद इकबाल, इमरान रैना हफीज खान, राजू आदि मौजूद रहे। समाजवादी छात्र सभा ने जमालपुर ईदगाह पर शरबत का वितरण किया। अखिल भारतीय सर्वधर्म भाईचारा एवं एकता विचार मंच के अध्यक्ष बाबा फरीद आजाद भी जुलूस में शामिल हुए। दारा शिकोह फाउंडेशन ने शरबत बांटा। अध्यक्ष मोहम्मद आमिर रशीद, तनवीर रशीद, रुकनुद्दीन आदि मौजूद रहे। ब्यूरो
तानाशाही के आगे नहीं झुके हसैन : डाॅ. नियाजी
कर्बला लियाकत बाग (चिलकौरा) में डॉ. मोहम्मद अब्बास नियाजी ने कहा कि इमाम हुसैन ने यजीद जैसे अत्याचारी शासक की तानाशाही के आगे झुकने से इन्कार कर दिया, क्योंकि इमाम हुसैन के लिए सिद्धांतों से समझौता करना नामुमकिन था।
तानाशाही के आगे नहीं झुके हसैन : डाॅ. नियाजी
अलीगढ़। कर्बला लियाकत बाग (चिलकौरा) में डॉ. मोहम्मद अब्बास नियाजी ने कहा कि इमाम हुसैन ने यजीद जैसे अत्याचारी शासक की तानाशाही के आगे झुकने से इन्कार कर दिया, क्योंकि इमाम हुसैन के लिए सिद्धांतों से समझौता करना नामुमकिन था। ब्यूरो
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इससे पहले काले लिबास में अजादार कर्बला में हजरत इमाम हुसैन और उनके साथियों की शहादत की याद में मजलिस में शामिल हुए। ईरान के कुम शहर से आए मौलाना सैयद सादिक अब्बास रिजवी ने जैसे ही कर्बला के मंजर को बयां किया, वैसे ही अजादारों की सिसकियाें से इमामबाड़ा गूंज उठा। उनकी आंखें नम हो गईं। वहीं, मौलाना का भी गला रूंध गया। दो मिनट के लिए खामोशी छा गई।
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इसके बाद जुलूस आफताब हॉल के रास्ते से होते हुए शमशाद मार्केट पहुंचा। इस दौरान या हुसैन और या अब्बास की सदाओं से रास्ता गूंज रहा था। शमशाद मार्केट पर मौलाना नवेद अब्बास ने कहा कि कर्बला की जंग हक और बातिल के बीच की थी।
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उन्होंने कहा कि हजरत इमाम हुसैन ने इंसानियत, न्याय और सच्चाई की रक्षा के लिए अपना सब कुछ कुर्बान कर दिया, लेकिन अत्याचार के सामने सिर नहीं झुकाया। उनका पैगाम पूरी दुनिया के लिए अमन, सब्र और इंसाफ का संदेश है। शमशाद मार्केट पर अजादारों ने जंजीरी मातम किया।
इसके बाद जुलूस जेल रोड, जेल पुल, गूलर रोड, थाना देहली गेट होते हुए कर्बला शाहजमाल पहुंचा। 149 ताजिया जुलूस सुपुर्द-ए-खाक किया गया। भुजपुरा, बाबरी मंडी, घास मंडी सहित अन्य इलाकों से ताजिया जुलूस पहुंचा। उधर, जीवनगढ़ और जमालपुर में भी ताजियों को सुपुर्द-ए-खाक किया गया। उमस भरी गर्मी के चलते कर्बला में काशिफ और आरिफ की तबीयत बिगड़ गई। खुले में उन्हें बिठाया गया, तब उनकी हालत में सुधार हुआ। वहीं, जगह-जगह शरबत पिलाया गया।
मुहर्रम बलिदान व मानवता की सीख देता है : सादिक
कर्बला में मौलाना सैयद सादिक अब्बास ने कहा कि 10 मुहर्रम आतंक विरोधी दिवस है, क्याेंकि 1400 साल पहले यजीदी हुकूमत के अन्या और अत्याचार के खिलाफ इमाम हुसैन खड़े हुए थे। उन्होंने कहा कि मुहर्रम हमें त्याग, बलिदान और मानवता की सेवा की सीख देता है। इमाम हुसैन की शहादत केवल मुसलमानों की नहीं, बल्कि हर उस इंसान की विरासत है, जो सत्य और न्याय में विश्वास रखता है। हमें उनके बताए रास्ते पर चलकर समाज में प्रेम और भाईचारा बढ़ाना चाहिए। कर्बला का संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है, जितना 1400 साल पहले था। इमाम हुसैन ने सिखाया कि अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना और इंसानियत की रक्षा करना हर व्यक्ति का कर्तव्य है।
ये अंजुमन हुईं शामिल
अंजुमन-ए-असगरी, अंजुमन-ए-अब्बासिया, अंजुमन-ए-सकीना, अंजुमन-ए-अकबरी, लश्करी हुसैन, यादगारे कर्बला, सोगवारे कर्बला, वफादार-ए-हुसैन अन्य।
एएमयू परिसर में ही रहा 35 फीट ऊंचा अलम
एएमयू परिसर में ही 35 फीट ऊंचा अलम रहा। यह अलम परिसर में घूमकर बैतुस्सलात में वापस हो गया। प्रशासन के निर्देश के बाद ऐसा किया गया। एक अलम की ऊंचाई 12 फीट से ज्यादा थी। उसकी छड़ बदलवाकर छोटा कराया गया, फिर वह जुलूस में शामिल हुआ।
अजादारों को शरबत पिलाया
पूर्व महापौर प्रत्याशी सलमान शाहिद ने शिविर लगाकर अजादारों की सेवा की और शरबत बांटा। कर्बला पर रक्तदान कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। मौके पर पार्षद हारून अहमद, पार्षद शकील, अब्दुल कबीर, अजीम उर्फ लाला, ताहिर, नवेद इकबाल, इमरान रैना हफीज खान, राजू आदि मौजूद रहे। समाजवादी छात्र सभा ने जमालपुर ईदगाह पर शरबत का वितरण किया। अखिल भारतीय सर्वधर्म भाईचारा एवं एकता विचार मंच के अध्यक्ष बाबा फरीद आजाद भी जुलूस में शामिल हुए। दारा शिकोह फाउंडेशन ने शरबत बांटा। अध्यक्ष मोहम्मद आमिर रशीद, तनवीर रशीद, रुकनुद्दीन आदि मौजूद रहे। ब्यूरो
तानाशाही के आगे नहीं झुके हसैन : डाॅ. नियाजी
कर्बला लियाकत बाग (चिलकौरा) में डॉ. मोहम्मद अब्बास नियाजी ने कहा कि इमाम हुसैन ने यजीद जैसे अत्याचारी शासक की तानाशाही के आगे झुकने से इन्कार कर दिया, क्योंकि इमाम हुसैन के लिए सिद्धांतों से समझौता करना नामुमकिन था।
तानाशाही के आगे नहीं झुके हसैन : डाॅ. नियाजी
अलीगढ़। कर्बला लियाकत बाग (चिलकौरा) में डॉ. मोहम्मद अब्बास नियाजी ने कहा कि इमाम हुसैन ने यजीद जैसे अत्याचारी शासक की तानाशाही के आगे झुकने से इन्कार कर दिया, क्योंकि इमाम हुसैन के लिए सिद्धांतों से समझौता करना नामुमकिन था। ब्यूरो