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मुसलमानों को सैयद ने दिखाई नई राह : प्रो. हसन

Thu, 24 Nov 2022 08:00 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Thu, 24 Nov 2022 08:00 AM IST
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Syed showed new path to Muslims: Prof. Hasan
मौलाना आजाद राष्ट्रीय उर्दू विश्वविद्यालय हैदराबाद के कुलपति प्रो. सैयद ऐनुल हसन ने कहा है कि सैयद उल उलमा ने अपनी बौद्धिक और वैचारिक सेवाओं से मुसलमानों को एक नई राह दिखाई। उन्हें आधुनिकता और पश्चिमीकरण के आक्रमण से बचाया। बुधवार को वह एएमयू के जेएनएमसी सभागार में धार्मिक विद्वान और शोधकर्ता सैयद उल उलमा अल्लामा अली नकी नकवी के जीवन और सेवाओं पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में बोल रहे थे।
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यह आयोजन एएमयू के शिया धर्मशास्त्र विभाग की तरफ से था। उन्होंने कहा कि अल्लामा नकवी मुसलमानों में एकता के दूत थे। उन्होंने मुसलमानों को संघर्ष की परिस्थितियों से बाहर निकालने की कोशिश की। उनके तीन सौ से अधिक लेख और एक हजार शोध पत्र इसका प्रमाण हैं। एएमयू के कुलपति प्रो. तारिक मंसूर ने कहा कि अल्लामा अली नकी नकवी एक महान विद्वान और बुद्धिजीवी थे।
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शिक्षित कहलाने के लिए केवल डिग्री होना ही काफी नहीं है, बल्कि बौद्धिक विशिष्टता के साथ अच्छा व्यवहार आवश्यक है। प्रो. मंसूर ने कहा कि शिया-सुन्नी एकता का भी प्रयास किया जाना चाहिए, ताकि शांति और सहिष्णुता के प्रयासों को सही अर्थों में बल मिल सके। ईरान के विद्वान अयातुल्ला महदविपुर ने कहा कि अल्लामा अली नकवी तफसीर और हदीस के नहीं, बल्कि न्यायशास्त्र, धर्मशास्त्र, दर्शन और सामूहिक विज्ञान के भी जानकार थे। उन्होंने तर्क के साथ धर्म के नियमों से निष्कर्ष निकाला।
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ईरानी दूतावास नई दिल्ली के सांस्कृतिक परामर्शदाता डॉ. मोहम्मद अली रब्बानी ने बताया कि सैयद उल उलमा एक महान बुद्धिजीवी थे, जिन्होंने आधुनिकता, साम्राज्यवाद और पश्चिमी सभ्यता के आक्रमण का विरोध किया और इस्लामी शिक्षाओं का दृढ़ता से बचाव किया। जकात फाउंडेशन ऑफ इंडिया के डॉ. जफर महमूद ने कहा कि कुरान में संदेश है कि मानव जाति एक बड़ा परिवार और पीढ़ी है।
शिया धर्मशास्त्र विभाग के अध्यक्ष और संगोष्ठी के निदेशक प्रो. सैयद तैयब रजा नकवी ने स्वागत भाषण दिया। अल मकतब लखनऊ के सचिव मौलाना सफी हैदर, मौलाना कल्बे जवाद नकवी, हकीम प्रोफेसर सैयद जिल्लुर रहमान, पूर्व कुलपति जामिया मिल्लिया इस्लामिया प्रो. शाहिद मेहंदी, शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष अली जैदी आदि ने विचार व्यक्त किए।

डॉ. असगर एजाज ने धन्यवाद ज्ञापित किया। संचालन डॉ. शारिक अकील ने किया। इस अवसर पर तफसीर मजमा अल-बयान का अनुवाद और एएमयू के साथ सैयद उल उलमा के संबंधों पर आधारित एक पुस्तक का विमोचन भी हुआ।
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