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तलवार, गदा और तीर कमान, अब नहीं आ रहे काम
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पवन कुमार, अचलताल।
- फोटो : CITY OFFICE
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जन्माष्टमी से लेकर दशहरे और दीपावली तक बच्चों के लिए खिलौने बनाने वाले कारीगरों ने अपने परंपरागत काम से तौबा कर ली है। खिलौनों की बिक्री न होने के चलते गत्ते की तलवार, गदा, फरसा और धनुष बाण बनाने वाले परिवारों ने इस साल अन्य रोजगार में अपने आप को ढाल लिया है। सिर्फ कुछ ही लोग धनुष वाण जैसे खिलौने बनाने की तैयारी कर रहे हैं।
शहर में प्रतिवर्ष आयोजित होने वाले जन्माष्टमी, दशहरे, रामलीला के कार्यक्रमों से कई लोगों को रोजगार मिलता है। इस त्यौहार में अचलताल द्वारिकापुरी क्षेत्र के कई परिवार गदा, तलवार, धनुष बाण बनाते थे और फेरी लगाकर इनकी बिक्री करते थे। गत्ते से बनी तलवार, गदा दस रुपये में बिकती थी। धनुष वाण भी दस रुपये में बेचे जाते थे। जबकि इनके साथ दिल्ली से लाए मुखौटों की बिक्री भी होती थी। दशहरे मेले में बिक्री के लिए जन्माष्टमी से तैयारियां हो जाती थीं, लेकिन इस बार जब अमर उजाला ने पड़ताल की तो पता चला कि अभी तक किसी ने काम शुरू नहीं किया है। परंपरागत धंधे को छोड़कर अन्य रोजगार के साधन जुटा लिये गए हैं। यह निर्णय कोरोना संक्रमण काल और उसके चलते रद्द हो रहे मेले व अन्य कार्यक्रमों के कारण लिया गया है।
- रक्षाबंधन से हमारे क्षेत्र के कई परिवार धनुष बाण, तीर-कमान, गदा, तलवार, फरसा इत्यादि बनाते थे। वर्तमान हालातों को देखते हुए अन्य रोजगार से जुड़ गए हैं। इस साल खिलौने बनाने का कोई इरादा नहीं है।
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- ओमप्रकाश, निवासी द्वारिकापुरी अचलताल।
-हर साल परिवार के लोग मिलकर खिलौने बनाते थे। इनकी बिक्री से परिवार का पालन होता था। लेकिन इस बार अब अन्य जगह मजदूरी कर समय बिता रहे हैं। अगर रामलीला होती है तो धनुष वाण जैसे खिलौने बनाना शुरू करेंगे।
-पवन कुमार, अचलताल।
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शहर में प्रतिवर्ष आयोजित होने वाले जन्माष्टमी, दशहरे, रामलीला के कार्यक्रमों से कई लोगों को रोजगार मिलता है। इस त्यौहार में अचलताल द्वारिकापुरी क्षेत्र के कई परिवार गदा, तलवार, धनुष बाण बनाते थे और फेरी लगाकर इनकी बिक्री करते थे। गत्ते से बनी तलवार, गदा दस रुपये में बिकती थी। धनुष वाण भी दस रुपये में बेचे जाते थे। जबकि इनके साथ दिल्ली से लाए मुखौटों की बिक्री भी होती थी। दशहरे मेले में बिक्री के लिए जन्माष्टमी से तैयारियां हो जाती थीं, लेकिन इस बार जब अमर उजाला ने पड़ताल की तो पता चला कि अभी तक किसी ने काम शुरू नहीं किया है। परंपरागत धंधे को छोड़कर अन्य रोजगार के साधन जुटा लिये गए हैं। यह निर्णय कोरोना संक्रमण काल और उसके चलते रद्द हो रहे मेले व अन्य कार्यक्रमों के कारण लिया गया है।
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- रक्षाबंधन से हमारे क्षेत्र के कई परिवार धनुष बाण, तीर-कमान, गदा, तलवार, फरसा इत्यादि बनाते थे। वर्तमान हालातों को देखते हुए अन्य रोजगार से जुड़ गए हैं। इस साल खिलौने बनाने का कोई इरादा नहीं है।
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- ओमप्रकाश, निवासी द्वारिकापुरी अचलताल।
-हर साल परिवार के लोग मिलकर खिलौने बनाते थे। इनकी बिक्री से परिवार का पालन होता था। लेकिन इस बार अब अन्य जगह मजदूरी कर समय बिता रहे हैं। अगर रामलीला होती है तो धनुष वाण जैसे खिलौने बनाना शुरू करेंगे।
-पवन कुमार, अचलताल।

ओमप्रकाश, द्वारिकापुरी अचलताल।- फोटो : CITY OFFICE