{"_id":"61e716bb90db194d0a115002","slug":"suspicion-on-the-killing-machine-a-gang-city-office-news-ali283380731","type":"story","status":"publish","title_hn":"अलीगढ़ः रंगदारी कांड...‘द किलिंग मशीन ए गैंग’ पर गहराया शक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अलीगढ़ः रंगदारी कांड...‘द किलिंग मशीन ए गैंग’ पर गहराया शक
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अभिषेक शर्मा
‘द किलिंग मशीन ए गैंग’ फिर सुर्खियों में है। वजह है सिविल लाइंस के कादरी ट्रेवल एजेंसी संचालक से रंगदारी और फायरिंग की घटना। इस घटना में दिल्ली की तिहाड़ जेल से रंगदारी मांगने की बात सामने आ रही है। शहर के इस इलाके में पहले भी इस तरह की घटनाएं हुई हैं। तिहाड़ जेल में निरुद्ध कुख्यात अपराधी व एनआईए के डीएसपी तंजील अहमद हत्याकांड के मुख्य आरोपी मुनीर की देखरेख में चलने वाले इस गैंग द्वारा रंगदारी मांगने की घटनाएं प्रकाश में आई हैं। पुलिस द्वारा कई बार गुर्गे दबोचे गए हैं। कुछ दिन ये सब शांत रहता है। मगर फिर शुरू हो जाता है। इस घटना में पुलिस ने एक बार फिर इस दिशा में काम शुरू कर दिया है।
ये है इस गैंग का आपराधिक इतिहास
सरगना मुनीर मेहताब पश्चिमी यूपी में जरायम की दुनिया का बड़ा नाम है। बिजनौर के स्योहारा कस्बे के सहसपुर गांव से एएमयू में दाखिला लेने के उद्देश्य से यहां आए मुनीर ने पढ़ाई के बजाय जरायम की दुनिया का रास्ता अख्तियार कर लिया। सोशल मीडिया पर दाऊद की तर्ज पर ‘द किलिंग मशीन ए गैंग’ नाम से गैंग बनाकर अनगिनत हत्याएं और लूट कीं। मुनीर के इस गैंग में फर्रुखाबाद का आशुतोष मिश्रा, अंबेडकर नगर टांडा का सऊद, अलीगढ़ के बरला का जुबैर, मारा गया उसका भाई सद्दाम, बिहार का अतीउल्लाह, आजमगढ़ का सादाब आदि नाम हैं, जो इस गैंग के सदस्य हैं। शहर में इस गैंग ने 32 व 35 लाख रुपये की लूट, एएमयू में छात्र आलमगीर की हत्या, सिविल लाइंस में कारोबारी फहद की हत्या, एएमयूकर्मी की दोदपुर में हत्या, पान दरीबा में रेलवे मजिस्ट्रेट के गनर की हत्या व सर्विस पिस्टल लूट सहित अन्य तीन-चार लूट को अंजाम दिया। इसके अलावा, दिल्ली, लखनऊ, गाजियाबाद में हत्याएं और लूट कीं। इसी बीच एनआईए के डीएसपी तंजील अहमद दंपती की हत्या के बाद मुनीर व उसका गैंग सुर्खियों में आया। इसके बाद से वह व उसके अधिकांश साथी जेल में हैं। कुछ जमानत पर तो एक फरार है।
अब तक ये रहीं रंगदारी से जुड़ीं घटनाएं
वैसे तो महानगर के हर इलाके में इनके नाम पर घटनाएं दर्ज हैं। मगर इनका मुख्य कार्यक्षेत्र सिविल लाइंस ही रहा है। जेल जाने के बाद सादाब जमानत पर छूटकर आया तो रंगदारी मांगे जाने, वीडियो कॉल पर लोगों को धमकी मिलने की घटनाएं सामने आईं। जांच में उजागर हुआ कि तिहाड़ जेल से रंगदारी मांगी जा रही हैं। यहां सादाब, जुबैर सहित अन्य गुर्गे मध्यस्थता कर रहे हैं। इस पर उस समय पुलिस पीछे लगी। कुछ लोग जेल भेजे गए तो यह धंधा कुछ समय शांत रहा। कुछ समय बाद इन गुर्गों के गैंग में दो बार रंगदारी बंटवारे को लेकर झगड़े हुए। एक विवाद में तो आपस में एक हत्या तक हुई। इसी विवाद में लाल डिग्गी के पास हुई फायरिंग में एएमयू के अब्दुल्ला कॉलेज की नर्सरी की छात्रा अचानक गोली लगने से मारी गई। धौर्रा में इन दोनों गुटों में फायरिंग हुई। उस समय पुलिस की ताबड़तोड़ कार्रवाई से ये गैंग ठंडा पड़ा था।
विज्ञापन
फिर से सिर उठाने का लग अंदेशा
इस गैंग के निशाने पर सिविल लाइंस के व्यापारी, एएमयू से जुड़े ठेकेदार, कोचिंग संचालक व कुछ प्रोफेसर भी रहे हैं। पूर्व में अंदरखाने व कभी कभी शिकायतें पुलिस तक आई हैं। अब कादरी ट्रेवल एजेंसी संचालक की शिकायत के बाद एक बार फिर इसी गैंग के सिर उठाने का अंदेशा प्रतीत हो रहा है। खास बात है कि सादाब जमानत के बाद बाहर था। उसकी मौजूदा स्थिति की जानकारी नहीं है। 50 हजार का इनामी सऊद छात्र आलमगीर व तंजील अहमद की हत्या के बाद आज तक पकड़ा नहीं गया। उसके कई बार विदेश भागने के अंदेशे पर रेड कॉर्नर नोटिस जारी हुए। पता नहीं, वह कहां है और किन गतिविधियों में है। फिलहाल पुलिस इस घटना में इस गैंग को ध्यान में रखकर भी काम कर रही है।
- ट्रेवल एजेंसी संचालक से रंगदारी की घटना में कौन लोग हैं, इसका पता लगाया जा रहा है। जिस नंबर से धमकी आई, उसकी ट्रू कॉलर आईडी जुबैर तिहाड़ जेल आई है। सर्विलांस से उसकी जानकारी की जा रही है। जो भी तथ्य सामने आएंगे, उस पर कार्रवाई होगी। मुनीर या उसके गैंग से जुड़े पुराने लोगों की जानकारी भी जुटाई जाएगी।
- श्वेताभ पांडेय, सीओ तृतीय
विज्ञापन
‘द किलिंग मशीन ए गैंग’ फिर सुर्खियों में है। वजह है सिविल लाइंस के कादरी ट्रेवल एजेंसी संचालक से रंगदारी और फायरिंग की घटना। इस घटना में दिल्ली की तिहाड़ जेल से रंगदारी मांगने की बात सामने आ रही है। शहर के इस इलाके में पहले भी इस तरह की घटनाएं हुई हैं। तिहाड़ जेल में निरुद्ध कुख्यात अपराधी व एनआईए के डीएसपी तंजील अहमद हत्याकांड के मुख्य आरोपी मुनीर की देखरेख में चलने वाले इस गैंग द्वारा रंगदारी मांगने की घटनाएं प्रकाश में आई हैं। पुलिस द्वारा कई बार गुर्गे दबोचे गए हैं। कुछ दिन ये सब शांत रहता है। मगर फिर शुरू हो जाता है। इस घटना में पुलिस ने एक बार फिर इस दिशा में काम शुरू कर दिया है।
ये है इस गैंग का आपराधिक इतिहास
सरगना मुनीर मेहताब पश्चिमी यूपी में जरायम की दुनिया का बड़ा नाम है। बिजनौर के स्योहारा कस्बे के सहसपुर गांव से एएमयू में दाखिला लेने के उद्देश्य से यहां आए मुनीर ने पढ़ाई के बजाय जरायम की दुनिया का रास्ता अख्तियार कर लिया। सोशल मीडिया पर दाऊद की तर्ज पर ‘द किलिंग मशीन ए गैंग’ नाम से गैंग बनाकर अनगिनत हत्याएं और लूट कीं। मुनीर के इस गैंग में फर्रुखाबाद का आशुतोष मिश्रा, अंबेडकर नगर टांडा का सऊद, अलीगढ़ के बरला का जुबैर, मारा गया उसका भाई सद्दाम, बिहार का अतीउल्लाह, आजमगढ़ का सादाब आदि नाम हैं, जो इस गैंग के सदस्य हैं। शहर में इस गैंग ने 32 व 35 लाख रुपये की लूट, एएमयू में छात्र आलमगीर की हत्या, सिविल लाइंस में कारोबारी फहद की हत्या, एएमयूकर्मी की दोदपुर में हत्या, पान दरीबा में रेलवे मजिस्ट्रेट के गनर की हत्या व सर्विस पिस्टल लूट सहित अन्य तीन-चार लूट को अंजाम दिया। इसके अलावा, दिल्ली, लखनऊ, गाजियाबाद में हत्याएं और लूट कीं। इसी बीच एनआईए के डीएसपी तंजील अहमद दंपती की हत्या के बाद मुनीर व उसका गैंग सुर्खियों में आया। इसके बाद से वह व उसके अधिकांश साथी जेल में हैं। कुछ जमानत पर तो एक फरार है।
विज्ञापन
अब तक ये रहीं रंगदारी से जुड़ीं घटनाएं
वैसे तो महानगर के हर इलाके में इनके नाम पर घटनाएं दर्ज हैं। मगर इनका मुख्य कार्यक्षेत्र सिविल लाइंस ही रहा है। जेल जाने के बाद सादाब जमानत पर छूटकर आया तो रंगदारी मांगे जाने, वीडियो कॉल पर लोगों को धमकी मिलने की घटनाएं सामने आईं। जांच में उजागर हुआ कि तिहाड़ जेल से रंगदारी मांगी जा रही हैं। यहां सादाब, जुबैर सहित अन्य गुर्गे मध्यस्थता कर रहे हैं। इस पर उस समय पुलिस पीछे लगी। कुछ लोग जेल भेजे गए तो यह धंधा कुछ समय शांत रहा। कुछ समय बाद इन गुर्गों के गैंग में दो बार रंगदारी बंटवारे को लेकर झगड़े हुए। एक विवाद में तो आपस में एक हत्या तक हुई। इसी विवाद में लाल डिग्गी के पास हुई फायरिंग में एएमयू के अब्दुल्ला कॉलेज की नर्सरी की छात्रा अचानक गोली लगने से मारी गई। धौर्रा में इन दोनों गुटों में फायरिंग हुई। उस समय पुलिस की ताबड़तोड़ कार्रवाई से ये गैंग ठंडा पड़ा था।
विज्ञापन
फिर से सिर उठाने का लग अंदेशा
इस गैंग के निशाने पर सिविल लाइंस के व्यापारी, एएमयू से जुड़े ठेकेदार, कोचिंग संचालक व कुछ प्रोफेसर भी रहे हैं। पूर्व में अंदरखाने व कभी कभी शिकायतें पुलिस तक आई हैं। अब कादरी ट्रेवल एजेंसी संचालक की शिकायत के बाद एक बार फिर इसी गैंग के सिर उठाने का अंदेशा प्रतीत हो रहा है। खास बात है कि सादाब जमानत के बाद बाहर था। उसकी मौजूदा स्थिति की जानकारी नहीं है। 50 हजार का इनामी सऊद छात्र आलमगीर व तंजील अहमद की हत्या के बाद आज तक पकड़ा नहीं गया। उसके कई बार विदेश भागने के अंदेशे पर रेड कॉर्नर नोटिस जारी हुए। पता नहीं, वह कहां है और किन गतिविधियों में है। फिलहाल पुलिस इस घटना में इस गैंग को ध्यान में रखकर भी काम कर रही है।
- ट्रेवल एजेंसी संचालक से रंगदारी की घटना में कौन लोग हैं, इसका पता लगाया जा रहा है। जिस नंबर से धमकी आई, उसकी ट्रू कॉलर आईडी जुबैर तिहाड़ जेल आई है। सर्विलांस से उसकी जानकारी की जा रही है। जो भी तथ्य सामने आएंगे, उस पर कार्रवाई होगी। मुनीर या उसके गैंग से जुड़े पुराने लोगों की जानकारी भी जुटाई जाएगी।
- श्वेताभ पांडेय, सीओ तृतीय