AMU: 59 साल से अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी लड़ रही अल्पसंख्यक दर्जे की लड़ाई, सुप्रीम कोर्ट का फैसला आज
59 साल बाद आज एएमयू के अल्पसंख्यक दर्जे पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने वाला है। इस फैसले को लेकर पूरी दुनिया को इंतजार है, जो कुछ ही देर में समाप्त हो जाएगा।
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1965 में एएमयू का अल्पसंख्यक स्वरूप खत्म कर दिया गया था। 1967 में यूनिवर्सिटी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया था। तब से यूनिवर्सिटी अल्पसंख्यक का दर्जा पाने के लिए लड़ाई रही है। आज 8 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट का फैसला आते ही 59 साल से चल रहा यह विवाद भी थम जाएगा।
एएमयू के अल्पसंख्यक दर्जे से जुड़े प्रकरण में अदालत के आने वाले फैसले को लेकर एएमयू से जुड़े अधिकारियों व इंतजामिया से विस्तृत बातचीत कर ली गई है। शांति व्यवस्था एवं कानून व्यवस्था की दृष्टि से पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम कर लिए गए हैं। पुलिस-प्रशासनिक अधिकारी पूरी तरह से मुस्तैद रहेंगे। इसके लिए एडीएम सिटी, सिटी मजिस्ट्रेट समेत संबंधित अधिकारियों की ड्यूटी भी लगाई गई है। - विशाख जी. जिलाधिकारी
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अदालत के प्रस्तावित फैसले को लेकर एहतियातन एएमयू कैंपस में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है। एएमयू सर्किल पर पीएसी समेत पर्याप्त पुलिस फोर्स की तैनाती कर दी गई है। शांति एवं कानून व्यवस्था से किसी को भी खिलवाड़ नहीं करने दिया जाएगा।- मृगांक शेखर पाठक, एसपी सिटीविज्ञापन विज्ञापन
एएमयू केंद्रीय विश्वविद्यालय है, केंद्र सरकार की धनराशि से संचालित है। इसके अल्पसंख्यक स्वरूप को लेकर भ्रम फैलाया जाता है। इसलिए यहां आरक्षण की व्यवस्था लागू होनी चाहिए। जब से सांसद चुना गया हूं तब से एएमयू में एससी, एसटी और ओबीसी के लिए आरक्षण की मांग की है। इस मामले को कई बार संसद में उठाया है। सुप्रीम कोर्ट ने हमेशा जनता की भावनाओं की कद्र की है, इसलिए सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया जाएगा।- सतीश गौतम, सांसद अलीगढ़
एएमयू के अल्पसंख्यक दर्जे के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला शुक्रवार को आएगा। उम्मीद करता हूं कि संविधान पीठ हक में फैसला देगी। पूरी दुनिया जानती है कि 1875 से आज तक एएमयू की तारीखी इमारतें इस बात की गवाई देती हैं, जिसे सर सैयद अहमद खान ने अपनी मेहनत और अपने हाथों से सजाया था।-इंजमाम उल हक, छात्रनेता, एएमयू
एएमयू के अल्पसंख्यक दर्जे के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आज आ रहा है। ऐतिहासिक फैसले का इंतजार है। प्रशासनिक अधिकारियों ने एएमयू के हालात को लेकर बातचीत की है। उन्हें आश्वस्त भी किया है कि यूनिवर्सिटी में अमन-चैन कायम रहेगा।-प्रो. मोहम्मद वसीम अली, प्रॉक्टर, एएमयू
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी अल्पसंख्यक संस्थान नहीं है। यही स्थापित कानून तथ्य है। इससे परे जाकर कोई निर्णय नहीं दिया जा सकता है। निश्चित रूप से शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट का यही फैसला आएगा कि यूनिवर्सिटी अल्पसंख्यक संस्थान नहीं है।-डॉ. मानवेंद्र प्रताप सिंह, एमएलसी भाजपा
2019 में सुप्रीम कोर्ट की सात सदस्यीय पीठ के पास गया मामला
संविधान पीठ इलाहाबाद उच्च न्यायालय के 2006 के फैसले से उत्पन्न एक मामले की सुनवाई कर रही थी, जिसमें कहा गया था कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) अल्पसंख्यक संस्थान नहीं है। सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच ने वर्ष 2019 में इस मामले को सात जजों की संविधान पीठ के पास भेज दिया था।
मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति संजीव खन्ना, न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला, न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता, न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की सात न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सुनवाई पूरी कर 1 फरवरी 2024 को फैसला सुरक्षित रख लिया था।
एएमयू सर्किल पर फोर्स तैनात, अफसरों ने टटोली नब्ज
एएमयू के अल्पसंख्यक दर्जे पर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट से आने वाले फैसले को लेकर 7 नवंबर को एएमयू सर्किल पर फोर्स तैनात कर दी गई। वहीं, अफसरों ने एएमयू इंतजामिया से हालात को लेकर नब्ज टटोली।
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ 10 नवंबर को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। सेवानिवृत्ति से पहले एएमयू अल्पसंख्यक स्वरूप बहाल समेत कई फैसले आने थे। इनमें कई फैसले आ चुके हैं। सिर्फ एएमयू अल्पसंख्यक दर्जे को लेकर इंतजार था, जो 8 नवंबर को खत्म हो रहा है। जैसे ही 8 नवंबर को फैसला आने का आदेश आया, वैसे ही सोशल मीडिया पर अल्पसंख्यक दर्जा बहाल रहेगा या नहीं, इसको लेकर चर्चाएं शुरू हो गईं। वहीं, 7 नवंबर को एएमयू सर्किल पर पीएसी के जवान तैनात कर दिए गए। जिला प्रशासन ने कुलपति, कुलसचिव से संवाद समन्वय बना रखा है।