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अलीगढ़ः संघर्ष करके हासिल किया मानवाधिकार
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प्रतीक चौधरी। एडवोकेट
- फोटो : CITY OFFICE
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इकराम वारिस
मानवाधिकार दिवस आज (10 दिसंबर) है। मानवाधिकारों का हनन जब होता है, तब पीड़ित परिवार तो आवाज उठाता है। साथ में सामाजिक कार्यकर्ता सामने आकर मानव के अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ते हैं। लड़ाई थाने से शुरू होकर मानवाधिकार आयोग तक पहुंचती है। कई दिनों और महीनों के बाद उसकी परिणति एक सफलता में परिवर्तित हो जाती है। लंबे संघर्ष के बाद मानव का अधिकार सुरक्षित रखने में सफलता मिलती है। अपने जिले में पुलिस उत्पीड़न से लेकर अन्य तरह के कई मामलों में मानवाधिकार आयोग ने फैसला सुनाया है। कई मामले ऐसे भी हैं, जिनमें पुलिस की फजीहत हुई है। ताजा एएमयू बवाल के दौरान पुलिस कार्रवाई पर मानवाधिकार आयोग की संस्तुति पर घायलों को मुआवजा देना तय हुआ है।
जिले के इन मामलों में आयोग ने की जुर्माना संस्तुति
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने बरला के गांव परौरा निवासी हरिसिंह पुत्र बाबू सिंह के मामले में दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई के साथ 25,000 रुपये वसूल कर पीड़ित पक्ष को देने के निर्देश दिए थे। विजयगढ़ के गांव शहबाजपुर निवासी नीलम पत्नी पंकज से जुड़े प्रकरण में भी पुलिसकर्मियों पर 10,000 रुपये जुर्माना लगाया। शहर के चर्चित राकेश उर्फ चेचे मुठभेड़ कांड में भी मानवाधिकार आयोग की संस्तुति पर पुलिसकर्मियों पर जुर्माना तय किया गया। गभाना के गांव पनिहावर निवासी श्यामू पुत्र रामरक्षपाल की पुलिस अभिरक्षा में मौत के मामले में आयोग ने दोषी पुलिसकर्मियों से एक लाख रुपये वसूल कर मृतक के परिजनों को दिलाने की संस्तुति की। खैर के नगला मुन्नीलाल निवासी योगेंद्र उर्फ कालू को मथुरा पुलिस ने 24 अक्तूबर 2011 को मुठभेड़ में ढेर किया था। मुठभेड़ फर्जी बताकर आयोग में शिकायत हुई।
जांच में दोषी ठहराए गए पुलिसकर्मियों से पांच लाख रुपये वसूल कर मृतक के परिजनों को देने के आदेश आयोग ने दिए। कालू पर दो सिपाहियों की हत्या कर राइफल लूटने का आरोप था। कालू के भाई संजय को क्वार्सी पुलिस ने 12 नवंबर-08 को बामौती के राजू के साथ ढेर किया था। जेल में 13 जून 2014 को बंदी बहादुर की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत पर आयोग ने एक लाख रुपये जुर्माना वसूलने के आदेश दिए। ये जुर्माना आरोपित पुलिसकर्मियों से मृतक आश्रितों को दिलाया गया। दादों क्षेत्र के गांव नगला लाले निवासी सतेंद्र सिंह पुत्र वीरेंद्र का नाम 2006 में गांव कलाई हरदुआगंज के गिरीश हत्याकांड में आया था। राजमिस्त्री का ठेका दिलाने के बहाने गिरीश को ले जाया गया, फिर हत्या कर दी। तीन मार्च- 2010 को मेरठ में सतेंद्र के मुठभेड़ में ढेर होने की खबर परिजनों को लगी। मुठभेड़ पर सवाल उठे तो आयोग ने ऑपरेशन में शामिल पुलिसकर्मियों से पांच लाख रुपये मृतक के परिजनों को दिलाने के साथ विभागीय कार्रवाई के आदेश दिए।
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शराब कांड पर दिए निर्देश, एएमयू प्रकरण में लगाया जुर्माना
ताजा मामलों पर गौर करें तो जिले के इसी साल के बहुचर्चित जहरीली शराब कांड के मामले में मानवाधिकार आयोग ने सौ से अधिक मौतों पर संज्ञान लिया। साथ में जिलों में शराब बिक्री को लेकर कुछ मानक तय करने के निर्देश दिए। वहीं एएमयू में हुए उपद्रव मामले में मानवाधिकार आयोग की जांच टीम कई दिन यहां जांच के लिए रुकी। पुलिस पर छात्रों को पीटने के आरोपों में टीम ने जांच के बाद जुर्माने की संस्तुति की। इस संस्तुति पर पिछले माह जिला प्रशासन ने जुर्माना देना तय किया है।
कई सामाजिक प्रकरणों कराई कार्रवाई
मानवाधिकारों को लेकर लड़ाई लड़ने वाले अधिवक्ता प्रतीक चौधरी बताते हैं कि उन्होंने कई प्रकरणों में लड़ाई लड़ी है, जिनमें भूजल बचाने का मुद्दा, जेल में रक्षाबंधन के दिन घेवर से बंदियों के बीमार होने का मुद्दा और शिकायत पर डॉक्टर का हटना, एसी बस में पानी न मिलने का विषय, दहेज हत्या में युवती के 12 दिन हिरासत में रहने का विषय प्रमुख है। वे कहते हैं कि कानून के हाथ लंबे होते हैं। हमें धैर्य के साथ लड़ाई लड़नी चाहिए। सच की जीत होती है।
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मानवाधिकार दिवस आज (10 दिसंबर) है। मानवाधिकारों का हनन जब होता है, तब पीड़ित परिवार तो आवाज उठाता है। साथ में सामाजिक कार्यकर्ता सामने आकर मानव के अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ते हैं। लड़ाई थाने से शुरू होकर मानवाधिकार आयोग तक पहुंचती है। कई दिनों और महीनों के बाद उसकी परिणति एक सफलता में परिवर्तित हो जाती है। लंबे संघर्ष के बाद मानव का अधिकार सुरक्षित रखने में सफलता मिलती है। अपने जिले में पुलिस उत्पीड़न से लेकर अन्य तरह के कई मामलों में मानवाधिकार आयोग ने फैसला सुनाया है। कई मामले ऐसे भी हैं, जिनमें पुलिस की फजीहत हुई है। ताजा एएमयू बवाल के दौरान पुलिस कार्रवाई पर मानवाधिकार आयोग की संस्तुति पर घायलों को मुआवजा देना तय हुआ है।
जिले के इन मामलों में आयोग ने की जुर्माना संस्तुति
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने बरला के गांव परौरा निवासी हरिसिंह पुत्र बाबू सिंह के मामले में दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई के साथ 25,000 रुपये वसूल कर पीड़ित पक्ष को देने के निर्देश दिए थे। विजयगढ़ के गांव शहबाजपुर निवासी नीलम पत्नी पंकज से जुड़े प्रकरण में भी पुलिसकर्मियों पर 10,000 रुपये जुर्माना लगाया। शहर के चर्चित राकेश उर्फ चेचे मुठभेड़ कांड में भी मानवाधिकार आयोग की संस्तुति पर पुलिसकर्मियों पर जुर्माना तय किया गया। गभाना के गांव पनिहावर निवासी श्यामू पुत्र रामरक्षपाल की पुलिस अभिरक्षा में मौत के मामले में आयोग ने दोषी पुलिसकर्मियों से एक लाख रुपये वसूल कर मृतक के परिजनों को दिलाने की संस्तुति की। खैर के नगला मुन्नीलाल निवासी योगेंद्र उर्फ कालू को मथुरा पुलिस ने 24 अक्तूबर 2011 को मुठभेड़ में ढेर किया था। मुठभेड़ फर्जी बताकर आयोग में शिकायत हुई।
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जांच में दोषी ठहराए गए पुलिसकर्मियों से पांच लाख रुपये वसूल कर मृतक के परिजनों को देने के आदेश आयोग ने दिए। कालू पर दो सिपाहियों की हत्या कर राइफल लूटने का आरोप था। कालू के भाई संजय को क्वार्सी पुलिस ने 12 नवंबर-08 को बामौती के राजू के साथ ढेर किया था। जेल में 13 जून 2014 को बंदी बहादुर की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत पर आयोग ने एक लाख रुपये जुर्माना वसूलने के आदेश दिए। ये जुर्माना आरोपित पुलिसकर्मियों से मृतक आश्रितों को दिलाया गया। दादों क्षेत्र के गांव नगला लाले निवासी सतेंद्र सिंह पुत्र वीरेंद्र का नाम 2006 में गांव कलाई हरदुआगंज के गिरीश हत्याकांड में आया था। राजमिस्त्री का ठेका दिलाने के बहाने गिरीश को ले जाया गया, फिर हत्या कर दी। तीन मार्च- 2010 को मेरठ में सतेंद्र के मुठभेड़ में ढेर होने की खबर परिजनों को लगी। मुठभेड़ पर सवाल उठे तो आयोग ने ऑपरेशन में शामिल पुलिसकर्मियों से पांच लाख रुपये मृतक के परिजनों को दिलाने के साथ विभागीय कार्रवाई के आदेश दिए।
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शराब कांड पर दिए निर्देश, एएमयू प्रकरण में लगाया जुर्माना
ताजा मामलों पर गौर करें तो जिले के इसी साल के बहुचर्चित जहरीली शराब कांड के मामले में मानवाधिकार आयोग ने सौ से अधिक मौतों पर संज्ञान लिया। साथ में जिलों में शराब बिक्री को लेकर कुछ मानक तय करने के निर्देश दिए। वहीं एएमयू में हुए उपद्रव मामले में मानवाधिकार आयोग की जांच टीम कई दिन यहां जांच के लिए रुकी। पुलिस पर छात्रों को पीटने के आरोपों में टीम ने जांच के बाद जुर्माने की संस्तुति की। इस संस्तुति पर पिछले माह जिला प्रशासन ने जुर्माना देना तय किया है।
कई सामाजिक प्रकरणों कराई कार्रवाई
मानवाधिकारों को लेकर लड़ाई लड़ने वाले अधिवक्ता प्रतीक चौधरी बताते हैं कि उन्होंने कई प्रकरणों में लड़ाई लड़ी है, जिनमें भूजल बचाने का मुद्दा, जेल में रक्षाबंधन के दिन घेवर से बंदियों के बीमार होने का मुद्दा और शिकायत पर डॉक्टर का हटना, एसी बस में पानी न मिलने का विषय, दहेज हत्या में युवती के 12 दिन हिरासत में रहने का विषय प्रमुख है। वे कहते हैं कि कानून के हाथ लंबे होते हैं। हमें धैर्य के साथ लड़ाई लड़नी चाहिए। सच की जीत होती है।