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Aligarh News: कंडे-लकड़ी से सुलगने लगे चूल्हे, बनने लगीं रोटियां

Fri, 13 Mar 2026 02:04 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 13 Mar 2026 02:04 AM IST
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Stoves started burning with sticks and wood, rotis started being made.
अकराबाद में कंडा व लकड़ी से चूल्हा सुलगाकर खाना पकातीं महिला। - फोटो : samvad
रसोई गैस का संकट गांवों में भी गहरा रहा है। महिलाएं गैस की किल्लत को चुनौती देते हुए पुराने ढर्रे पर लौट आई हैं। घर-आंगनों में चूल्हे सुलगने लगे हैं, चूल्हों की लिपाई करने के बाद रोटी बनाई जा रही है। हालांकि कुछ नवविवाहिताओं को चूल्हे पर परेशानी का भी सामना करना पड़ रहा है।
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रसोई गैस सिलेंडर की कमी को भांपते हुए ग्रामीण महिलाओं ने इस संकट से निकलने की पहल शुरू कर दी है, महिलाओं का कहना है कि पहले की अपेक्षा चूल्हे पर खाना बनाना कम हो गया है। घर के सभी लोग गैस पर खाना पकाने के साथ अन्य कार्य करने के आदि हो गए हैं लेकिन जब गैस की कमी है तो उन्होंने चूल्हों पर कार्य करना शुरू कर दिया। वहीं नवविवाहिताएं जो चूल्हे पर खाना पकाना नहीं जानती, उनके लिए यह समय काफी चुनौती भरा है। पर गैस की मारामारी को देखते हुए ऐसी महिलाओं ने भी अपने घरों में कंडे और लकड़ी से चूल्हा सुलगाकर खाना पकाना शुरू कर दिया है।
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कंडे और जलाऊ लकड़ी के यह हैं भाव
अकराबाद। गांवों में अभी बहुत से घरों में जहां पशु है अपने घर के बनाए कंडों का इस्तेमाल कर रहे हैं लेकिन कुछ लोग घरों और बाजार से लकड़ी और कंडे खरीद रहे हैं। कस्बा के हलवाई सुनील ने बताया कि बाजार में एक बोरी कंडे 150 रुपये में मिल रहे हैं, जिसमें करीब 50 किलो कंडे होते हैं। वहीं जलाऊ लकड़ी आठ रुपये प्रति किलो मिल रही है। वहीं कुछ लोग पेड़ों की सूखी लकड़ी को भी काट रहे हैं।
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इनका कहना है

गैस की कमी जैसी परेशानी हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकती। गैस की किल्लत होने पर वह देश और परिवार दोनों का फर्ज निभा कर लकड़ी कंडा के माध्यम से गुजारा कर रही हैं। - पिंकी देवी, रोहिना सिंहपुर।



पुत्रवधू चूल्हे पर खाना पकाना नहीं जानती तो क्या हुआ कुछ दिनों के लिए गैस नहीं मिलेगी तो वह स्वयं पुराने तरीके से घर में चूल्हा सुलगा कर लकड़ी ईंधन से खाना पकाकर अपने परिजनों का काम चलाएंगी। - सर्वेश देवी, अकराबाद ।




घर में 15 दिन से उनके घर में गैस नहीं है। पत्नी कहती है कि वह चूल्हे पर खाना नहीं बनाएगी। इधर बार-बार कॉल करके के बाद भी गैस की बुकिंग नहीं हो पा रही है, लगता है कि गैस की यह किल्लत कहीं उसके लिए मुसीबत नहीं बन जाए। - रामकुमार गांव दरियापुर।
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