चंपत राय बोले: अगले साल अंत तक श्रीराम मंदिर में होगी प्राण प्रतिष्ठा, राम नवमी के दिन भगवान के मस्तक को प्रकाशित करेंगी सूर्य की किरणें
अलीगढ़ के छर्रा के खुलावली गांव में विहिप के सेवा प्रकल्प का भूमि पूजन और शिला पूजन करने आए विश्व हिन्दू परिषद के अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं श्रीरामजन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपतराय ने हरदुआगंज के रसिक टावर के कम्युनिटी हॉल में स्थानीय लोगों को संबोधित किया।
उन्होंने कहा कि सेवा प्रकल्प स्थानीय लोगों के सहयोग से चलता है। सरकारी पैसे से चलने वाली संस्था सरकार बदलने पर समाप्त भी हो जाती हैं। राम मंदिर के विषय पर बोलते हुए कहा कि अयोध्या मंदिरों की नगरी हैं। एक आक्रमणकारी का राम जन्मभूमि मंदिर को तोड़ना हिंदुस्तान का अपमान था, देश का अपमान था।
उन्होंने आगे कहा कि इस कलंक को मिटाने के लिए स्थानीय जनता और साधु-संतों ने साढ़े चार सौ साल लड़ाई लड़ी है। देश में बाबर का पक्ष लेने वालों के बाप-दादा हिंदू थे। विहिप से पहले 1950 से लेकर 1983 तक अयोध्या के स्थानीय लोगों और साधु संतों ने मंदिर की रक्षा की और मंदिर पर कब्जा किया।
चंपत राय ने कहा कि सन् 1983 में जब यह विषय विहिप की जानकारी में आया तब सोए समाज को जगाना शुरू किया। पहली सफलता फरवरी 1986 में मिली तथा दूसरी सफलता 1992 में हासिल हुई। कल्याण सिंह के शासनकाल में 1992 में हुई घटना ने समूचे विश्व को सोचने पर मजबूर कर दिया कि अब हिंदू समाज को दबाकर नहीं रखा जा सकता।
अंतरिक्ष वैज्ञानिकों की टीम भी जुटी
मंदिर निर्माण पर उन्होंने कहा कि अगले वर्ष के अंत तक श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में भगवान श्रीराम की प्राण प्रतिष्ठा कर देंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विचार है कि रामनवमी के दिन ऐसी व्यवस्था बने की दोपहर के समय सूर्य की किरणें भगवान के मस्तक को प्रकाशित कर दें। इसके लिए अंतरिक्ष वैज्ञानिकों की टीम लगी हुई है।
उन्होंने आगे कहा कि डेढ़ वर्ष का समय मंदिर की आधारशिला में लगा है। तीन मंजिला मंदिर में लगभग 20 लाख घनफुट का संपूर्ण स्ट्रक्चर बनेगा। 360 फीट लंबा, 250 फीट चौड़ा और 161 फीट ऊंचा तीन मंजिला मंदिर बन रहा है जिसमें करीब 700 खंभे होंगे। चारों खंभों पर एक किमी का आयताकार परकोटा होगा जिसके चारों कोने पर मंदिर होंगे। संपूर्ण मंदिर पत्थर से बन रहा है जिसका कि एक हजार साल तक कुछ नहीं बिगड़ सकेगा।
10-12 करोड़ लोगों ेन कुछ-ना-कुछ दिया
उन्होंने कहा कि देशवासियों ने मंदिर निर्माण के लिए इतना दिया है कि 5 वर्ष तक दोबारा किसी को देने की जरूरत नहीं पड़ेगी। एक अनुमान के मुताबिक 10-11 करोड़ जनता ने कुछ न कुछ दिया है। इतना दिया है कि हमने सपने में भी नही सोचा था। 'तेरा तुझको अर्पण' के विचार पर मंदिर में दान दाताओं का कोई नाम नहीं होगा बस ठाकुर जी का नाम होगा
उन्होंने कहा कि यह मंदिर राष्ट्र के निर्माण का मंदिर है, जिसने संसार भर में फैले हिंदुओं को जागरूक कर दिया है। बड़े कामों में बाधाएं भी बड़ी आती हैं। हमारा स्थायी विचार है कि एक कदम आगे बढ़ाओ, जब कदम जम जाए तब पिछला कदम आगे बढ़ाओ यही समाज के प्रश्नों का उत्तर है। कार्यक्रम में राधेश्याम द्विवेदी, रामकुमार आर्य, राजेश मित्तल, धर्मेंद्र सिंह बंटू तथा बैंक बिहारी बंसल आदि मौजूद रहे।