अदालत का फैसला: माता-पिता और भतीजी की हत्या में बेटा दोषी करार, सजा पर सुनवाई 16 जुलाई को
विकासनगर में संपत्ति को लेकर बेटे सौरभ ने अपने सेवानिवृत्त एडीओ पंचायत पिता ओमप्रकाश, मां सोमवती व भतीजी की हथौड़ा व ईंट से प्रहार कर हत्या कर दी थी। इसके बाद आरोपी खुद ही थाने पहुंच गया था।
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अलीगढ़ में गांधीपार्क क्षेत्र के विकास नगर में माता-पिता व मासूम भतीजी की हत्या के आरोपी बेटे को दोषी करार दिया गया है। 11 जुलाई को एडीजे-आठ अभिषेक कुमार बागड़िया की अदालत ने यह फैसला सुनाते हुए सजा के बिंदु पर सुनवाई के लिए 16 जुलाई तारीख नियत की है। बता दें कि इस नृशंस हत्याकांड को संपत्ति बंटवारे से जुड़े विवाद में अंजाम दिया गया था और घटना को अंजाम देने के बाद आरोपी खुद ही थाने पहुंच गया था।
घटना 25 जुलाई 2022 की है। विकासनगर में संपत्ति को लेकर बेटे सौरभ ने अपने सेवानिवृत्त एडीओ पंचायत पिता ओमप्रकाश (62), मां सोमवती (60) व भतीजी की हथौड़ा व ईंट से प्रहार कर हत्या कर दी थी। इसके बाद आरोपी खुद ही थाने पहुंच गया था। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर हत्या में प्रयुक्त ईंट व हथौड़ा बरामद किया था। बड़े भाई रामेश्वर दयाल की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर सात दिन में चार्जशीट दायर की थी। इस घटना में उजागर हुआ था कि छोटा बेटा गलत संगत में पड़ गया था और वह अपने पिता पर जिम खुलवाने के लिए रुपये देने का दबाव बना रहा था। पिता उसकी बात को अनसुना कर रहे थे।
इसी गुस्से में उसने पहले घर में माता-पिता की हत्या की और फिर उनके पास खेल रही तीन वर्षीय भतीजी फाल्गुनी उर्फ शिवा की हत्या कर दी। हालांकि जब घटना के बाद वह घर के दूसरे हिस्से में रह रही भाभी की हत्या करने जा रहा था। मगर लोगों को देख वहां न जाकर सीधे थाने पहुंच गया। इसी बीच भाभी की नजर जब बेटी पर पड़ी तो वह सिसक रही थी। उसे मेडिकल कालेज लेकर गए। जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया।
डेढ़ वर्ष में दस की गवाही के बाद निर्णय तक मुकदमा
इस मामले में अभियोजन की ओर से पैरवी कर रहे एडीजीसी अमर सिंह तोमर ने बताया कि मुकदमे में सितंबर में आरोप तय हुए थे और जनवरी 2023 में पहली गवाही शुरू हुई। इसमें वादी के अलावा उसकी पत्नी, पंचनामा के गवाह, पुलिस के गवाह, डाक्टर सहित आरोपी के बयान दर्ज करने वाले मजिस्ट्रेट सहित कुल दस गवाही कराई गईं। इसके बाद अब यह निर्णय तक पहुंचा है। अब अदालत में अधिक से अधिक सजा के लिए प्रयास किया जाएगा।
मृत्युदंड मिलने पर ही मिलेगा सुकून
इस मामले में दोषी करार दिए गए सौरभ के भाई रामेश्वर का कहना है कि अदालत ने दोषी करार दिया है। मगर उसने हमारे परिवार को जो दंश दिया है। जब तक उसे मृत्युदंड नहीं मिलता, सुकून नहीं मिलेगा।
मुकदमा निर्णय की दहलीज पर पहुंच गया है। मामले में हमने दोषी को मृत्युदंड का अनुरोध किया है। अब सजा के बिंदु पर सुनवाई के दिन भी इस दिशा में अदालत के समक्ष दलील रख अधिकतम सजा दिलाने का प्रयास होगा। - नीरज चौहान, वादी के अधिवक्ता।