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Aligarh News: मिट्टी के सूक्ष्मजीव से मिला जानलेवा सुपरबग का इलाज

Tue, 09 Jun 2026 02:56 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 09 Jun 2026 02:56 AM IST
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Soil microorganism found cure for deadly superbug
एएमयू की शोध में खुलासा। 
इकराम वारिस, अलीगढ़
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एंटीबायोटिक दवाओं के असरहीन होने और सुपरबग के बढ़ते खतरे ने दुनिया भर के डॉक्टरों और वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ा दी है। ऐसे में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के शोधकर्ताओं ने मिट्टी में पाए जाने वाले एक सूक्ष्मजीव में नई उम्मीद तलाशी है। सुपरबग ऐसे बैक्टीरिया होते हैं, जिन पर सामान्य एंटीबायोटिक दवाओं का असर नहीं होता या बहुत कम होता है।

एएमयू के शोध में खेत की मिट्टी से स्ट्रेप्टोमाइसीज नामक बैक्टीरिया प्राप्त किया गया जिसने ने दवा-प्रतिरोधी रोगाणुओं के खिलाफ प्रभाव दिखाया है। स्ट्रेप्टोमाइसीज मिट्टी और पानी में पाया जाने वाला लाभकारी बैक्टीरिया है। चिकित्सा में इस्तेमाल स्ट्रेप्टोमाइसिन, नियोमाइसिन और एरिथ्रोमाइसिन जैसी एंटीबायोटिक दवाएं इसी समूह के सूक्ष्मजीवों से विकसित की गई हैं। यह मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने और फसलों को रोगों से बचाने में भी अहम भूमिका निभाता है।
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शोधकर्ताओं ने पाया कि यह सूक्ष्मजीव न केवल खतरनाक बैक्टीरिया की वृद्धि रोक सकता है, बल्कि उनकी सुरक्षा कवच मानी जाने वाली बायोफिल्म परत को भी 80 से 96 फीसदी तक नष्ट करने में सक्षम है।
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तीन राज्यों की मिट्टी से मिली उम्मीद
इन खतरनाक बैक्टीरिया का मुकाबला करने के लिए शोधकर्ताओं ने उत्तर प्रदेश, राजस्थान और जम्मू-कश्मीर की कृषि भूमि से 110 प्रकार के एक्टिनोमाइसीट्स एकत्र किए। एक्टिनोमाइसीट्स मिट्टी में पाए जाने वाले सूक्ष्मजीवों का एक बड़ा समूह है। ये बैक्टीरिया जैसे होते हैं, लेकिन इनकी बनावट कुछ हद तक फंगस (कवक) जैसी दिखाई देती है।

परीक्षण के दौरान पांच स्ट्रेप्टोमाइसीज आइसोलेट्स ऐसे मिले, जिन्होंने सभी प्रमुख दवा-प्रतिरोधी बैक्टीरिया के खिलाफ प्रभाव दिखाया। इसके अलावा, सूक्ष्मजीवों से प्राप्त प्राकृतिक अर्क को कुछ एंटीबायोटिक दवाओं के साथ मिलाकर जब इस्तेमाल किया तो पाया कि दवाओं की प्रभावशीलता और बढ़ गई। दावा है कि इससे भविष्य में कम मात्रा की दवा से बेहतर इलाज की संभावना बन सकती है।



अस्पतालों के अपशिष्ट में मिले खतरनाक बैक्टीरिया
प्रो. इकबाल अहमद के नेतृत्व में शोधार्थी मुजम्मिल शरीफ डार ने इस शोध के दौरान अस्पतालों के अपशिष्ट जल, सीवेज और क्लीनिकल स्रोतों से प्राप्त 56 बैक्टीरियल नमूनों का परीक्षण किया। इनमें ई.कोलाई, स्टैफिलोकोकस ऑरियस, सैल्मोनेला, स्यूडोमोनास एरुजिनोसा और क्लेब्सिएला जैसे रोग पैदा करने वाले बैक्टीरिया शामिल थे।अध्ययन में सामने आया कि इनमें से कई बैक्टीरिया सामान्य एंटीबायोटिक दवाओं के प्रति प्रतिरोधी हो चुके हैं और बायोफिल्म बनाकर खुद को दवाओं से बचाने की क्षमता रखते हैं। यही वजह है कि इनके संक्रमण का इलाज कठिन होता जा रहा है।


क्यों अहम है यह शोध?
. दुनियाभर में बढ़ रहे हैं दवा-प्रतिरोधी बैक्टीरिया।
. सामान्य एंटीबायोटिक दवाएं हो रही हैं कम असरदार।
. प्राकृतिक स्रोतों से नए एंटीबैक्टीरियल यौगिक खोजने की जरूरत।
. शोध भविष्य की नई एंटीबायोटिक दवाओं के विकास में मददगार हो सकता है।
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