AMU: छात्रों तक कहां से हो रही हथियार-कारतूस व नोटों की तस्करी, फर्जी दस्तावेजों से एएमयू में दाखिले की पुष्टि
एएमयू के सर जियाउद्दीन हॉल में ये सब मिलने और दो छात्रों के फरार होने के बाद इस सवाल का जवाब तलाशने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाया जा रहा है। हालांकि फरारों के पकड़े जाने पर काफी कुछ तस्वीर साफ होगी।
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अक्सर मारपीट-फायरिंग सहित अन्य आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त रहने वाले एएमयू छात्रों को हथियार-कारतूस के साथ-साथ नकली नोट किसी गिरोह या बड़े नेटवर्क से तो नहीं मिल रहे। ये सवाल पुलिस व एजेंसियों के जेहन में कौंध रहा है।
एएमयू के सर जियाउद्दीन हॉल में ये सब मिलने और दो छात्रों के फरार होने के बाद इस सवाल का जवाब तलाशने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाया जा रहा है। हालांकि फरारों के पकड़े जाने पर काफी कुछ तस्वीर साफ होगी। अभी तक मुदस्सिर व उनके एक बाहरी दोस्त से पूछताछ में कोई ठोस जानकारी नहीं आई है। मगर खुफिया एजेंसियां व पुलिस अपना काम कर रही हैं।
एएमयू छात्रों से जुड़े घटनाक्रम पर हमारी टीमें जांच कर रही हैं। आरोपियों को तलाशा जा रहा है। कुछ लोगों से पूछताछ भी की जा रही है। पकड़े जाने पर सब कुछ साफ होगा।- आदित्य बंसल, एसपी सिटी
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फायरिंग के सीसीटीवी से शहबाज तक पहुंची पुलिस
इस घटनाक्रम की शुरुआत छह मार्च की रात करीब 11 बजे से हुई। एफएम टॉवर के पास शादी समारोह के बाहर गाड़ी आगे पीछे करने को लेकर बुजुर्ग शाहिद अली से झगड़ा हुआ। पुलिस पहुंचने पर एएमयू छात्रों का गुट गायब हो गया। फिर तड़के साढ़े चार बजे शाहिद अली के घर के बाहर फायरिंग होती है। इस सूचना पर भी पुलिस पहुंची। मगर दोनों पक्षों में समझौता हो जाता है। बाद में फायरिंग का सीसीटीवी पुलिस के पास आता है। जिसमें मुंह पर गमछा बांधे नकाबपोश शाहिद अली के घर के बाहर पैदल आता व एक हवाई फायर करने के बाद वापस जाता कैद हुआ है। जिसकी पहचान बाद में शहबाज के रूप में हुई। जब पुलिस उसकी तलाश करते हुए बुधवार को एएमयू के एसजैड हॉल तक पहुंची तो इस पूरे फर्जीवाड़े, हथियार व नकली नोटों की तस्करी के नेटवर्क तक पहुंचती है। हालांकि कमरे में ताला लगा मिला था और पुलिस के आने की खबर लगने पर तीनों भाग गए थे।
चार पीजी छात्रों को बाहर कर कमरे में रह रहे थे तीनों
इस मामले में एएमयू व पुलिस की अब तक की जांच में उजागर हुआ है कि एफआईआर में आरोपी शहबाज सहित तीनों छात्रों के लिए यह कमरा आवंटित नहीं था। सर जियाउद्दीन हॉल का यह कमरा जैड-34 एएमयू के ही पीजी छात्र सालिम, माइज, यूसुफ व फवाद के लिए आवंटित था। तीनों आरोपी इन चारों को भगाकर खुद यहां अवैध रूप से रह रहे थे।
फर्जी दस्तावेजों से एएमयू में दाखिले की पुष्टि, पासपोर्ट व अन्य दस्तावेजों की जांच
पुलिस को कमरे से शहबाज के नाम के दो-दो दसवीं के अंकपत्र अलग-अलग जन्मतिथि के मिले हैं। एएमयू के दो-दो एनरॉलमेंट नंबर मिले हैं। जिससे ये तो पुष्टि हो रही है कि उसने एएमयू में दाखिले के लिए दस्तावेजों में फर्जीवाड़ा किया है। हालांकि अभी एएमयू दस्तावेजों के मामले में जांच की बात कह रही है। वहीं पुलिस स्तर से शहबाज व आकिल के नाम के पासपोर्ट सहित अन्य सभी प्रपत्रों की जांच कराई जा रही है। वे सही हैं या नहीं। कहीं किन्हीं गलत गतिविधियों के लिए तो इन्हें नहीं बनवाया गया। वहीं मुदस्सिर के लैपटॉप की साइबर टीम से जांच कराकर जानकारियां जुटाई जा रही हैं। उसमें डेटा भी देखा जा रहा है। साथ में हथियार, मैग्जीन व नकली नोट तस्करी को लेकर भी जानकारी के प्रयास हो रहे हैं।
आठों मोबाइलों की सर्विलांस से जांच शुरू, खंगाला जा रहा डेटा
पुलिस द्वारा इस कमरे से मिले आठों मोबाइलों की सर्विलांस जांच कराई जा रही है। डेटा खंगाला जा रहा है कि आखिर ये किन लोगों से संपर्क में रहते थे। आखिर आठ आठ मोबाइल रखने के पीछे क्या मकसद रहा होगा। इन्हीं मोबाइलों के जरिये तस्करी नेटवर्क तक पहुंचने के प्रयास किए जा रहे हैं।
पुराने छात्र नेताओं की सरपरस्ती में यहां तक पहुंचा शहबाज
इस मामले में शहबाज को लेकर पकड़े गए मुदस्सिर व उसके दोस्त से पूछताछ में उजागर हुआ है कि शहबाज कुछ पुराने छात्र नेताओं की सरपरस्ती में एएमयू में सक्रिय रहा है। उसी में सक्रिय रहकर आपराधिक गतिविधियों में जुड़ गया। कुछ वर्ष पहले उस पर गोली भी चली थी। इसके बाद उस पर अब तक चार अपराध दर्ज हुए हैं। किसी बड़े या संगीन अपराध में पहली बार उसका नाम आया है। इन जानकारियों के आने के बाद पुलिस उसके पुराने संपर्क से व वरिष्ठ छात्रों से भी जानकारी करने के प्रयास में है।