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एसजेडी प्रकरण : डीएम ने बैठाई जांच, मरीजों की रिपोर्ट ही गायब
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एसजेडी हॉस्पीटल में निरीक्षण करने पहुचें एसडीएम कोल रंजीत सिंह, डिप्टी सीएमओ डॉ. दुर्गेश।
- फोटो : CITY OFFICE
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धनीपुर मंडी स्थित एसजेडी कोविड हॉस्पिटल में कोरोना संक्रमित पांच मरीजों की मौत ऑक्सीजन की कमी के कारण होने के बाद जिला प्रशासन भी हरकत में आ गया है। डीएम ने बृहस्पतिवार को एसडीएम कोल रंजीत सिंह व डिप्टी सीएमओ डा. अनुपम भास्कर को जांच का जिम्मा सौंपकर तीन दिन में रिपोर्ट मांगी।
शाम पांच बजे दोनों अधिकारी जांच के लिए हॉस्पिटल पहुंचे तो वहां प्रबंधन मृतकों के संबंध में अधिकारियों को रिपोर्ट तक नहीं दे सका। तमाम बहाने बनाकर अधिकारियों को बरगलाने की कोशिश की। इस पर एसडीएम ने एसजेडी को नोटिस जारी कर 24 घंटे के भीतर मृतकों के इलाज के संबंध में सभी रिपोर्ट देने का आदेश दिया। अगर, रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की जाती हैं तो प्रबंधन को इलाज में लापरवाही बरतने और बाद में रिपोर्ट तक गायब करने का दोषी माना जाएगा।
एसडीएम कोल रंजीत सिंह ने हॉस्पिटल में पहुंचकर सबसे पहले कोविड मरीजों का डाटा तलब किया। प्रबंधन इस डाटा को उपलब्ध नहीं करा सका। इतना ही नहीं, जिन कोरोना मरीजों की मौत हुई है, उनको क्या उपचार दिया जा रहा था, किन-किन जांच के आधार पर उनको संक्रमित और गंभीर श्रेणी का मरीज माना गया, इसकी भी रिपोर्ट नहीं दे सका।
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इधर, अस्पताल को सप्लाई होने वाली ऑक्सीजन का रिकार्ड देखा गया तो पाया कि यहां लगातार ऑक्सीजन की सप्लाई हो रही थी। 18 अप्रैल तक प्रबंधन ने ऑक्सीजन आपूर्ति का डाटा रखा। एसडीएम ने 15 अप्रैल तक डाटा मांगा है। शुरुआती जांच में अधिकारियों को संदेह वाली स्थिति मिली है।
वहीं, मेडिकल ऑक्सीजन की लगातार आपूर्ति के बाद भी कैसे संक्रमितों के लिए कमी हो गई। इसको लेकर भी प्रशासनिक अधिकारियों का माथा ठनका हुआ है। इसको लेकर संदेह यह भी जताया जा रहा है कि अस्पताल द्वारा अपने कोटे की गैस की कालाबाजारी की जा रही थी।
हालांकि, अभी जांच पूरी होने तक इस तथ्य पर आखिरी मुहर नहीं लगाई गई है। एसडीएम कोल ने बताया कि जांच के दौरान अस्पताल के इंतजाम, मरीजों की मौत किन कारणों से हुई इसकी तह तक जानकारी जुटाई जा रही है। जांच रिपोर्ट तीन दिन के भीतर जिलाधिकारी को सौंपी जाएगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर ही कार्रवाई होगी।
एसजेडी हॉस्पिटल के कोविड इंचार्ज डा. संजीव शर्मा ने बताया है कि मृतक पांच मरीज 15 अप्रैल से वेंटिलेटर पर थे और ये कोविड-19 से संक्रमित होने साथ अन्य बीमारियों से भी ग्रस्त थे। इनके फेफड़े 5 प्रतिशत ही कार्य कर रहे थे।
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शाम पांच बजे दोनों अधिकारी जांच के लिए हॉस्पिटल पहुंचे तो वहां प्रबंधन मृतकों के संबंध में अधिकारियों को रिपोर्ट तक नहीं दे सका। तमाम बहाने बनाकर अधिकारियों को बरगलाने की कोशिश की। इस पर एसडीएम ने एसजेडी को नोटिस जारी कर 24 घंटे के भीतर मृतकों के इलाज के संबंध में सभी रिपोर्ट देने का आदेश दिया। अगर, रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की जाती हैं तो प्रबंधन को इलाज में लापरवाही बरतने और बाद में रिपोर्ट तक गायब करने का दोषी माना जाएगा।
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एसडीएम कोल रंजीत सिंह ने हॉस्पिटल में पहुंचकर सबसे पहले कोविड मरीजों का डाटा तलब किया। प्रबंधन इस डाटा को उपलब्ध नहीं करा सका। इतना ही नहीं, जिन कोरोना मरीजों की मौत हुई है, उनको क्या उपचार दिया जा रहा था, किन-किन जांच के आधार पर उनको संक्रमित और गंभीर श्रेणी का मरीज माना गया, इसकी भी रिपोर्ट नहीं दे सका।
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इधर, अस्पताल को सप्लाई होने वाली ऑक्सीजन का रिकार्ड देखा गया तो पाया कि यहां लगातार ऑक्सीजन की सप्लाई हो रही थी। 18 अप्रैल तक प्रबंधन ने ऑक्सीजन आपूर्ति का डाटा रखा। एसडीएम ने 15 अप्रैल तक डाटा मांगा है। शुरुआती जांच में अधिकारियों को संदेह वाली स्थिति मिली है।
वहीं, मेडिकल ऑक्सीजन की लगातार आपूर्ति के बाद भी कैसे संक्रमितों के लिए कमी हो गई। इसको लेकर भी प्रशासनिक अधिकारियों का माथा ठनका हुआ है। इसको लेकर संदेह यह भी जताया जा रहा है कि अस्पताल द्वारा अपने कोटे की गैस की कालाबाजारी की जा रही थी।
हालांकि, अभी जांच पूरी होने तक इस तथ्य पर आखिरी मुहर नहीं लगाई गई है। एसडीएम कोल ने बताया कि जांच के दौरान अस्पताल के इंतजाम, मरीजों की मौत किन कारणों से हुई इसकी तह तक जानकारी जुटाई जा रही है। जांच रिपोर्ट तीन दिन के भीतर जिलाधिकारी को सौंपी जाएगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर ही कार्रवाई होगी।
एसजेडी हॉस्पिटल के कोविड इंचार्ज डा. संजीव शर्मा ने बताया है कि मृतक पांच मरीज 15 अप्रैल से वेंटिलेटर पर थे और ये कोविड-19 से संक्रमित होने साथ अन्य बीमारियों से भी ग्रस्त थे। इनके फेफड़े 5 प्रतिशत ही कार्य कर रहे थे।