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Aligarh News: भाव में सीता, हर मुद्रा में मर्यादा
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दिल्ली में आयोजित रामलीला मंचन में माता सीता के स्वरूप में अंशिका।
- फोटो : samvad
आंखों में करुणा, चेहरे पर धैर्य, हाव-भाव में आत्मसम्मान और कदमों में शालीनता। मंच पर मां सीता के स्वरूप में अंशिका अग्रवाल जब उतरती हैं, तो रामायण के प्रसंग जीवंत होने लगते हैं।
कभी उनकी आंखें विरह की पीड़ा बयां करती हैं, तो कभी चेहरे पर दृढ़ता की झलक दिखाई देती है। उनकी हर मुद्रा में धरती पुत्री की मर्यादा झलकती है और हर भाव में स्वाभिमान।
अलीगढ़ की अंशिका अग्रवाल लगातार छठे वर्ष दिल्ली में आर्ट एंड आर्टिस्ट्स परफॉर्मिंग आर्ट्स की ओर से 14 से 19 अक्तूबर तक आयोजित संपूर्ण रामायण मंचन में मां सीता की भूमिका निभा रही हैं। श्रीराम के जीवन से जुड़े प्रसंगों के बीच अंशिका का मौन अभिनय मां सीता के व्यक्तित्व के अलग-अलग रंग सामने लाता है।
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भाव-भंगिमाओं में दिखता है स्वाभिमान :
मां सीता का चरित केवल त्याग और समर्पण की कहानी नहीं है। इसमें आत्मबल है और विपरीत परिस्थितियों में अडिग रहने का साहस है। अपने सम्मान और मर्यादा के प्रति दृढ़ता है। अंशिका अपने अभिनय में इन भावों को बारीकी से पिरोती हैं।
चेहरे के सूक्ष्म बदलाव, आंखों की भाषा और हाथों की मुद्राएं संवादों से पहले ही बहुत कुछ कह जाती हैं। कहीं मौन अपनी बात कहता है, तो कहीं चेहरे की दृढ़ता चरित की शक्ति बयां करती है।
कथक की मुद्राओं से जीवंत होते हैं प्रसंग :
मुंबई में सक्रिय अंशिका अभिनय के साथ कथक में भी प्रशिक्षित हैं। शास्त्रीय नृत्य की साधना उनके अभिनय को खास गहराई देती है। शरीर का संतुलन, हाथों की सधी हुई मुद्राएं और भावों की सहज अभिव्यक्ति मंच पर दृश्यों को प्रभावशाली बनाती हैं।
अंशिका ने बताया कि यह भूमिका केवल अभिनय से नहीं, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने का माध्यम है। छह वर्षों से निभाए जा रहे इस किरदार में वह हर बार धरती पुत्री के धैर्य, गरिमा और आत्मसम्मान को नए भावों के साथ दर्शकों तक पहुंचाने का प्रयास कर रही हैं।
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कभी उनकी आंखें विरह की पीड़ा बयां करती हैं, तो कभी चेहरे पर दृढ़ता की झलक दिखाई देती है। उनकी हर मुद्रा में धरती पुत्री की मर्यादा झलकती है और हर भाव में स्वाभिमान।
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अलीगढ़ की अंशिका अग्रवाल लगातार छठे वर्ष दिल्ली में आर्ट एंड आर्टिस्ट्स परफॉर्मिंग आर्ट्स की ओर से 14 से 19 अक्तूबर तक आयोजित संपूर्ण रामायण मंचन में मां सीता की भूमिका निभा रही हैं। श्रीराम के जीवन से जुड़े प्रसंगों के बीच अंशिका का मौन अभिनय मां सीता के व्यक्तित्व के अलग-अलग रंग सामने लाता है।
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भाव-भंगिमाओं में दिखता है स्वाभिमान :
मां सीता का चरित केवल त्याग और समर्पण की कहानी नहीं है। इसमें आत्मबल है और विपरीत परिस्थितियों में अडिग रहने का साहस है। अपने सम्मान और मर्यादा के प्रति दृढ़ता है। अंशिका अपने अभिनय में इन भावों को बारीकी से पिरोती हैं।
चेहरे के सूक्ष्म बदलाव, आंखों की भाषा और हाथों की मुद्राएं संवादों से पहले ही बहुत कुछ कह जाती हैं। कहीं मौन अपनी बात कहता है, तो कहीं चेहरे की दृढ़ता चरित की शक्ति बयां करती है।
कथक की मुद्राओं से जीवंत होते हैं प्रसंग :
मुंबई में सक्रिय अंशिका अभिनय के साथ कथक में भी प्रशिक्षित हैं। शास्त्रीय नृत्य की साधना उनके अभिनय को खास गहराई देती है। शरीर का संतुलन, हाथों की सधी हुई मुद्राएं और भावों की सहज अभिव्यक्ति मंच पर दृश्यों को प्रभावशाली बनाती हैं।
अंशिका ने बताया कि यह भूमिका केवल अभिनय से नहीं, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने का माध्यम है। छह वर्षों से निभाए जा रहे इस किरदार में वह हर बार धरती पुत्री के धैर्य, गरिमा और आत्मसम्मान को नए भावों के साथ दर्शकों तक पहुंचाने का प्रयास कर रही हैं।