Aligarh: जेल में भाइयों को देख उदास हुए बहनों के नैना, कड़ी सुरक्षा के बीच बांधी राखी
सुबह से ही बहनें थाल सजाकर जेल में बंद भाइयों को राखी बांधने पहुंचीं। इस दौरान उन्हें जेल परिसर के कड़े सुरक्षा मानकों के बीच से गुजरना पड़ा। भाई और बहन की भावनाओं का ध्यान रखते हुए जेल प्रशासन ने उनकी मिलाई कराई।
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सुबह से ही बहनें थाल सजाकर जेल में बंद भाइयों को राखी बांधने पहुंचीं। इस दौरान उन्हें जेल परिसर के कड़े सुरक्षा मानकों के बीच से गुजरना पड़ा। भाई और बहन की भावनाओं का ध्यान रखते हुए जेल प्रशासन ने उनकी मिलाई कराई। बहनों ने भाई की कलाई पर राखी बांधी तो दोनों की ही आंखों से आंसू बहने लगे। बहनों ने माथे पर तिलक लगाकर अपने भाइयों से दोबारा अपराध नहीं करने और अच्छा इंसान बनने का वचन लिया ।
कई मुस्लिम महिलाओं ने भी कारागार में पहुंचकर वहां निरुद्ध अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधकर सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल कायम रखी। वहीं महिला जेल में बंद बहनों से राखी बांधने के लिए भाई भी पहुंचे। भाइयों को देखकर ऊंची दीवाराें के अंदर कैद बहनों की आंखें भर आईं। जिस पर उनके भाई भी अपने आंसू नहीं रोक सके। राखी बंधवाने के साथ उन्होंने बहनों को हौसला दिया। कुछ महिलाएं बच्चों को साथ लेकर पहुंची थीं। पूरी जांच-पड़ताल के बाद ही सभी को जेल के अंदर प्रवेश दिया गया। एक बार में 200-300 महिलाओं के जत्थे की जेल के अंदर बने पार्क में उनके भाइयों से मुलाकात कराई गई, जहां बैठकर भाई-बहनों ने रखी की खुशियां साझा कीं।
लंबे समय बाद भाई को देखकर छलकी आंखें
1- पालीमुकीमपुर क्षेत्र के कस्बा बिजौली निवासी सरिता जेल में चोरी के मामले में चार साल से बंद भाई को राखी बांधने पहुंची थी। भाई को लंबे समय बाद देखा तो अपनी भावनाओं को नहीं रोक सकी और भाई के गले लगकर काफी देर तक रोती रही। किसी तरह भाई ने उसे संभाला और विदाई दी।
2- शहर के सुरेंद्र नगर निवासी राखी देवी के भाई और अन्य परिजन रंजिशन हुई हत्या के मामले में जेल में बंद हैं। राखी अपने भाई को राखी बांधने पहुंची तो भाई को देख आंखों से जलधारा बह निकली। राखी को दूसरी बहनों ने बमुश्किल संभाला और शांत कराया।
अंदर ही मिला खाने-पीने का सामान
वरिष्ठ जेल अधीक्षक बृजेंद्र कुमार यादव ने बताया कि कारागार में 2125 बहनों ने अपने-अपने भाइयों के राखी बांधी। 28 पुरुष भी बहनों से राखी बंधवाने पहुंचे थे। इस दौरान 782 बच्चे भी जेल में बंद परिवार वालों से मिलने पहुंचे। उन्होंने बताया कि जेल में बंद बंदियों की सुरक्षा को देखते हुए प्रशासन ने जेल परिसर में ही मिठाई और खाने-पीने समेत अन्य सामान की व्यवस्था कराई थी। जेल के मुख्य गेट से लेकर अंदर बैरक तक जाने के लिए बैरिकेडिंग कराई गई थी। उन्होंने बताया कि एहतियात के तौर पर बाहर से घेवर मिठाई आदि को जेल के अंदर नहीं लाने दिया गया था। जेल प्रशासन ने ही मिठाई उपलब्ध कराई।