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सर सैयद की पत्रकारिता सुधारात्मक भावना से चिह्नित : प्रो. शाफे

Fri, 14 Oct 2022 01:57 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 14 Oct 2022 01:57 AM IST
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Sir Syed's journalism marked by reformative spirit: Prof. shafe
एएमयू के जनसंचार विभाग के पूर्व अध्यक्ष और साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेता प्रो. शाफे किदवई ने कहा कि अलीगढ़ इंस्टीट्यूट गजट और तहजीब उल अखलाक को शुरू करने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि सर सैयद की पत्रकारिता यात्रा 1837 में 20 साल की उम्र में सुधारात्मक भावना से चिह्नित है।
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बुधवार को वह ‘सर सैयद और उनकी पत्रकारिता’ पर विशेष पर आयोजित व्याख्यान में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि सर सैयद ने साप्ताहिक सैयद उल अखबार के लिए लेखों का योगदान करना शुरू कर दिया था, जो उनके भाई सैयद मोहम्मद द्वारा शुरू किया गया। उन्होंने ईशनिंदा, गोसंहार पर रोक और मुसलमानों के सर्वांगीण विकास के लिए वक्फ विधेयक के समर्थन आदि पर सर सैयद की टिप्पणियों और विचारों को रेखान्कित किया।
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सर सैयद एकेडमी के पूर्व निदेशक प्रो. शान मोहम्मद, फारसी अनुसंधान संस्थान की मानद सलाहकार प्रो. आजरमी दुख्त सफवी, इतिहास विभाग की अध्यक्ष प्रोफेसर गुलफिशां खान ने विचार व्यक्त किए। फारसी अनुसंधान संस्थान के निदेशक प्रो. एम उस्मान गनी ने स्वागत भाषण दिया। फारसी विभाग की अध्यक्ष प्रो. राणा खुर्शीद ने धन्यवाद ज्ञापित किया। संचालन डॉ. मोहम्मद एहतशाम उद्दीन ने किया।
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