AMU: कुरान की आयतों की तिलावत से यूनिवर्सिटी तराना तक धूमधाम से मना सर सैयद डे, विद्यार्थियों ने खूब ली सेल्फी
एएमयू के गुलिस्तान-ए-सैयद सर सैयद डे कार्यक्रम का आयोजन किया गया। सुबह 10:45 बजे सर सैयद डे का आगाज कुरान की आयतों की तिलावत से हुआ। यूनिवर्सिटी तराना से कार्यक्रम संपन्न हो गया।
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अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) के संस्थापक सर सैयद की 208वीं जयंती को सर सैयद डे के रूप में मनाया गया। इसमें बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति अब्दुल शाहिद ने कहा कि अज्ञानता और अशिक्षा गरीबी की जननी है, शिक्षा ही इसका समाधान है। उन्होंने कहा कि सर सैयद ने जो इल्म की रोशनी दिखाई वह हमेशा राह दिखाती रहेगी, हमारा मार्गदर्शन करेगी, हमारे विचारों को प्रेरित करेगी। छात्र-छात्राओं ने जमकर सेल्फी लेकर पल को यादगार बनाया।
शुक्रवार को शाही बग्घी से गुलिस्तान-ए-सैयद तक पहुंचे न्यायमूर्ति अब्दुल शाहिद ने कहा कि एएमयू का जिक्र यह भी याद दिलाएगा कि एक जागरूक व्यक्ति कैसे लाखों लोगों की किस्मत बदल सकता है।उन्होंने कहा कि वह 41 साल पहले यहां पढ़ने आए थे, आज वह जो कुछ भी हैं, उसमें उनके पिता के अलावा यूनिवर्सिटी, और शिक्षकों की अहम भूमिका है।
उन्होंने सर सैयद का संदेश दोहराते हुए कहा कि किसी राष्ट्र की प्रगति के लिए समाज के विभिन्न वर्गों में भाईचारा और एकता जरूरी है। उन्होंने विद्यार्थियों को अपने लक्ष्यों के प्रति प्रतिबद्ध रहने व निरंतर सीखने, बुरी आदतों को छोड़ने और ईमानदारी, समर्पण और धैर्य के मूल्यों को अपनाने के लिए किया।
न्यायमूर्ति ने सर सैयद और उनके पुत्र न्यायाधीश सैयद महमूद के योगदान को न्यायिक व राष्ट्र निर्माण के क्षेत्र में रेखांकित किया, साथ ही छात्रा जैनब फायजा इस्लाम, अबू मआज, प्रो. फायजा तबस्सुम आजमी, प्रो. मोहम्मद कमरुल हुदा फरीदी ने सर सैयद के शिक्षा, सामाजिक सुधार और बौद्धिक जागृति में योगदान पर विचार व्यक्त किए। कुलसचिव प्रो. आसिम जफर ने स्वागत भाषण प्रस्तुत किया। संचालन डॉ. फायजा अब्बासी और डॉ. शारिक अकील ने किया।
कार्यक्रम का समापन यूनिवर्सिटी के तराने और राष्ट्रगान के साथ हुआ। इससे पहले सर सैयद डे का आगाज यूनिवर्सिटी मस्जिद में कुरान ख्वानी से हुई। इसके बाद उनकी मजार पर चादरपोशी की गई। कुलपति प्रो. नईमा खातून ने अतिथियों के साथ सर सैयद अकादमी और मौलाना आजाद पुस्तकालय में आयोजित प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। सर सैयद की रचनाएं और उन पर आधारित पुस्तकें प्रदर्शित की गईं। अलीगढ़ इंस्टीट्यूट गजट के डिजिटल आर्काइव्स का शुभारंभ किया।
सर सैयद का इदारा महान : डॉ. सोमनाथ
मानद अतिथि इसरो के पूर्व अध्यक्ष और चाणक्य विश्वविद्यालय, बेंगलुरू के चांसलर डॉ. एस. सोमनाथ ने सर सैयद के इदारे को महान बताया और उनके दृष्टिकोण की सराहना की, जिसमें विश्वास के साथ तर्क और आधुनिक विज्ञान है। उन्होंने कहा कि ज्ञान की खोज, चाहे विज्ञान के माध्यम से हो या आध्यात्मिक चिंतन के माध्यम से, जिज्ञासा, सहयोग और नैतिक उद्देश्य की प्राप्ति की यात्रा है।
जड़ों से जुड़ाव रखें : ऐश्वर्या
विशेष अतिथि पेंगुइन रैंडम हाउस की वरिष्ठ उपाध्यक्ष और प्रकाशक मिली ऐश्वर्या ने सर सैयद के ज्ञान, समावेशिता और शिक्षा के माध्यम से सशक्तीकरण के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे अपनी जड़ों से जुड़े रहें और उच्च लक्ष्य निर्धारित करें। उन्होंने धैर्य, परिश्रम और निरंतर प्रयास को महानता की कुंजी बताया। यूनिवर्सिटी की प्रशंसा भी की और सर सैयद के नजरिये को सराहा भी।
विचारों के आर्किटेक्ट थे सर सैयद : कुलपति
कुलपति प्रो. नइमा खातून ने सर सैयद को विचारों का आर्किटेक्ट, समाज सुधारक और जनता के लिए दीपक स्वरुप शिक्षक बताया। उन्होंने एएमयू की हालिया उपलब्धियों, जैसे एनआईआरएफ में शीर्ष-10 रैंक, भारत की जियोस्पेशियल मिशन में योगदान के लिए बेस्ट यूनिवर्सिटी अवार्ड, 6.5 मेगावाट सौर ऊर्जा विस्तार और पांच करोड़ डीएसटी-टीबीआई अनुदान के साथ एएमयू इनोवेशन फाउंडेशन का शुभारंभ का उल्लेख किया। कुलपति ने विद्यार्थियों से ज्ञान का जिम्मेदारीपूर्वक उपयोग कर समाज हित में तकनीक, कोड और प्रगति के निर्माण का आह्वान किया।
अंतरराष्ट्रीय व राष्ट्रीय सर सैयद उत्कृष्टता पुरस्कार मिला
बैलिओल कॉलेज, ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के प्रो. फैसल देवजी को अंतरराष्ट्रीय सर सैयद उत्कृष्टता पुरस्कार मिला। उन्हें पुरस्कार स्वरूप दो लाख रुपये मिले। यह पुरस्कार उनकी जगह पर प्रो. शाफे किदवई ने ग्रहण किया। शाहीन समूह संस्थान के अध्यक्ष डॉ. अब्दुल कादिर को राष्ट्रीय सर सैयद उत्कृष्टता पुरस्कार प्रदान किया गया। प्रो. फैसल देवजी ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि उनका प्रारंभिक शोध कार्य अलीगढ़ आंदोलन पर आधारित था और यह आंदोलन, जिसने अखिल भारतीय मुस्लिम समुदाय की भावना को जन्म दिया, आज भी आधुनिक भारतीय इतिहास की उनकी समझ को दिशा प्रदान करता है। डॉ. अब्दुल कादिर ने नई पीढ़ी को संवारने और इस शैक्षिक आंदोलन को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विस्तार देने की आवश्यकता पर बल दिया।
इन्हें मिले पुरस्कार
सर सैयद अहमद खान और अलीगढ़ आंदोलनः भारत में धर्मनिरपेक्ष शिक्षा के प्रति एक तार्किक दृष्टिकोण विषय पर आयोजित अखिल भारतीय निबंध लेखन प्रतियोगिता के विजेताओं को कुलपति और पीवीस प्रो. मोहम्मद मोहसिन खान ने नकद पुरस्कार और प्रमाणपत्र प्रदान किए। अंग्रेजी वर्ग में तूबा शम्सी जामिया मिल्लिया इस्लामिया, नई दिल्ली पहले, स्तुति नारायण नलसार यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ, हैदराबाद दूसरे और यानिस इकबाल एएमयू तीसरे स्थान पर रहे। उर्दू वर्ग में ताहिर हुसैन पहले, आफरीन रजा दूसरे, अबू दाऊद तीसरे स्थान पर रहे। हिंदी मोहम्मद सुहैब पहले, आजरम फातिमा सिद्दीकी दूसरे, सलमा अशफा तीसरे स्थान पर रहीं। उर्दू और हिंदी वर्ग के सभी विजेता एएमयू से हैं।
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