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समाज के लिए घातक है एकल परिवारों का चयन: संजीव राजा
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अखिल भारतवर्षीय श्री वैश्य बारहसैनी महासभा के शताब्दी कार्यक्रम में कार्यक्रम के अति विशिष्ठ अ?
- फोटो : CITY OFFICE
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अखिल भारतवर्षीय श्री वैश्य बारहसैनी महासभा द्वारा आयोजित शताब्दी वर्ष समारोह आगरा रोड स्थित कैलाश फार्म में शनिवार को धूमधाम से मनाया गया। सुबह हवन यज्ञ से शुरू हुआ समारोह देर शाम कवि सम्मेलन के साथ समाप्त हुआ। दूसरे सत्र में राष्ट्रहित में उत्कृष्ट योगदान देने वाले स्वजातीय बंधुओं को सम्मानित किया गया। सम्मान समारोह में विशिष्ठ अतिथि के रूप में पहुंचे शहर विधायक संजीव राजा ने कहा कि एकल परिवारों का चयन समाज के लिए घातक है। उन्होंने बुजुर्गों से अनुरोध किया कि अपने बच्चों को वैश्य समाज के गौरवशाली इतिहास के बारे में बताएं। क्योंकि आज की पीढ़ी को समाज की उपलब्धियों का ज्ञान होना बहुत जरूरी है।
शताब्दी समारोह तीन सत्रों में आयोजित किया गया। पहले सत्र में हवन यज्ञ का आयोजन अक्रूरजी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर शुभारंभ किया गया। समाज के लोगों हवन में आहुतियां देकर समाज तथा देश में सुख समृद्धि की कामना की गई। दूसरे सत्र में विभिन्न राज्यों तथा विदेश से आए गणमान्य व्यक्तियों का सम्मान किया गया। इसके बाद समारोह स्मृति ग्रंथ का विमोचन किया गया। समाज द्वारा निकाली जाने वाली पत्रिकाओं के मुख्य विषयों को जोड़कर यह स्मृति ग्रंथ बनाया गया है। इस दौरान समाज के वरिष्ठजनों ने युवा पीढ़ी को समाज की उपलब्धियां बताईं। साथ ही इस कड़ी में और भी ढेर सारी उपलब्धियां जोड़ने की अपील की गई। संचालन विष्णु शेखर व अनुज वार्ष्णेय अन्नू बीड़ी ने आगंतुकों का आभार प्रकट किया।
यह लोग प्रमुख रूप से रहे मौजूद
कार्यक्रम में एबीवीपी के सुनील वार्ष्णेय, तकनीकी शिक्षाविद डॉ. महेश्वर प्रसाद वार्ष्णेय, साहिबाबाद के सिंचाई एवं बांध निर्माण तकनीक विशेषज्ञ डॉ. रमाशंकर वार्ष्णेय, विज्ञान शोधकर्ता डॉ. राजेंद्र वार्ष्णेय राज, वजीरगंज के आयुर्वेद एवं यूनानी चिकित्सक डॉ. बृजपाल गुप्ता, इंद्र कुमार गुप्ता तेल वाले, कोसीकलां मथुरा के कमल किशोर वार्ष्णेय, सुशील वार्ष्णेय, सुनील कुमार, नितिन घुट्टी, संतोष डिब्बा, डॉ. चंद्रशेखर रिषी, विष्णु भैया, अनुज शेखर सराफ, आकाश कोल आदि मौजूद रहे।
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1934 में वृंदावन अक्रूरजी मंदिर की हुई थी स्थापना
महासभा के अध्यक्ष एलडी वार्ष्णेय ने कहा कि सन् 1888 में महासभा की परिकल्पना का उदय होने के बाद 1896 में राजघाट की पवित्र धरती पर पहला सजातीय अधिवेशन हुआ। फिर अपने अलीगढ़ के अंदर 1919 में बारहसैनी महासभा का अक्तूबर में अधिवेशन किया गया। 1920 में बारहसैनी मासिक पत्र के प्रथम अंक का जनवरी में प्रकाशन किया गया और 1922 में बारहसैनी व्यापारिक पाठशाला अलीगढ़ में ही स्थापित की गई। 1931 में मिडिल स्कूल बना, फिर 1934 में श्री अक्रूरजी मंदिर वृंदावन में स्थापित किया गया। हीरालाल बारहसैनी हाईस्कूल 1939 में बनकर तैयार हुआ। 1941 में कुल जनगणना हुई। 1944 में रजत जयंती, 1947 में बारहसैनी कॉलेज, 1961 में पुन: जनगणना के बाद 1974 में श्री वार्ष्णेय कॉलेज की रजत जयंती संपन्न हुई। सन 2000 में श्री वार्ष्णेय मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा हुई। 2005 में वार्ष्णेय स्मारिका, 2008 में कुलकथा का प्रकाशन, 2010 में वार्ष्णेय मंदिर का पुन: लोकार्पण व आधिकारिक कार्यालय का उद्घाटन हुआ। 1997 में अक्रूर जी भागवत, 1998 में अक्रूरजी का मेला निकालने के बाद इंद्रकुमार तेल वालों के सभापति बनने के बाद 2015 में अक्रूरजी महाराज की मूर्ति स्थापना की गई।
इन गणमान्य लोगों को किया गया सम्मानित
दोपहर में आयोजित सम्मान समारोह का शुभारंभ हरिशंकर प्रभाकर के नेतृत्व में आयुर्वेदिक मेडिकल कालेज के चेयरमैन राकेश गुप्ता साईं ने दीप प्रज्ज्वलन कर किया। सुनील गुप्ता कोषाध्यक्ष ने हवन यज्ञ संपन्न कराया।
समाज सेवा के क्षेत्र में दिल्ली से आए गंगा प्रसाद सुमन, लखनऊ से कल्पना वार्ष्णेय, मुकेश वार्ष्णेय, कासगंज से सुनील वार्ष्णेय, शिक्षा के क्षेत्र में हाथरस से स्वतंत्र कुमार वार्ष्णेय, रक्षा के क्षेत्र में दिल्ली से कर्नल डॉ. दीपक कुमार गुप्ता, विशाल गौरव, नोयडा से ब्रिगेडियर डॉ. भुवनेश चौधरी, बड़ौदा से पीयूष वार्ष्णेय, स्वास्थ्य के क्षेत्र में वजीरगंज बदायूं से डॉ. बृजपाल वार्ष्णेय, आगरा से नीना गुप्ता, हल्द्वानी से डॉ. नीरज वार्ष्णेय, प्रशासनिक सेवा में अलीगढ़ की एडीआईओएस दीप्ती वार्ष्णेय, दिल्ली से गौरव गुप्ता, पूनम गुप्ता, लखनऊ से आशीष लाल गुप्ता, साहित्य व कला के क्षेत्र में अलीगढ़ से डॉक्टर ममता वास, दिल्ली से सुबोध भारतीय, हल्द्वानी से अशोक वार्ष्णेय, गाजियाबाद से डॉ. चक्खन लाल वार्ष्णेय, विज्ञान व तकनीकी क्षेत्र में डॉ. महेश्वर प्रसाद वार्ष्णेय, डॉ. रमाशंकर वार्ष्णेय, राजेंद्र वार्ष्णेय राज, मुंबई से प्रेम प्रकाश गुप्ता, दिल्ली से केसी वार्ष्णेय, नोएडा से इंजीनियर पीसी गुप्ता, दिल्ली से प्रभात वार्ष्णेय, गुड़गांव से विवेक वार्ष्णेय, अलीगढ़ से केबी वार्ष्णेय, दिल्ली से ईं. पूनम वार्ष्णेय, विधि के क्षेत्र में बुलंदशहर के योगेश चंद्र गुप्ता, अलीगढ़ के जीतू वार्ष्णेय, सागर शंकर, राजनीति के क्षेत्र में शहर विधायक संजीव राजा, भारतीय प्रतिभाओं के क्षेत्र में कुमारी धुरवा वार्ष्णेय दिल्ली, कुमारी हिमाद्री धीरज अलीगढ़, कुमारी मोनिका गुप्ता, कुमारी कनिका वार्ष्णेय सहित वार्ष्णेय समाज के वृद्धजनों का सम्मान किया गया।
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बारहसैनी महासभा की युवा टीम भी सम्मानित
अलीगढ़। अखिल भारतीय युवा वारहसैनी महासभा की युवा महानगर कमेटी का भी स्वागत किया गया। अखिल भारतीय युवा महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु भैया व राष्ट्रीय महामंत्री अमित सराफ ने पुरी युवा टीम को शील्ड व पटका पहनाकर सम्मानित किया। महानगर अध्यक्ष अरुण वार्ष्णेय, महामंत्री पवन गुप्ता, जीतू वार्ष्णेय, महानगर मंत्री कान्हा भैया आदि मौजूद रहे।
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लोगों के दिल में उतरा भक्त के वश में हैं भगवान नाटक
अलीगढ़। शताब्दी समारोह का तीसरे तथा अंतिम सत्र में सांस्कृतिक कार्यक्रम तथा कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। समाज के बच्चों ने विभिन्न रंगारंग प्रस्तुतियां देकर खूब तालियां बटोरीं। सांस्कृतिक कार्यक्रम में महिलाओं की टोलियों ने भक्त के बस में हैं भगवान नाटक प्रस्तुत किया। इसके माध्यम से दिखाया गया कि एक भक्त अपनी बेटी की शादी के लिए सेठ से कर्जा लेता है। धन वापसी के समय सेठ बेईमानी कर लेता है और मकान को हड़प लेता है। मामला न्यायालय में जाता है। जहां भक्त की तरफ से गवाही देने के लिए भगवान स्वयं आते हैं। नाटक सभी के दिल में उतर गया। इस दौरान बांके बिहारी के जयकारे भी लगे। इसके बाद देर शाम को आयोजित कवि सम्मेलन में समाज के कवि डॉ. ममता वार्ष्णेय, श्री ओम वार्ष्णेय, चंद्रगुप्त विक्रमादित्य, दीपक वार्ष्णेय, वेद प्रकाश मणि की रचनाएं सुनकर श्रोता गदगद दिखाई दिए। नाटक में ज्योति पम्मी जज, हेमा वार्ष्णेय भक्त, संजना वार्ष्णेय सेठ, तनुजा वार्ष्णेय कृष्ण, हिंदुबाला अर्दली, खुशबू व मुस्कान दुल्हा दुल्हन और ममता वार्ष्णेय ने दोस्त का रोल किया।
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शताब्दी समारोह तीन सत्रों में आयोजित किया गया। पहले सत्र में हवन यज्ञ का आयोजन अक्रूरजी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर शुभारंभ किया गया। समाज के लोगों हवन में आहुतियां देकर समाज तथा देश में सुख समृद्धि की कामना की गई। दूसरे सत्र में विभिन्न राज्यों तथा विदेश से आए गणमान्य व्यक्तियों का सम्मान किया गया। इसके बाद समारोह स्मृति ग्रंथ का विमोचन किया गया। समाज द्वारा निकाली जाने वाली पत्रिकाओं के मुख्य विषयों को जोड़कर यह स्मृति ग्रंथ बनाया गया है। इस दौरान समाज के वरिष्ठजनों ने युवा पीढ़ी को समाज की उपलब्धियां बताईं। साथ ही इस कड़ी में और भी ढेर सारी उपलब्धियां जोड़ने की अपील की गई। संचालन विष्णु शेखर व अनुज वार्ष्णेय अन्नू बीड़ी ने आगंतुकों का आभार प्रकट किया।
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कार्यक्रम में एबीवीपी के सुनील वार्ष्णेय, तकनीकी शिक्षाविद डॉ. महेश्वर प्रसाद वार्ष्णेय, साहिबाबाद के सिंचाई एवं बांध निर्माण तकनीक विशेषज्ञ डॉ. रमाशंकर वार्ष्णेय, विज्ञान शोधकर्ता डॉ. राजेंद्र वार्ष्णेय राज, वजीरगंज के आयुर्वेद एवं यूनानी चिकित्सक डॉ. बृजपाल गुप्ता, इंद्र कुमार गुप्ता तेल वाले, कोसीकलां मथुरा के कमल किशोर वार्ष्णेय, सुशील वार्ष्णेय, सुनील कुमार, नितिन घुट्टी, संतोष डिब्बा, डॉ. चंद्रशेखर रिषी, विष्णु भैया, अनुज शेखर सराफ, आकाश कोल आदि मौजूद रहे।
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1934 में वृंदावन अक्रूरजी मंदिर की हुई थी स्थापना
महासभा के अध्यक्ष एलडी वार्ष्णेय ने कहा कि सन् 1888 में महासभा की परिकल्पना का उदय होने के बाद 1896 में राजघाट की पवित्र धरती पर पहला सजातीय अधिवेशन हुआ। फिर अपने अलीगढ़ के अंदर 1919 में बारहसैनी महासभा का अक्तूबर में अधिवेशन किया गया। 1920 में बारहसैनी मासिक पत्र के प्रथम अंक का जनवरी में प्रकाशन किया गया और 1922 में बारहसैनी व्यापारिक पाठशाला अलीगढ़ में ही स्थापित की गई। 1931 में मिडिल स्कूल बना, फिर 1934 में श्री अक्रूरजी मंदिर वृंदावन में स्थापित किया गया। हीरालाल बारहसैनी हाईस्कूल 1939 में बनकर तैयार हुआ। 1941 में कुल जनगणना हुई। 1944 में रजत जयंती, 1947 में बारहसैनी कॉलेज, 1961 में पुन: जनगणना के बाद 1974 में श्री वार्ष्णेय कॉलेज की रजत जयंती संपन्न हुई। सन 2000 में श्री वार्ष्णेय मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा हुई। 2005 में वार्ष्णेय स्मारिका, 2008 में कुलकथा का प्रकाशन, 2010 में वार्ष्णेय मंदिर का पुन: लोकार्पण व आधिकारिक कार्यालय का उद्घाटन हुआ। 1997 में अक्रूर जी भागवत, 1998 में अक्रूरजी का मेला निकालने के बाद इंद्रकुमार तेल वालों के सभापति बनने के बाद 2015 में अक्रूरजी महाराज की मूर्ति स्थापना की गई।
इन गणमान्य लोगों को किया गया सम्मानित
दोपहर में आयोजित सम्मान समारोह का शुभारंभ हरिशंकर प्रभाकर के नेतृत्व में आयुर्वेदिक मेडिकल कालेज के चेयरमैन राकेश गुप्ता साईं ने दीप प्रज्ज्वलन कर किया। सुनील गुप्ता कोषाध्यक्ष ने हवन यज्ञ संपन्न कराया।
समाज सेवा के क्षेत्र में दिल्ली से आए गंगा प्रसाद सुमन, लखनऊ से कल्पना वार्ष्णेय, मुकेश वार्ष्णेय, कासगंज से सुनील वार्ष्णेय, शिक्षा के क्षेत्र में हाथरस से स्वतंत्र कुमार वार्ष्णेय, रक्षा के क्षेत्र में दिल्ली से कर्नल डॉ. दीपक कुमार गुप्ता, विशाल गौरव, नोयडा से ब्रिगेडियर डॉ. भुवनेश चौधरी, बड़ौदा से पीयूष वार्ष्णेय, स्वास्थ्य के क्षेत्र में वजीरगंज बदायूं से डॉ. बृजपाल वार्ष्णेय, आगरा से नीना गुप्ता, हल्द्वानी से डॉ. नीरज वार्ष्णेय, प्रशासनिक सेवा में अलीगढ़ की एडीआईओएस दीप्ती वार्ष्णेय, दिल्ली से गौरव गुप्ता, पूनम गुप्ता, लखनऊ से आशीष लाल गुप्ता, साहित्य व कला के क्षेत्र में अलीगढ़ से डॉक्टर ममता वास, दिल्ली से सुबोध भारतीय, हल्द्वानी से अशोक वार्ष्णेय, गाजियाबाद से डॉ. चक्खन लाल वार्ष्णेय, विज्ञान व तकनीकी क्षेत्र में डॉ. महेश्वर प्रसाद वार्ष्णेय, डॉ. रमाशंकर वार्ष्णेय, राजेंद्र वार्ष्णेय राज, मुंबई से प्रेम प्रकाश गुप्ता, दिल्ली से केसी वार्ष्णेय, नोएडा से इंजीनियर पीसी गुप्ता, दिल्ली से प्रभात वार्ष्णेय, गुड़गांव से विवेक वार्ष्णेय, अलीगढ़ से केबी वार्ष्णेय, दिल्ली से ईं. पूनम वार्ष्णेय, विधि के क्षेत्र में बुलंदशहर के योगेश चंद्र गुप्ता, अलीगढ़ के जीतू वार्ष्णेय, सागर शंकर, राजनीति के क्षेत्र में शहर विधायक संजीव राजा, भारतीय प्रतिभाओं के क्षेत्र में कुमारी धुरवा वार्ष्णेय दिल्ली, कुमारी हिमाद्री धीरज अलीगढ़, कुमारी मोनिका गुप्ता, कुमारी कनिका वार्ष्णेय सहित वार्ष्णेय समाज के वृद्धजनों का सम्मान किया गया।
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बारहसैनी महासभा की युवा टीम भी सम्मानित
अलीगढ़। अखिल भारतीय युवा वारहसैनी महासभा की युवा महानगर कमेटी का भी स्वागत किया गया। अखिल भारतीय युवा महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु भैया व राष्ट्रीय महामंत्री अमित सराफ ने पुरी युवा टीम को शील्ड व पटका पहनाकर सम्मानित किया। महानगर अध्यक्ष अरुण वार्ष्णेय, महामंत्री पवन गुप्ता, जीतू वार्ष्णेय, महानगर मंत्री कान्हा भैया आदि मौजूद रहे।
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लोगों के दिल में उतरा भक्त के वश में हैं भगवान नाटक
अलीगढ़। शताब्दी समारोह का तीसरे तथा अंतिम सत्र में सांस्कृतिक कार्यक्रम तथा कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। समाज के बच्चों ने विभिन्न रंगारंग प्रस्तुतियां देकर खूब तालियां बटोरीं। सांस्कृतिक कार्यक्रम में महिलाओं की टोलियों ने भक्त के बस में हैं भगवान नाटक प्रस्तुत किया। इसके माध्यम से दिखाया गया कि एक भक्त अपनी बेटी की शादी के लिए सेठ से कर्जा लेता है। धन वापसी के समय सेठ बेईमानी कर लेता है और मकान को हड़प लेता है। मामला न्यायालय में जाता है। जहां भक्त की तरफ से गवाही देने के लिए भगवान स्वयं आते हैं। नाटक सभी के दिल में उतर गया। इस दौरान बांके बिहारी के जयकारे भी लगे। इसके बाद देर शाम को आयोजित कवि सम्मेलन में समाज के कवि डॉ. ममता वार्ष्णेय, श्री ओम वार्ष्णेय, चंद्रगुप्त विक्रमादित्य, दीपक वार्ष्णेय, वेद प्रकाश मणि की रचनाएं सुनकर श्रोता गदगद दिखाई दिए। नाटक में ज्योति पम्मी जज, हेमा वार्ष्णेय भक्त, संजना वार्ष्णेय सेठ, तनुजा वार्ष्णेय कृष्ण, हिंदुबाला अर्दली, खुशबू व मुस्कान दुल्हा दुल्हन और ममता वार्ष्णेय ने दोस्त का रोल किया।

अखिल भारतवर्षीय श्री वैश्य बारहसैनी महासभा के शताब्दी कार्यक्रम में कार्यक्रम मंचासीन अतिथिगण- फोटो : CITY OFFICE

अखिल भारतवर्षीय श्री वैश्य बारहसैनी महासभा के शताब्दी कार्यक्रम में कार्यक्रम के अति विशिष्ठ अ?- फोटो : CITY OFFICE