Aligarh News: क्रय केंद्रों पर पसरा सन्नाटा, सरकारी भुगतान में देरी, घाटे में आढ़तियों को गेहूं बेच रहे किसान
सरकारी केंद्रों पर भुगतान आरटीजीएस के माध्यम से 72 घंटे या उससे अधिक समय में होता है, जबकि आढ़तिये मौके पर नकद भुगतान कर देते हैं। ऐसे में कम दाम पर भी गेहूं बेचना उनकी मजबूरी बन जाती है।
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अलीगढ़ जिले में गेहूं खरीद की प्रक्रिया 30 मार्च से शुरू हो गई, लेकिन पहले ही दिन क्रय केंद्रों पर सन्नाटा पसरा रहा। 84 केंद्र बनाए जाने के बावजूद कहीं भी खरीद शुरू नहीं हो सकी। इससे किसानों को मजबूरन खुले बाजार का रुख करना पड़ा, जहां आढ़तिये नकद भुगतान कर रहे हैं।
सरकार ने गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 2585 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है, लेकिन इसका लाभ किसानों तक नहीं पहुंच पा रहा। नकद की जरूरत के चलते किसान आढ़तियों को करीब 265 रुपये प्रति क्विंटल कम कीमत पर गेहूं बेच रहे हैं।
किसान हरी सिंह, बिजेंद्र कुमार, विनोद कुमार और अर्जुन सिंह ने बताया कि उन्हें तत्काल पैसों की जरूरत होती है। सरकारी केंद्रों पर भुगतान आरटीजीएस के माध्यम से 72 घंटे या उससे अधिक समय में होता है, जबकि आढ़तिये मौके पर नकद भुगतान कर देते हैं। ऐसे में कम दाम पर भी गेहूं बेचना उनकी मजबूरी बन जाती है।
केंद्रों पर अव्यवस्था
धनीपुर मंडी स्थित क्रय केंद्र पर पहले दिन एक भी किसान गेहूं लेकर नहीं पहुंचा। केंद्र प्रभारी खुशबू के अनुसार खरीद शुरू नहीं हो सकी। गभाना तहसील के सोमना सहकारी समिति के नंबर एक व दो पर केंद्र अब तक चालू नहीं हो पाए हैं। कई स्थानों पर इलेक्ट्रॉनिक तौल मशीन, नमी मापक यंत्र, बोरे और बैनर तक नहीं लगे हैं। करनपुर, कौरह रूस्तमपुर, चंडौस, पिसावा और बरौली के केंद्रों की स्थिति भी ऐसी ही है।
शासन के निर्देश, जमीनी हकीकत अलग
शासन स्तर से क्रय केंद्रों पर इलेक्ट्रॉनिक तौल मशीन, नमी मापक, बोरे, पेयजल, शौचालय और छाया जैसी सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त केंद्र खोलने और खराब उपकरणों को तुरंत ठीक कराने को कहा गया है, लेकिन जमीनी स्तर पर व्यवस्थाएं अधूरी दिखीं।
पंजीकरण की शर्त भी बनी अड़चन
क्षेत्रीय खाद्य विपणन अधिकारी रतन कुमार शुक्ला ने बताया कि केवल उन्हीं किसानों का गेहूं खरीदा जाएगा, जिनका खाद्य विभाग की वेबसाइट पर पंजीकरण होगा। भुगतान आधार लिंक खाते में आरटीजीएस के माध्यम से किया जाएगा। ई-पॉश मशीन से बायोमैट्रिक सत्यापन के बाद ही खरीद होगी और सभी केंद्रों की जियो टैगिंग भी की जाएगी।
क्यों आढ़तियों की ओर जा रहे किसान?
- भुगतान में देरी
- नकद की तत्काल जरूरत
- क्रय केंद्रों पर अव्यवस्था
- पंजीकरण की अनिवार्यता