अलीगढ़: खैर के जाम में फंसी बीमार मासूम, सीएचसी पहुंचने से पहले चाचा की गोद में तोड़ा दम, थम गई उर्मी की सांस
खैर कस्बा में सुबह 10 बजे से रात आठ बजे तक प्रशासन द्वारा भारी वाहनों के प्रवेश पर पूर्व से ही नो-एंट्री घोषित की गई है। इसके बावजूद दिन के समय भी भारी वाहन कस्बे से गुजरते हैं, जिससे जाम की स्थिति बनी रहती है।
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खैर में टेंटी गांव तिराहे के पास जाम की गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्होंने परिचित की बाइक ली और उर्मी को लेकर गलियों के रास्ते अस्पताल पहुंचने का प्रयास किया, लेकिन जाम से निकलने में करीब एक घंटे का समय लग गया। इस दौरान बच्ची की हालत लगातार बिगड़ती रही और अस्पताल पहुंचने से पहले ही उर्मी ने चाचा की गोद में दम तोड़ दिया। बच्ची को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया तो चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
परिजनों का आरोप है कि जाम के कारण समय पर उपचार नहीं मिलने के कारण बच्ची की जान गई है। रोते-बिलखते परिजन उर्मी के शव को बिना किसी कानूनी कार्रवाई के घर ले गए और उसका अंतिम संस्कार कर दिया। बताया गया है कि कन्हैयालाल अनाज मंडी में मजदूरी करते हैं, उनका उर्मी से छोटा चार का बेटा समीर है, बच्ची की मौत से उसकी मां गुड़िया का रो रो कर बुरा हाल है।
दोपहर के समय बारिश के बाद अचानक सड़कों पर दोपहिया वाहनों की संख्या बढ़ गई थी। जगह-जगह जलभराव होने के कारण यातायात की गति धीमी हो गई, जिससे जाम की स्थिति उत्पन्न हुई और यातायात प्रभावित रहा।-अभिषेक पटेल, सीओ खैर।
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बच्ची को अस्पताल लाए जाने से पहले ही उसकी मृत्यु हो चुकी थी। क्षेत्र में वायरल बुखार के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। अधिकांश मरीज तीन से चार दिन के उपचार के बाद स्वस्थ हो रहे हैं।-डॉक्टर रोहित भाटी, सीएचसी प्रभारी खैर।
जानलेवा साबित हो रहा है जाम, स्कूली बच्चे रहते हैं बेहाल
खैर कस्बा में सुबह 10 बजे से रात आठ बजे तक प्रशासन द्वारा भारी वाहनों के प्रवेश पर पूर्व से ही नो-एंट्री घोषित की गई है। इसके बावजूद दिन के समय भी भारी वाहन कस्बे से गुजरते हैं, जिससे जाम की स्थिति बनी रहती है। मुख्य रूप से टेंटी गांव तिराहा, सुभाष चौक और करवन नदी के पुल पर यातायात रुक-रुककर चलता है।
दोपहर के समय भारी यातायात के कारण आमजन के साथ-साथ स्कूल आने-जाने वाले बच्चों को भी खासी परेशानी का सामना करना पड़ता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कस्बे में यातायात व्यवस्था को दुरुस्त करने और नो-एंट्री के नियमों का सख्ती से पालन कराने की आवश्यकता है।
15 सितंबर से और बढ़ सकती है जाम की समस्या
धान का सीजन शुरू होते ही जाम की समस्या विकराल रूप धारण कर लेती है। कृषि उत्पादन मंडी समिति में 15 सितंबर से दिसंबर के अंत तक धान की आवक के चलते प्रतिदिन भारी संख्या में वाहन पहुंचते हैं। इस दौरान मंडी परिसर और उसके आसपास हजारों ट्रैक्टर-ट्रॉलियां तथा अन्य मालवाहक वाहन दिखाई देते हैं।
24-24 घंटे तक लग जाता है जाम
कभी-कभी लगातार 24 घंटे तक जाम की स्थिति बनी रहने से आमजन को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। सबसे चिंताजनक स्थिति मरीजों और एंबुलेंस की होती है। गंभीर मरीजों को समय से अस्पताल पहुंचाना मुश्किल हो जाता है और जाम में फंसने के कारण उनकी जान पर भी संकट पैदा हो सकता है।
एंबुलेंस को चंडौस होकर निकालना पड़ता है
कस्बे में बाईपास मार्ग न होने के कारण बड़े वाहनों और आपातकालीन सेवाओं को भी जाम का सामना करना पड़ता है। कई बार दिल्ली की ओर जाने वाली एंबुलेंस और अन्य वाहनों को चंडौस की ओर डायवर्ट करना पड़ता है, जिससे मरीजों को अस्पताल पहुंचने में अतिरिक्त समय लग जाता है। स्थानीय व्यापारियों, किसानों और आम नागरिकों द्वारा लंबे समय से खैर कस्बे के लिए बाईपास मार्ग की मांग की जा रही है।