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शो जंपिंग हार्स ‘नाइट’ की मौत से एएमयू को झटका
अमर उजाला, अलीगढ़
Updated Sat, 20 Aug 2016 01:45 AM IST
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Knight
- फोटो : amar Ujala
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अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय राइडिंग क्लब का घोड़ा ‘नाइट’ अब नहीं रहा। लंबी बीमारी के बाद उसका निधन हो गया। उसके निधन से एएमयू राइडिंग क्लब को गहरा झटका लगा है। शो जंपिंग के लिए क्लब में वह इकलौता घोड़ा था।
नाइट एएमयू राइडिंग क्लब का पुराना सदस्य था। करीब 23 वर्ष की आयु में लंबी बीमारी के बाद उसका निधन हुआ है। दीक्षांत समारोह के दौरान मुख्य अतिथि की बग्धी को उसने खींचा था। क्लब से जुड़े लोगों का कहना है कि शो जंपिंग में नाइट इकलौता घोड़ा था। उसकी जंप देखने लायक होती थी।
एएमयू गेम्स कमेटी के सचिव प्रो. शोएब जहीर का कहना है कि नाइट लंबे समय से बीमार चल रहा था। दो-तीन महीने से उसकी तबियत ज्यादा खराब थी। स्थानीय चिकित्सकों से दिखाने के बाद बात नहीं बनी तो उसे वाहन से मथुरा अस्पताल में भेजा गया था। उसकी हालत को देखते हुए वहां भी चिकित्सकों ने हाथ खड़े कर दिए।
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उन्होंने कहा कि उम्र अधिक होने के कारण नाइट को मैदान में नहीं उतारा जा रहा था। हमलोग उसे बेचने के बदले उसकी देखभाल पर जोर दिया और पूरी खिदमत की। उल्लेखनीय है कि कुछ महीने पहले ब्रूनी नामक घोड़े की भी मौत हो गई थी।
करीब छह महीने के अंदर दो घोड़े के मरने से राइडिंग क्लब को गहरा झटका लगा है। एक अन्य घोड़ा मोती भी काफी पुराना हो चुका है और उसकी तबियत ठीक नहीं रहती। क्लब में अब घोड़ों की कमी होती जा रही है।
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नाइट एएमयू राइडिंग क्लब का पुराना सदस्य था। करीब 23 वर्ष की आयु में लंबी बीमारी के बाद उसका निधन हुआ है। दीक्षांत समारोह के दौरान मुख्य अतिथि की बग्धी को उसने खींचा था। क्लब से जुड़े लोगों का कहना है कि शो जंपिंग में नाइट इकलौता घोड़ा था। उसकी जंप देखने लायक होती थी।
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एएमयू गेम्स कमेटी के सचिव प्रो. शोएब जहीर का कहना है कि नाइट लंबे समय से बीमार चल रहा था। दो-तीन महीने से उसकी तबियत ज्यादा खराब थी। स्थानीय चिकित्सकों से दिखाने के बाद बात नहीं बनी तो उसे वाहन से मथुरा अस्पताल में भेजा गया था। उसकी हालत को देखते हुए वहां भी चिकित्सकों ने हाथ खड़े कर दिए।
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उन्होंने कहा कि उम्र अधिक होने के कारण नाइट को मैदान में नहीं उतारा जा रहा था। हमलोग उसे बेचने के बदले उसकी देखभाल पर जोर दिया और पूरी खिदमत की। उल्लेखनीय है कि कुछ महीने पहले ब्रूनी नामक घोड़े की भी मौत हो गई थी।
करीब छह महीने के अंदर दो घोड़े के मरने से राइडिंग क्लब को गहरा झटका लगा है। एक अन्य घोड़ा मोती भी काफी पुराना हो चुका है और उसकी तबियत ठीक नहीं रहती। क्लब में अब घोड़ों की कमी होती जा रही है।