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फफाला मार्केट में 53 लाख के बकायेदार की दुकान सीज
अमर उजाला, अलीगढ़
Updated Sun, 28 May 2017 01:26 AM IST
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बकायेदार की दुकान पर पजेशन लेने पहुंची इलाहबाद बैंक की टीम व प्रशासनिक अधिकारी।
- फोटो : अमर उजाला
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लंबे समय से मूल व ब्याज दबाए बैठे एनपीए यानी नान परफारमिंग एकाउंट्स धारक बकायेदारों की शामत आ गई है। शनिवार को भी इलाहाबाद बैंक महावीर गंज शाखा के 53 लाख की बकायेदार फर्म अलीगढ़ ड्रग एजेंसी के खिलाफ एसीएम प्रथम की अगुवाई में कार्रवाई की गई। बैंक व रिकवरी एजेंसी जीटीटीआर मार्केटिंग प्राइवेट लिमिटेड के सर्वेयरों ने फफाला मार्केट स्थित फर्म की दुकान में सील लगा दी।
कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में पुलिस फोर्स व रिकवरी टीम के चलते हड़कंप मचा रहा। मानिक चौक निवासी जितेंद्र गुप्ता एवं उनके पार्टनर गंभीरपुरा निवासी वीरेंद्र गुप्ता की रेलवे रोड फफाला मार्केट में अलीगढ़ ड्रग एजेंसी के नाम से फर्म है।
इस फर्म के नाम पर कई साल पहले इलाहाबाद बैंक महावीरगंज शाखा से 53 लाख रुपये का लोन लिया गया, लेकिन तमाम नोटिसों के बावजूद इसका न मूल चुकाया और न ही ब्याज। आजिज आए बैंक प्रबंधन ने अगस्त 2014 में फर्म के खिलाफ एनपीए जारी कर दिया।
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इसके बाद इसी साल में सिंबोलिक पजेशन भी ले लिया। हालांकि इस मामले में 20 जनवरी 2016 को एडीएम वित्त एवं राजस्व से दुकान सीज करने की संस्तुति मिल चुकी थी लेकिन औपचारिकताओं के चलते कार्रवाई अब तक लंबित थी।
एसीएम प्रथम ललित कुमार ने स्वीकार किया कि फर्म की दुकान सीज कर दी गई है। यदि 45 दिन के अंदर फर्म स्वामी ने बकाया जमा नहीं कराया तो नीलामी की कार्रवाई की जाएगी।
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कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में पुलिस फोर्स व रिकवरी टीम के चलते हड़कंप मचा रहा। मानिक चौक निवासी जितेंद्र गुप्ता एवं उनके पार्टनर गंभीरपुरा निवासी वीरेंद्र गुप्ता की रेलवे रोड फफाला मार्केट में अलीगढ़ ड्रग एजेंसी के नाम से फर्म है।
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इस फर्म के नाम पर कई साल पहले इलाहाबाद बैंक महावीरगंज शाखा से 53 लाख रुपये का लोन लिया गया, लेकिन तमाम नोटिसों के बावजूद इसका न मूल चुकाया और न ही ब्याज। आजिज आए बैंक प्रबंधन ने अगस्त 2014 में फर्म के खिलाफ एनपीए जारी कर दिया।
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इसके बाद इसी साल में सिंबोलिक पजेशन भी ले लिया। हालांकि इस मामले में 20 जनवरी 2016 को एडीएम वित्त एवं राजस्व से दुकान सीज करने की संस्तुति मिल चुकी थी लेकिन औपचारिकताओं के चलते कार्रवाई अब तक लंबित थी।
एसीएम प्रथम ललित कुमार ने स्वीकार किया कि फर्म की दुकान सीज कर दी गई है। यदि 45 दिन के अंदर फर्म स्वामी ने बकाया जमा नहीं कराया तो नीलामी की कार्रवाई की जाएगी।