शेखा झील नहीं, तालाब पर फिदा प्रवासी पक्षी
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अलीगढ़। शेखा झील की शोखियां विदेशी मेहमानों को मोह पॉश में नहीं बांध पा रही हैं। यहां की बिगड़ती आवोहवा से परेशान होकर उन्होंने नया ठिकाना बना लिया है। हाथरस जिले की सीमा से सटा अमां मदापुर गांव के तालाब का पारिस्थितिकीय तंत्र उनको वैट लैंड स्कीम के तहत संरक्षित शेखा झील से अधिक अनुकूल लग रहा है। पक्षी विज्ञानी और पर्यावरण प्रेमी इसे खतरे की घंटी बता रहे हैं।
झील का पारिस्थितिकीय तंत्र बिगड़ रहा है। झील को जलकुंभी ने पाट दिया है। पानी भी पर्याप्त मात्रा में नहीं है। पानी की कमी और जलकुंभी के कारण पक्षियों को पैर रखने,पंख फैलाने भर को भरपूर जगह नहीं मिल रही है। झील का मुश्किल से दसवां हिस्सा ही जलकुंभी रहित है। इसी हिस्से पर यहां प्रवास करने वाले सभी पक्षियों का दबाव है। यह हिस्सा भी अतिक्रमण की चपेट में है।
आसपास के गांव के लोग झील के अंदर पक्षियों के प्रवास क्षेत्र तक घास काटने पहुंच जाते हैं। कोई भी उनको रोकता नहीं है। पर्यावरणविद़् सुबोध नंदन शर्मा ने बताया कि शेखा झील में वर्तमान में करीब तीन हजार प्रवासी पक्षी हैं। बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षी झील से करीब 15 किमी दूर अलीगढ़ जिले के आखिरी गांव अमां मदापुर के तालाब में पलायन कर रहे हैं। यहां करीब 60 बीघा में फैले तालाब की पारिस्थितिकी तंत्र उनके अनकूल है।