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अलीगढ़ः अमेरिका से 12वीं की पढ़ाई करेंगे शादाब
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शादाब।
- फोटो : CITY OFFICE
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अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) के एसटीएस स्कूल के 11वीं के छात्र रहे मोहम्मद शादाब अब मेडिसन ईस्ट हाईस्कूल विस्कान्सिन, अमेरिका से 12वीं की पढ़ाई करेंगे।
मोटर मैकेनिक के बेटे शादाब ने छात्रवृत्ति के जरिये अमेरिका में 10वीं की पढ़ाई की थी। अमेरिका से लौटने के बाद शादाब ने कहा कि उन्हें ऐसा लगता है कि वह कुछ और चीजें तलाश सकते हैं और सीख सकते हैं, लेकिन दुर्भाग्य से उनकी छात्रवृत्ति केवल एक वर्ष के लिए थी। पढ़ाई के दौरान उन्होंने मेडिसन विस्कान्सिन अमेरिका में रहने वाले एएमयू के पूर्व छात्र मसूद अख्तर से मिलेे थे। इसके बाद उन्होंने शादाब की मदद का बीड़ा उठाया था। वह मेडिसन ईस्ट हाईस्कूल के प्रिंसिपल से मिले और उन्हें आश्वासन दिया गया कि अगर शादाब स्कूल से 12वीं की पढ़ाई पूरा करते हैं तो उसे स्कूल डिप्लोमा प्रदान करेगा।
इसके बाद मसूद अख्तर ने स्कूल के करीब रहने वाले मोरक्कन परिवार से संपर्क किया कि वह शादाब की मेजबानी करने में रुचि रखते हैं। परिवार ने अपनी सहमति दे दी। शादाब के वार्षिक शिक्षण शुल्क, वीजा खर्च, एयरलाइन के टिकट, स्वास्थ्य बीमा, रहने के खर्च आदि को कवर करने के लिए तुरंत धन जुटाया गया। शादाब 25 सितंबर को शिकागो के ओश्हारे हवाई अड्डे पर पहुंचेंगे और मोरक्कन परिवार के यहां पर रहकर पढ़ाई करेंगे।
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शादाब को बधाई देते हुए एएमयू कुलपति प्रोफेसर तारिक मंसूर ने कहा कि किसी संस्था की सफलता के लिए कल्याणकारी पूर्व छात्रों का नेटवर्क बनाना महत्वपूर्ण है। एक जरूरतमंद छात्र का समर्थन या उसकी शिक्षा को प्रायोजित करना मातृ संस्था को वापस देने का सबसे अच्छा तरीका है। शादाब ने कहा कि ‘मदद के लिए वह मसूद अख्तर साहब का हमेशा आभारी रहेंगे। मुझे प्रोत्साहित करने के लिए मैं एएमयू प्रशासन सहित सभी का ऋणी हूं’।
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मोटर मैकेनिक के बेटे शादाब ने छात्रवृत्ति के जरिये अमेरिका में 10वीं की पढ़ाई की थी। अमेरिका से लौटने के बाद शादाब ने कहा कि उन्हें ऐसा लगता है कि वह कुछ और चीजें तलाश सकते हैं और सीख सकते हैं, लेकिन दुर्भाग्य से उनकी छात्रवृत्ति केवल एक वर्ष के लिए थी। पढ़ाई के दौरान उन्होंने मेडिसन विस्कान्सिन अमेरिका में रहने वाले एएमयू के पूर्व छात्र मसूद अख्तर से मिलेे थे। इसके बाद उन्होंने शादाब की मदद का बीड़ा उठाया था। वह मेडिसन ईस्ट हाईस्कूल के प्रिंसिपल से मिले और उन्हें आश्वासन दिया गया कि अगर शादाब स्कूल से 12वीं की पढ़ाई पूरा करते हैं तो उसे स्कूल डिप्लोमा प्रदान करेगा।
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इसके बाद मसूद अख्तर ने स्कूल के करीब रहने वाले मोरक्कन परिवार से संपर्क किया कि वह शादाब की मेजबानी करने में रुचि रखते हैं। परिवार ने अपनी सहमति दे दी। शादाब के वार्षिक शिक्षण शुल्क, वीजा खर्च, एयरलाइन के टिकट, स्वास्थ्य बीमा, रहने के खर्च आदि को कवर करने के लिए तुरंत धन जुटाया गया। शादाब 25 सितंबर को शिकागो के ओश्हारे हवाई अड्डे पर पहुंचेंगे और मोरक्कन परिवार के यहां पर रहकर पढ़ाई करेंगे।
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शादाब को बधाई देते हुए एएमयू कुलपति प्रोफेसर तारिक मंसूर ने कहा कि किसी संस्था की सफलता के लिए कल्याणकारी पूर्व छात्रों का नेटवर्क बनाना महत्वपूर्ण है। एक जरूरतमंद छात्र का समर्थन या उसकी शिक्षा को प्रायोजित करना मातृ संस्था को वापस देने का सबसे अच्छा तरीका है। शादाब ने कहा कि ‘मदद के लिए वह मसूद अख्तर साहब का हमेशा आभारी रहेंगे। मुझे प्रोत्साहित करने के लिए मैं एएमयू प्रशासन सहित सभी का ऋणी हूं’।