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अलीगढ़ : शुभारंभ पत्थर पर नाम देखकर भड़के विधायक, अब नया लगेगा पत्थर
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कोल विधायक अनिल पाराशर, एमएलसी डॉ मानवेन्द्र प्रताप, महापौर मोहम्मद फुरकान पत्थर में नाम देखते ह?
- फोटो : CITY OFFICE
नगर निगम का कयामपुर मोड़ से एटा चुंगी के बीच बाईपास पर लगवाई गईं नई विद्युत लाइटों का शुभारंभ कार्यक्रम विवाद की भेंट चढ़ गया। यहां शुभारंभ पत्थर देखकर कोल क्षेत्र के भाजपा विधायक अनिल पाराशर का पारा चढ़ गया और वे नगर निगम अफसरों को खरीखोटी सुनाते हुए कार्यक्रम से चल दिए। इस दौरान पार्टी के अन्य नेताओं ने उन्हें समझाया और पत्थर बदलने का भरोसा दिलाया, तब जाकर विधायक का गुस्सा शांत हुआ। अब नगर निगम स्तर से दूसरा पत्थर लगवाने की तैयारी की जा रही है।
हुआ यूं कि नगर निगम में भाजपा पार्षद व उपसभापति डॉ. मुकेश शर्मा ने 23 सितंबर 2021 को कयामपुर मोड़ से एटा चुंगी तक बाईपास मार्ग पर लाइट लगवाने का प्रस्ताव दिया था। इस प्रस्ताव पर नगर निगम ने 15वें वित्त से 29 लाख रुपये की लागत से 80 खंभे व 90 लाइटें लगवाई गई हैं। इस कार्यक्रम का बृहस्पतिवार सुबह देवी नगला में शुभारंभ कार्यक्रम प्रस्तावित था। कार्यक्रम में नियत समय पर मेयर मो. फुरकान, विधायक अनिल पाराशर, एमएलसी मानवेंद्र प्रताप सिंह सहित नगर निगम के अधिकारी व पार्षद आदि पहुंच गए। बाकायदा तंबू लगाकर मंच पर अतिथियों को बैठाकर उनकी अगवानी व स्वागत आदि का कार्यक्रम हुआ। इसके बाद वहां लगे शुभारंभ पत्थर के अनावरण की बारी आई।
अनावरण मेयर मो. फुरकान, विधायक अनिल पाराशर, एमएलसी मानवेंद्र प्रताप सिंह ने संयुक्त रूप से किया। जैसे ही शिलापट्ट से अनावरण पट्टिका हटी तो उस पर नामों का क्रम देखकर विधायक अनिल पाराशर का पारा चढ़ गया। उनका एतराज था कि शिलापट्ट पर मुख्यमंत्री, नगर विकास मंत्री के नाम के बाद जनप्रतिनिधियों के नाम आने चाहिए। मगर शिलापट में पहले पार्षदों, फिर अधिकारियों का नाम उल्लेखित है और सबसे नीचे एमएलसी, विधायक व मेयर का नाम है। इसे उन्होंने सम्मान से खिलवाड़ की संज्ञा दी और क्षेत्र के सांसद का नाम न होने पर भी एतराज जताया। वे पत्थर को गलत करार देकर चलने लगे। यह भी पूछा कि यह किसने बनवाया है और इसे बनवाने का कौन जिम्मेदार है। हालांकि, वहां मौजूद उपसभापति डॉ. मुकेश शर्मा, भाजपा पार्षद अनिल सेंगर, वीरेंद्र सिंह आदि ने उन्हें शांत कराया। इसके बाद अपर नगर आयुक्त अरुण कुमार गुप्त ने पत्थर बदलवाने का भरोसा दिलाया। इसके बाद विधायक वहां से नाराजगी जताते हुए चले गए। उपसभापति डॉ.मुकेश शर्मा के अनुसार यह भूल निर्माण संबंधी काम देख रहे लोगों से हुई है। विधायक जी को समझाकर भेजा गया। किसी तरह की नाराजगी नहीं है।
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- मेरी नाराजगी व्यक्तिगत मेरे नाम को लेकर नहीं, बल्कि सभी जनप्रतिनिधियों के नाम को लेकर है। सबसे पहला विषय यह है कि इस पत्थर पर क्षेत्र के सांसद का नाम क्यों नहीं है। दूसरा ये कि क्रमवार अगर बात करें तो मुख्यमंत्री, नगर विकास मंत्री के बाद विधायकगणों, एमएलसी व मेयर आदि जनप्रतिनिधियों के नाम होने थे, मगर यहां सम्मान, प्रोटोकॉल आदि को दरकिनार कर पार्षदों व अधिकारियों को तवज्जो दी गई। यही आपत्ति दर्ज कराई। इसके लिए जिम्मेदार कौन है, इसका जवाब नहीं मिला है। - अनिल पाराशर, विधायक
- सब कुछ सामान्य ढंग से निपटा है। हां, लिपिकीय भूलवश निर्माण विभाग के अधिकारियों की अनदेखी के चलते क्रम गड़बड़ाया है। विधायक जी को आश्वस्त किया गया है कि पत्थर बदला जाएगा। इसके निर्देश दे दिए गए हैं। नया पत्थर बनवाकर वहां लगाया जाएगा। - अरुण कुमार गुप्ता, अपर नगर आयुक्त
पहले हमारी समस्याएं तो सुन लो, तब करना शुभारंभ
जिस समय नगर निगम के अधिकारी और सभी जनप्रतिनिधिगण वहां विद्युत लाइटों का शुभारंभ कर रहे थे। उसी समय देवी नगला की तमाम महिलाएं पहुंच गईं। उन्होंने वहां गंदगी, जलभराव आदि को लेकर हंगामा कर दिया। महिलाओं का कहना था कि पहले हमारी गली में जाकर समस्याएं देख लो, फिर ये शुभारंभ करना। इस पर नगर निगम के अधिकारियों ने महिलाओं से वार्ता कर उन्हें समझाया और कहा कि आपकी समस्या का समाधान करा दिया जाएगा। तभी महिलाएं वहां से हटीं।
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हुआ यूं कि नगर निगम में भाजपा पार्षद व उपसभापति डॉ. मुकेश शर्मा ने 23 सितंबर 2021 को कयामपुर मोड़ से एटा चुंगी तक बाईपास मार्ग पर लाइट लगवाने का प्रस्ताव दिया था। इस प्रस्ताव पर नगर निगम ने 15वें वित्त से 29 लाख रुपये की लागत से 80 खंभे व 90 लाइटें लगवाई गई हैं। इस कार्यक्रम का बृहस्पतिवार सुबह देवी नगला में शुभारंभ कार्यक्रम प्रस्तावित था। कार्यक्रम में नियत समय पर मेयर मो. फुरकान, विधायक अनिल पाराशर, एमएलसी मानवेंद्र प्रताप सिंह सहित नगर निगम के अधिकारी व पार्षद आदि पहुंच गए। बाकायदा तंबू लगाकर मंच पर अतिथियों को बैठाकर उनकी अगवानी व स्वागत आदि का कार्यक्रम हुआ। इसके बाद वहां लगे शुभारंभ पत्थर के अनावरण की बारी आई।
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अनावरण मेयर मो. फुरकान, विधायक अनिल पाराशर, एमएलसी मानवेंद्र प्रताप सिंह ने संयुक्त रूप से किया। जैसे ही शिलापट्ट से अनावरण पट्टिका हटी तो उस पर नामों का क्रम देखकर विधायक अनिल पाराशर का पारा चढ़ गया। उनका एतराज था कि शिलापट्ट पर मुख्यमंत्री, नगर विकास मंत्री के नाम के बाद जनप्रतिनिधियों के नाम आने चाहिए। मगर शिलापट में पहले पार्षदों, फिर अधिकारियों का नाम उल्लेखित है और सबसे नीचे एमएलसी, विधायक व मेयर का नाम है। इसे उन्होंने सम्मान से खिलवाड़ की संज्ञा दी और क्षेत्र के सांसद का नाम न होने पर भी एतराज जताया। वे पत्थर को गलत करार देकर चलने लगे। यह भी पूछा कि यह किसने बनवाया है और इसे बनवाने का कौन जिम्मेदार है। हालांकि, वहां मौजूद उपसभापति डॉ. मुकेश शर्मा, भाजपा पार्षद अनिल सेंगर, वीरेंद्र सिंह आदि ने उन्हें शांत कराया। इसके बाद अपर नगर आयुक्त अरुण कुमार गुप्त ने पत्थर बदलवाने का भरोसा दिलाया। इसके बाद विधायक वहां से नाराजगी जताते हुए चले गए। उपसभापति डॉ.मुकेश शर्मा के अनुसार यह भूल निर्माण संबंधी काम देख रहे लोगों से हुई है। विधायक जी को समझाकर भेजा गया। किसी तरह की नाराजगी नहीं है।
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- मेरी नाराजगी व्यक्तिगत मेरे नाम को लेकर नहीं, बल्कि सभी जनप्रतिनिधियों के नाम को लेकर है। सबसे पहला विषय यह है कि इस पत्थर पर क्षेत्र के सांसद का नाम क्यों नहीं है। दूसरा ये कि क्रमवार अगर बात करें तो मुख्यमंत्री, नगर विकास मंत्री के बाद विधायकगणों, एमएलसी व मेयर आदि जनप्रतिनिधियों के नाम होने थे, मगर यहां सम्मान, प्रोटोकॉल आदि को दरकिनार कर पार्षदों व अधिकारियों को तवज्जो दी गई। यही आपत्ति दर्ज कराई। इसके लिए जिम्मेदार कौन है, इसका जवाब नहीं मिला है। - अनिल पाराशर, विधायक
- सब कुछ सामान्य ढंग से निपटा है। हां, लिपिकीय भूलवश निर्माण विभाग के अधिकारियों की अनदेखी के चलते क्रम गड़बड़ाया है। विधायक जी को आश्वस्त किया गया है कि पत्थर बदला जाएगा। इसके निर्देश दे दिए गए हैं। नया पत्थर बनवाकर वहां लगाया जाएगा। - अरुण कुमार गुप्ता, अपर नगर आयुक्त
पहले हमारी समस्याएं तो सुन लो, तब करना शुभारंभ
जिस समय नगर निगम के अधिकारी और सभी जनप्रतिनिधिगण वहां विद्युत लाइटों का शुभारंभ कर रहे थे। उसी समय देवी नगला की तमाम महिलाएं पहुंच गईं। उन्होंने वहां गंदगी, जलभराव आदि को लेकर हंगामा कर दिया। महिलाओं का कहना था कि पहले हमारी गली में जाकर समस्याएं देख लो, फिर ये शुभारंभ करना। इस पर नगर निगम के अधिकारियों ने महिलाओं से वार्ता कर उन्हें समझाया और कहा कि आपकी समस्या का समाधान करा दिया जाएगा। तभी महिलाएं वहां से हटीं।