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जनाजा देखकर कब्र खोदने वालों की आंखें हो रही नम

Wed, 28 Apr 2021 01:37 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 28 Apr 2021 01:37 AM IST
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Seeing Janaja, the eyes of the grave diggers are getting moist
इकराम वारिस, अलीगढ़।
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कब्रिस्तानों में कब्रों का खुदना और जनाजों के आने का सिलसिला थम नहीं रहा है। शहर के आठ कब्रिस्तानों में औसतन 35-40 जनाजा सुपुर्द-ए-खाक के लिए आ रहे हैं। यह मंजर देखकर कब्र खोदने वालों की भी आंखें नम हो जाती हैं।
सर सैयद नगर स्थित कब्रिस्तान में कब्र खोदने के काम जुटे असलम ने बताया कि वह अपनी जिंदगी में पहली बार इस तरह का मंजर देख रहे हैं, रोजाना 5-7 कब्रें खुद रही हैं। दो दिन पहले 16 कब्रें खुदी थीं। ज्यादा तादाद में कब्रें खोदने से उनके जिस्म की हड्डियाें तक में दर्द होने लगा है।
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सुबह से शुरू हुआ काम देर शाम तक चलता रहता है। साढ़े छह फिट लंबी, तीन-तीन फिट चौड़ी व गहरी कब्रें खोदी जा रही हैं। अलग-अलग कब्रिस्तानों में कब्र खोदने की कीमत अलग-अलग है। शाहजमाल कब्रिस्तान में कब्र खोदने की मजदूरी सात सौ रुपये हैं। वहीं, सर सैयद नगर में 15 सौ रुपये की मजदूरी है।
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शाहजमाल कब्रिस्तान में कब्र की खुदाई करने वाले अशफाक अहमद ने बताया कि यूं तो कब्रिस्तान में एक-दो जनाजा आते थे, लेकिन पिछले कई दिनों से इनकी तादाद में इजाफा हुआ है। शहर के आठ कब्रिस्तानों में औसतन 35-40 जनाजा सुपुर्द-ए-खाक के लिए आ रहे हैं। यह मंजर देखकर कब्र खोदने वालों की भी आंखें नम हो जाती हैं।
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