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सर्किल रेट पर संतुष्ट, विकासशील गांव पर आपत्ति
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एक अगस्त से लागू होने जा रहे नए सर्किल रेट की लिस्ट और विकासशील 14 ग्रामों की लिस्ट शुक्रवार को तहसील के रजिस्ट्री कार्यालयों में चस्पा कर दी गई। साथ ही लोगों से आपत्ति और दावे मांगे गए हैं। राजस्व अधिवक्ताओं ने नए सर्किल रेट की सूची में बढ़ोतरी न होने से उस पर तो सहमति जता दी है। मगर, विकासशील गांवों की सूची को लेकर उन्होंने अपना विरोध जताने की तैयारी कर ली है।
2020 की सूची में 14 गांवों को विकासशील घोषित किया गया है। इनमें भोजपुर, जटपुरा, तालिब नगर, अलहदादपुर, नारौली, भरतरी, करसुआ, ल्हौसरा बिसावन, हाजीपुर चौहट्टा, जतनपुर चिकावटी, इब्राहिमपुर, अजीतपुर आसना, भांकरी खास, खेड़ा खुशखबर शामिल हैं। राजस्व अधिवक्ता लोकेंद्र सिंह तोमर ने बताया कि इन गांवों में भोजपुर शहर से तकरीबन 15 किलोमीटर दूर है। तालीब नगर और नारौली तकरीबन 18 किलोमीटर दूर है। जटपुरा 13 किलोमीटर दूर है। विकास की बात करें तो इन गांव में दिल्ली हाईवे पर स्थित भरतरी, भांकरी खास जैसे एक दो गांव को छोड़ दिया जाए तो बाकी के गांव न तो स्टेट हाईवे के किनारे हैं और न ही नेशनल हाईवे के। यहां कोई बड़ी औद्योगिक इकाई भी स्थापित नहीं हैं। ऐसे में इन गांवों को क्यों शामिल किया गया है, इसको लेकर आपत्ति दाखिल की जाएगी।
सर्किल रेट भी बढ़ता है और दोगुना स्टांप भी खरीदना होता पड़ता है
राजस्व अधिवक्ता गिरीश राघव ने बताया कि विकासशील गांव की सूची में आने पर उक्त गांव की आबादी या रोड के किनारे वाली जमीन का सर्किल रेट बढ़ा दिया जाता है। यह नियम लागू कर दिया जाता है कि अगर कोई विकासशील गांव की सड़क किनारे या आबादी वाली जमीन का 1000 वर्ग मीटर या इससे कम का हिस्सा खरीदता है तो उसे सर्किल रेट के हिसाब से दोगुने दाम के स्टांप खरीदने होते हैं। इस कारण पहले से बढ़े सर्किल रेट और फिर दोगुने स्टांप की मार क्रेता पर पड़ती है।
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2020 की सूची में 14 गांवों को विकासशील घोषित किया गया है। इनमें भोजपुर, जटपुरा, तालिब नगर, अलहदादपुर, नारौली, भरतरी, करसुआ, ल्हौसरा बिसावन, हाजीपुर चौहट्टा, जतनपुर चिकावटी, इब्राहिमपुर, अजीतपुर आसना, भांकरी खास, खेड़ा खुशखबर शामिल हैं। राजस्व अधिवक्ता लोकेंद्र सिंह तोमर ने बताया कि इन गांवों में भोजपुर शहर से तकरीबन 15 किलोमीटर दूर है। तालीब नगर और नारौली तकरीबन 18 किलोमीटर दूर है। जटपुरा 13 किलोमीटर दूर है। विकास की बात करें तो इन गांव में दिल्ली हाईवे पर स्थित भरतरी, भांकरी खास जैसे एक दो गांव को छोड़ दिया जाए तो बाकी के गांव न तो स्टेट हाईवे के किनारे हैं और न ही नेशनल हाईवे के। यहां कोई बड़ी औद्योगिक इकाई भी स्थापित नहीं हैं। ऐसे में इन गांवों को क्यों शामिल किया गया है, इसको लेकर आपत्ति दाखिल की जाएगी।
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सर्किल रेट भी बढ़ता है और दोगुना स्टांप भी खरीदना होता पड़ता है
राजस्व अधिवक्ता गिरीश राघव ने बताया कि विकासशील गांव की सूची में आने पर उक्त गांव की आबादी या रोड के किनारे वाली जमीन का सर्किल रेट बढ़ा दिया जाता है। यह नियम लागू कर दिया जाता है कि अगर कोई विकासशील गांव की सड़क किनारे या आबादी वाली जमीन का 1000 वर्ग मीटर या इससे कम का हिस्सा खरीदता है तो उसे सर्किल रेट के हिसाब से दोगुने दाम के स्टांप खरीदने होते हैं। इस कारण पहले से बढ़े सर्किल रेट और फिर दोगुने स्टांप की मार क्रेता पर पड़ती है।
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