AMU: केसर-एलोवेरा से होगा डायबिटीज-दिल की बीमारियों से बचाव, एएमयू में चूहों पर रिसर्च रही सफल
चूहों पर किए गए प्रयोग में पाया गया कि क्रोसिन ने न केवल ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में मदद की, बल्कि खराब कोलेस्ट्रॉल को घटाया और अच्छा कोलेस्ट्रॉल बढ़ाया। लिवर, किडनी और पैंक्रियाज को नुकसान से बचाया। इंसुलिन स्तर में सुधार हुआ और ऑक्सीडेटिव तनाव कम हुआ है।
विस्तार
डायबिटीज और दिल की बीमारियों से बचाव के लिए केसर और और एलोवेरा एक प्राकृतिक ढाल बन सकते हैं। एएमयू के जेएन मेडिकल कॉलेज के बायोकेमेस्ट्री विभाग के शोध में चूहों पर किया गया इनका प्रयोग सफल रहा है। इनके मिश्रण के प्रयोग से ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में मदद मिली, साथ ही खराब कोलेस्ट्रॉल भी कम हुआ है।
प्रो. खुश्तर अनवर सलमान की देखरेख में मोहम्मद जावेद वानी ने तेजी से बढ़ रही डायबिटीज और दिल की बीमारियों को नियंत्रित करने के तरीके पर शोध किया है। पांच साल के अध्ययन में पाया गया है कि कुछ प्राकृतिक तत्व (फाइटोकेमिकल्स) शरीर को इन गंभीर बीमारियों के नुकसान से बचाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। शरीर में मौजूद खराब कोलेस्ट्रॉल यानी एलडीएल जब अधिक शुगर (डायबिटीज) के संपर्क में आता है, तो वह ग्लाइकेटेड एलडीएल (जी-एलडीएल) में बदल जाता है।
यह बदला हुआ एलडीएल शरीर में जमा होने लगता है, जो धीरे-धीरे दिल की बीमारियों, धमनियों में रुकावट (एथेरोस्क्लेरोसिस) और अन्य गंभीर समस्याओं का कारण बनता है। वैज्ञानिकों ने अध्ययन में केसर से मिलने वाले क्रोसिन, पौधों में पाए जाने वाले रुटिन और एलोवेरा से प्राप्त एलोइन प्राकृतिक तत्वों का परीक्षण किया। परिणाम बेहद उत्साहजनक रहे।
इन तत्वों ने शरीर में होने वाले नुकसान (ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस) को कम किया और कोशिकाओं को सुरक्षित रखने में मदद की। मानव रक्त कोशिकाओं पर किए गए परीक्षण में यह भी सामने आया कि जी-एलडीएल खून की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाकर उनकी ऑक्सीजन ले जाने की क्षमता घटा देता है, जिससे एनीमिया जैसी समस्या हो सकती है, लेकिन क्रोसिन के उपयोग से इस नुकसान में काफी कमी देखी गई।
इसी तरह चूहों पर किए गए प्रयोग में पाया गया कि क्रोसिन ने न केवल ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में मदद की, बल्कि खराब कोलेस्ट्रॉल को घटाया और अच्छा कोलेस्ट्रॉल बढ़ाया। लिवर, किडनी और पैंक्रियाज को नुकसान से बचाया। इंसुलिन स्तर में सुधार हुआ और ऑक्सीडेटिव तनाव कम हुआ है।
यह शोध न इलाज की नई दिशा दिखाता है। प्राकृतिक तत्वों के जरिये गंभीर बीमारियों से काफी हद तक बचाव संभव है।-उमर पीरजादा, पीआरओ, एएमयू
ये भी जानें
- क्रोसिन (केसर से प्राप्त): यह जी-एलडीएल से होने वाले ऑक्सीडेटिव तनाव को कम करता है। एलडीएल में होने वाले संरचनात्मक बदलाव (फाइब्रिलर एग्रीगेट्स) को रोकता है। एलडीएल की संरचना को सुरक्षित रखता है और मजबूती से जुड़कर उसे स्थिर बनाता है।
- रुटिन : एजीईएस के निर्माण को लगभग 80 फीसदी तक कम करता है। ऑक्सीडेटिव तनाव को घटाता है। एलडीएल की खराब संरचना को फिर से सामान्य बनाता है। कंप्यूटर आधारित अध्ययन में यह एलडीएल के साथ स्थिर रूप से जुड़ा पाया गया।
- एलोइन (एलोवेरा से): एजीईएस और हानिकारक संरचनाओं के बनने को कम करता है। ऑक्सीडेटिव नुकसान घटाता है। एलडीएल की संरचना को सुधारता है। एलडीएल के साथ मजबूत और स्थिर संबंध बनाता है।