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रूस-यूक्रेन युद्ध : रोमानिया की ठंड से बेहाल हो गईं बेटियां
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खारकीव हॉस्टल में अलीगढ़ की ऋषिता जादौन।
- फोटो : CITY OFFICE
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यूक्रेन पर रूस की सैन्य कार्रवाई से मेडिकल की पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों की मुसीबतें बढ़ती जा रहीं हैं। रोमानिया सीमा पर ठहरी अलीगढ़ की बेटी मिशिका एयरपोर्ट पहुंचने के लिए बस का इंतजार कर रही है, जबकि रिशिता समेत सैकड़ों विद्यार्थी अपने खारकीव स्थित हॉस्टल से निकलकर रेलवे स्टेशन पर फंस गए। अपने बच्चों को लेकर परिजन चिंतित हैं। एक-दूसरे को ढांढस बंधा रहे हैं। बृहस्पतिवार के भोर में अलीगढ़ के छात्रों के दिल्ली एयरपोर्ट पर आने की संभावना है।
यूक्रेन में एमबीबीएस तृतीय वर्ष की पढ़ाई कर रहीं मिशिका वार्ष्णेय की मां ममता वार्ष्णेय ने बताया कि मिशिका 24 घंटे पहले रोमानिया सीमा पर पहुंच गई थी। उन्हें सीमा पर बने टेंट में ठहराया गया, जहां खाने-पीने का इंतजाम है। मगर हाड़ कंपाने वाली ठंड से वह बेहाल है। हालांकि, टेंट में रुके विद्यार्थियों को टोपीदार जैकेट मुहैया कराई गई, जो ठंड में नाकाफी साबित हो रही है। दस बच्चों के समूह में रोमानिया का सिम दिया गया है, जिससे अलग-अलग समय पर अपने परिजनों से बात कर पा रही हैं। साकेत विहार कॉलोनी आगरा रोड निवासिनी ममता वार्ष्णेय ने कहा कि बुधवार को सुबह 11 बजे उनकी मिशिका से बात हुई थी। वह बस का इंतजार कर रही है, क्योंकि इसी बस से एयरपोर्ट पहुंचेंगी।
खारकीव नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी, यूक्रेन से एमबीबीएस प्रथम वर्ष कर रहीं रिशिता जादौन सात फरवरी 2022 को अलीगढ़ से यूक्रेन गई थीं। रिशिता की मां सुनीता सिंह ने बताया कि बुधवार दोपहर एक बजे तक बेटी खारकीव हॉस्टल में थी। यहां लगातार गोलाबारी की आवाजें आ रहीं थीं जिससे डर का माहौल बना हुआ है। वह अपने दोस्तों के साथ रेलवे स्टेशन पहुंची, लेकिन काफी भीड़ होने पर वह ट्रेन पर नहीं चढ़ सकी। रेलवे स्टेशन पर फंस गईं। उन्होंने कहा कि हॉस्टल में करीब 400 विद्यार्थी थे, जिन्हें दिन में एक वक्त का खाना मिलता था, क्योंकि खाद्य सामग्री तकरीबन खत्म हो चुकी है। गांधी नगर निवासी गोपालदास ने बताया कि उनकी बेटी खुशी यूक्रेन में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही है। वह रोमानिया के एयरपोर्ट बुखारेस्ट में बने शिविर में है। पांच-पांच शिविर में तकरीबन 10 हजार विद्यार्थी ठहरे हैं। उन्होंने कहा कि उम्मीद है कि बृहस्पतिवार को भोर में पांच-छह फ्लाइट भारत आ सकती हैं, जिसमें अलीगढ़ के विद्यार्थी हो सकते हैं।
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यूक्रेन में एमबीबीएस तृतीय वर्ष की पढ़ाई कर रहीं मिशिका वार्ष्णेय की मां ममता वार्ष्णेय ने बताया कि मिशिका 24 घंटे पहले रोमानिया सीमा पर पहुंच गई थी। उन्हें सीमा पर बने टेंट में ठहराया गया, जहां खाने-पीने का इंतजाम है। मगर हाड़ कंपाने वाली ठंड से वह बेहाल है। हालांकि, टेंट में रुके विद्यार्थियों को टोपीदार जैकेट मुहैया कराई गई, जो ठंड में नाकाफी साबित हो रही है। दस बच्चों के समूह में रोमानिया का सिम दिया गया है, जिससे अलग-अलग समय पर अपने परिजनों से बात कर पा रही हैं। साकेत विहार कॉलोनी आगरा रोड निवासिनी ममता वार्ष्णेय ने कहा कि बुधवार को सुबह 11 बजे उनकी मिशिका से बात हुई थी। वह बस का इंतजार कर रही है, क्योंकि इसी बस से एयरपोर्ट पहुंचेंगी।
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खारकीव नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी, यूक्रेन से एमबीबीएस प्रथम वर्ष कर रहीं रिशिता जादौन सात फरवरी 2022 को अलीगढ़ से यूक्रेन गई थीं। रिशिता की मां सुनीता सिंह ने बताया कि बुधवार दोपहर एक बजे तक बेटी खारकीव हॉस्टल में थी। यहां लगातार गोलाबारी की आवाजें आ रहीं थीं जिससे डर का माहौल बना हुआ है। वह अपने दोस्तों के साथ रेलवे स्टेशन पहुंची, लेकिन काफी भीड़ होने पर वह ट्रेन पर नहीं चढ़ सकी। रेलवे स्टेशन पर फंस गईं। उन्होंने कहा कि हॉस्टल में करीब 400 विद्यार्थी थे, जिन्हें दिन में एक वक्त का खाना मिलता था, क्योंकि खाद्य सामग्री तकरीबन खत्म हो चुकी है। गांधी नगर निवासी गोपालदास ने बताया कि उनकी बेटी खुशी यूक्रेन में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही है। वह रोमानिया के एयरपोर्ट बुखारेस्ट में बने शिविर में है। पांच-पांच शिविर में तकरीबन 10 हजार विद्यार्थी ठहरे हैं। उन्होंने कहा कि उम्मीद है कि बृहस्पतिवार को भोर में पांच-छह फ्लाइट भारत आ सकती हैं, जिसमें अलीगढ़ के विद्यार्थी हो सकते हैं।
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