बढ़ती ठंड और कोरोना ने इन-दिनों रोडवेज बसों के पहिये थाम दिए हैं। बसों से सफर करने के लिए पर्याप्त संख्या में बस अड्डों पर यात्री नहीं पहुंच रहे हैं। ऐसे में चालक-परिचालक आवाज लगाकर जैसे तैसे कुछ सवारियां बैठाते हैं। तब जाकर अपने गंतव्य के लिए निकलते हैं। भीड़ न होने का एक कारण रुके हुए सहालग भी हैं, जबकि दिसंबर में लोगों की इतनी भीड़ उमड़ रही थी कि अधिकारी बस उपलब्ध नहीं करा पा रहे थे।
बता दें कि दिसंबर महीने में शहर के गांधी पार्क बस अड्डा, मसूदाबाद बस अड्डा और सारसौल बस अड्डे पर इतने यात्री उमड़ रहे थे कि देखते ही देखते मिनटों में रोडवेज बस फुल भर जाती थीं और अपने गंतव्य के लिए रवाना हो जाती थीं। दोपहर तक को हालत यह रहती कि सभी बस रूट पर दौड़ती रहती और यात्री बस अड्डों पर इंतजार करते रहे। घंटों के इंतजार के बाद बस आती तो सीट पाने के लिए मारामारी रहती। सबसे ज्यादा दिक्कत मथुरा, आगरा, कानपुर, एटा, फर्रुखाबाद, कासगंज, मुरादाबाद के रूटों पर थी, लेकिन जनवरी महीने में बढ़ रही ठंड और कोरोना संक्रमण का प्रसार तेज होने के चलते लोग अब सार्वजनिक वाहनों से सफर करने के लिए कतराने लगे हैं। आसपास के जिले और शहर में जाने के लिए लोग अपने वाहनों को तवज्जो दे रहे हैं, जबकि इन दिनों सहालग भी नहीं हैं, इसलिए भी भीड़ नहीं उमड़ रही। इसका असर रोडवेज बसों के संचालन पर देखने को मिल रहा है। बस चालक और परिचालक किसी तरह घंटों में सवारियों को भर पा रहे हैं। परिचालक 25 सवारियों को बैठाने के लिए घंटो तक पसीना बहाते हैं। तब जाकर बस को लेकर रवाना होते हैं। इस संबंध में बुद्धविहार डिपो के सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक ने बताया कि सहालग न होने की वजह से भी यात्रियों का आवागमन नहीं हो रहा है। हालांकि बढ़ी हुई ठंड और कोरोना भी एक वजह हो सकती है।