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चौथी बार केकेआर का हिस्सा होंगे रिंकू सिंह
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अर्जुन सिंह फकीरा
- फोटो : CITY OFFICE
जिले के बाएं हाथ के बल्लेबाज रिंकू सिंह लगातार चौथी बार केकेआर (कोलकाता नाइट राइडर्स) का हिस्सा होंगे। रिंकू के लगातार तीसरी बार रिटेन होने की खबर से खेल प्रेमियों व खिलाड़ियों में खुशी की लहर दौड़ गई है।
आईपीएल के 14वें संस्करण के लिए बुधवार को आईपीएल की टीमों ने अपने खिलाड़ियों को रिलीज व रिटेन किया। इस कड़ी में केकेआर ने रिंकू सिंह को एक बार फिर अपनी टीम से जोड़े रखा। आईपीएल के 11वें संस्करण में केकेआर ने रिंकू को 80 लाख रुपये में खरीदा था। रिटेन की सूरत में रिंकू को पिछली बार की रकम 80 लाख रुपये इस बार भी मिलेंगे। किंग्स इलेवन पंजाब ने आईपीएल के 10वें संस्करण में 10 लाख रुपये में खरीदा था। रिंकू सिंह इन-दिनों सैयद मुश्ताक अली ट्र्रॉफी में उत्तर प्रदेश टीम का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। रिंकू ने उत्तर प्रदेश की तरफ से खेलते हुए रणजी ट्रॉफी 2018-19 में उत्तर प्रदेश की ओर से सर्वाधिक रन बनाए थे। देश में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाजों की सूची में रिंकू सिंह का नाम दूसरे नंबर पर था। आईपीएल के 13वें संस्करण में रिंकू को एक मैच में मौका मिला थाए, लेकिन वह सस्ते में आउट हो गए थे। रिंकू के केकेआर में चौथी बार चुने जाने पर जादौन राइडर्स के निदेशक अर्जुन सिंह फकीरा, कोच मसूदुज्जफर अमीनी व अलीगढ़ क्रिकेट स्कूल के खिलाड़ियों ने खुशी जाहिर की है।
विजय हजारे ट्रॉफी में किया था बेहतरीन प्रदर्शन
अलीगढ़। 2015-16 में खेली गई विजय हजारे ट्रॉफी में रिंकू सिंह ने भारतीय गेंदबाज आर. अश्विन व एल. बालाजी की गेंदों को सीमा रेखा के पार पहुंचाते हुए अपना अर्धशतक पूरा किया। यही वजह रही है कि आईपीएल-11 में रिंकू को खरीदने के लिए कोलकाता नाइट राइडर्स व मुंबई इंडियंस के बीच काफी देर तक जद्दोजहद हुई, लेकिन आखिरकार कोलकाता ने रिंकू को 80 लाख रुपये की बोली लगाकर अपने साथ जोड़ा। रिंकू 2009 से क्रिकेट खेल रहे हैं। 2012 में उनका चयन अंडर 16 टीम में हुआ। इसके बाद उन्हें अंडर 19 टीम की तरफ से भी खेलने का मौका मिला।
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जिंदगी के पहले मैच में लगाई थी हॉफ सेंचुरी
अलीगढ़। रिंकू सिंह ने मॉडर्न कान्वेंट स्कूल की तरफ से खेलते हुए अपनी जिंदगी के पहले मैच में पहली अर्ध शतक लगाया था। दूसरे मैच में भी उन्होंने अर्ध शतक लगाया था। तीसरे मैच में जैसे ही रिंकू ने शतक जड़ा, वैसे ही उनकी बल्लेबाजी को लेकर क्रिकेट के गलियारों में चर्चाएं होने लगीं। पहले रिंकू कैनवस बॉल से क्रिकेट खेलते थे। रिंकू की बल्लेबाजी से प्रभावित होकर अर्जुन सिंह फकीरा ने उनको अपने जादौन राइडर्स क्लब से जोड़ लिया। पढ़ाई के लिए रिंकू सिंह ने डीपीएस में दाखिला भी ले लिया था। डीपीएस के स्कूल वर्ल्ड कप में रिंकू ने शानदार प्रदर्शन किया और वह मैन ऑफ दी टूर्नामेंट बने। फाइनल मैच में मुख्य अतिथि के तौर पर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के उपाध्यक्ष व यूपीसीए के सचिव राजीव शुक्ला ने रिंकू की बल्लेबाजी को सराहा। दोबारा फिर रिंकू सिंह क्लब से जुड़ गए।
पिता खानचंद्र घर-घर बांटते हैं सिलिंडर
अलीगढ़। रिंकू के आईपीएल तक पहुंचने का सफर दुश्वारियों से भरा रहा है। रिंकू के पिता खानचंद्र सिंह लोगों के घरों में सिलिंडर की डिलीवरी करते हैं। रिंकू का सात लोगों का परिवार है। रिंकू का परिवार आर्थिक तंगी से गुजर रहा था, लेकिन यह तंगी रिंकू के लिए संबल बनी रही। रिंकू ने इस तंगी को अपनी बल्लेबाजी से दूर कर दिया। आईपीएल व रणजी मैच से मिलने वाली फीस से उनके घर की बदहाली अब खुशहाली में बदल गई है।
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आईपीएल के 14वें संस्करण के लिए बुधवार को आईपीएल की टीमों ने अपने खिलाड़ियों को रिलीज व रिटेन किया। इस कड़ी में केकेआर ने रिंकू सिंह को एक बार फिर अपनी टीम से जोड़े रखा। आईपीएल के 11वें संस्करण में केकेआर ने रिंकू को 80 लाख रुपये में खरीदा था। रिटेन की सूरत में रिंकू को पिछली बार की रकम 80 लाख रुपये इस बार भी मिलेंगे। किंग्स इलेवन पंजाब ने आईपीएल के 10वें संस्करण में 10 लाख रुपये में खरीदा था। रिंकू सिंह इन-दिनों सैयद मुश्ताक अली ट्र्रॉफी में उत्तर प्रदेश टीम का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। रिंकू ने उत्तर प्रदेश की तरफ से खेलते हुए रणजी ट्रॉफी 2018-19 में उत्तर प्रदेश की ओर से सर्वाधिक रन बनाए थे। देश में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाजों की सूची में रिंकू सिंह का नाम दूसरे नंबर पर था। आईपीएल के 13वें संस्करण में रिंकू को एक मैच में मौका मिला थाए, लेकिन वह सस्ते में आउट हो गए थे। रिंकू के केकेआर में चौथी बार चुने जाने पर जादौन राइडर्स के निदेशक अर्जुन सिंह फकीरा, कोच मसूदुज्जफर अमीनी व अलीगढ़ क्रिकेट स्कूल के खिलाड़ियों ने खुशी जाहिर की है।
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विजय हजारे ट्रॉफी में किया था बेहतरीन प्रदर्शन
अलीगढ़। 2015-16 में खेली गई विजय हजारे ट्रॉफी में रिंकू सिंह ने भारतीय गेंदबाज आर. अश्विन व एल. बालाजी की गेंदों को सीमा रेखा के पार पहुंचाते हुए अपना अर्धशतक पूरा किया। यही वजह रही है कि आईपीएल-11 में रिंकू को खरीदने के लिए कोलकाता नाइट राइडर्स व मुंबई इंडियंस के बीच काफी देर तक जद्दोजहद हुई, लेकिन आखिरकार कोलकाता ने रिंकू को 80 लाख रुपये की बोली लगाकर अपने साथ जोड़ा। रिंकू 2009 से क्रिकेट खेल रहे हैं। 2012 में उनका चयन अंडर 16 टीम में हुआ। इसके बाद उन्हें अंडर 19 टीम की तरफ से भी खेलने का मौका मिला।
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जिंदगी के पहले मैच में लगाई थी हॉफ सेंचुरी
अलीगढ़। रिंकू सिंह ने मॉडर्न कान्वेंट स्कूल की तरफ से खेलते हुए अपनी जिंदगी के पहले मैच में पहली अर्ध शतक लगाया था। दूसरे मैच में भी उन्होंने अर्ध शतक लगाया था। तीसरे मैच में जैसे ही रिंकू ने शतक जड़ा, वैसे ही उनकी बल्लेबाजी को लेकर क्रिकेट के गलियारों में चर्चाएं होने लगीं। पहले रिंकू कैनवस बॉल से क्रिकेट खेलते थे। रिंकू की बल्लेबाजी से प्रभावित होकर अर्जुन सिंह फकीरा ने उनको अपने जादौन राइडर्स क्लब से जोड़ लिया। पढ़ाई के लिए रिंकू सिंह ने डीपीएस में दाखिला भी ले लिया था। डीपीएस के स्कूल वर्ल्ड कप में रिंकू ने शानदार प्रदर्शन किया और वह मैन ऑफ दी टूर्नामेंट बने। फाइनल मैच में मुख्य अतिथि के तौर पर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के उपाध्यक्ष व यूपीसीए के सचिव राजीव शुक्ला ने रिंकू की बल्लेबाजी को सराहा। दोबारा फिर रिंकू सिंह क्लब से जुड़ गए।
पिता खानचंद्र घर-घर बांटते हैं सिलिंडर
अलीगढ़। रिंकू के आईपीएल तक पहुंचने का सफर दुश्वारियों से भरा रहा है। रिंकू के पिता खानचंद्र सिंह लोगों के घरों में सिलिंडर की डिलीवरी करते हैं। रिंकू का सात लोगों का परिवार है। रिंकू का परिवार आर्थिक तंगी से गुजर रहा था, लेकिन यह तंगी रिंकू के लिए संबल बनी रही। रिंकू ने इस तंगी को अपनी बल्लेबाजी से दूर कर दिया। आईपीएल व रणजी मैच से मिलने वाली फीस से उनके घर की बदहाली अब खुशहाली में बदल गई है।