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जेएन मेडिकल कॉलेज में ब्लैक फंगस पर चल रहा है शोध कार्य
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अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के जेएन मेडिकल कॉलेज में ब्लैक फंगस पर शोध कार्य चल रहा है। साथ ही मेडिकल कॉलेज इस संबंध में आने वाली चुनौतियों के लिए भी स्वयं को तैयार कर रहा है। यह बात विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर तारिक मंसूर ने कही।
वह डॉ. जियाउद्दीन अहमद डेंटल कालेज के ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल सर्जरी विभाग तथा एसोसिएशन ऑफ ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल सर्जन ऑफ इंडिया, यूपी चैप्टर के संयुक्त तत्वावधान में म्यूकर्मिकोसिस: ए पोस्ट कोविड सिक्वेला विषय पर पर अंतरराष्ट्रीय पैनल चर्चा में संबोधन कर रहे थे। कुलपति प्रोफेसर तारिक मंसूर ने कहा कि यह चिकित्सा बिरादरी के लिए स्टेरॉयड नए नहीं हैं। इनका उपयोग कई वर्षों से अर्थराइटिस के इलाज के लिए किया जाता रहा है, लेकिन हमने कभी म्यूकोर्मिकोसिस का मामला नहीं देखा।
प्रोफेसर मंसूर ने कहा कि ब्लैक फंगस के प्रबंधन के लिए प्राथमिक दवा एम्फोटेरिसिन बी अधिक मात्रा में खरीदने की कोशिश कर रहे हैं। प्रोफेसर मोहम्मद शमीम ने कहा कि लंबे समय तक स्टेरॉयड लेने वाले तथा मधुमेह से पीड़ित रोगी और ह्यूमिडिफायर में दूषित पानी के माध्यम से ऑक्सीजन के बढ़ते प्रवाह वाले रोगी अधिक ख़तरे में हैं। प्रो. आदित्य मिश्रा ने कंट्रास्ट सीटी के स्तर को निर्धारित करने के लिए परानासल साइनस और बेस स्कल के कंट्रास्ट एमआरआई के उपयोग की सलाह दी। डॉ. आशीष चंद्रा ने नेजल एंडोस्कोपी के बारे में बताया। प्रोफेसर सैयद जिया-उर-रहमान ने ऐंटिफंगल दवाओं के उपयोग और उपचार पर चर्चा की, जबकि प्रोफेसर हिमांशु रेड्डी ने एम्फोटेरिसिन बी के औषधीय पहलुओं पर चर्चा की। डेंटल कॉलेज के प्रिंसिपल प्रोफेसर आरके तिवारी ने स्वागत भाषण दिया। संचालन डॉ. तबीश-उर-रहमान ने किया।
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वह डॉ. जियाउद्दीन अहमद डेंटल कालेज के ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल सर्जरी विभाग तथा एसोसिएशन ऑफ ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल सर्जन ऑफ इंडिया, यूपी चैप्टर के संयुक्त तत्वावधान में म्यूकर्मिकोसिस: ए पोस्ट कोविड सिक्वेला विषय पर पर अंतरराष्ट्रीय पैनल चर्चा में संबोधन कर रहे थे। कुलपति प्रोफेसर तारिक मंसूर ने कहा कि यह चिकित्सा बिरादरी के लिए स्टेरॉयड नए नहीं हैं। इनका उपयोग कई वर्षों से अर्थराइटिस के इलाज के लिए किया जाता रहा है, लेकिन हमने कभी म्यूकोर्मिकोसिस का मामला नहीं देखा।
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प्रोफेसर मंसूर ने कहा कि ब्लैक फंगस के प्रबंधन के लिए प्राथमिक दवा एम्फोटेरिसिन बी अधिक मात्रा में खरीदने की कोशिश कर रहे हैं। प्रोफेसर मोहम्मद शमीम ने कहा कि लंबे समय तक स्टेरॉयड लेने वाले तथा मधुमेह से पीड़ित रोगी और ह्यूमिडिफायर में दूषित पानी के माध्यम से ऑक्सीजन के बढ़ते प्रवाह वाले रोगी अधिक ख़तरे में हैं। प्रो. आदित्य मिश्रा ने कंट्रास्ट सीटी के स्तर को निर्धारित करने के लिए परानासल साइनस और बेस स्कल के कंट्रास्ट एमआरआई के उपयोग की सलाह दी। डॉ. आशीष चंद्रा ने नेजल एंडोस्कोपी के बारे में बताया। प्रोफेसर सैयद जिया-उर-रहमान ने ऐंटिफंगल दवाओं के उपयोग और उपचार पर चर्चा की, जबकि प्रोफेसर हिमांशु रेड्डी ने एम्फोटेरिसिन बी के औषधीय पहलुओं पर चर्चा की। डेंटल कॉलेज के प्रिंसिपल प्रोफेसर आरके तिवारी ने स्वागत भाषण दिया। संचालन डॉ. तबीश-उर-रहमान ने किया।
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