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AMU: शोध में हुआ खुलासा, आधे-अधूरे ज्ञान के साथ मैदान में उतर रहे भविष्य के पीटीआई, डिग्री तो मिली कौशल नहीं

Mon, 04 May 2026 03:57 PM IST
Chaman Kumar Sharma अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़ Published by: Chaman Kumar Sharma Updated Mon, 04 May 2026 03:57 PM IST
सार

शारीरिक शिक्षा विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सैयद खुर्रम निसार के निर्देशन में शोधार्थी लोकेश राघव ने इस शोध में भारत के पांच क्षेत्रों से 76 नवोदित शारीरिक शिक्षा शिक्षकों और 10 स्कूल प्रधानाचार्यों के अनुभव शामिल किए गए।

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Research on Physical Education Teacher at AMU
एएमयू - फोटो : संवाद

विस्तार

डिग्री तो मिली कौशल नहीं, आधे-अधूरे ज्ञान के साथ फिजिकल ट्रेनिंग इंस्ट्रक्टर (पीटीआई) यानी शारीरिक शिक्षा शिक्षक मैदान में उतर रहे हैं। व्यावहारिक ज्ञान न होने से नौकरी मिलते ही उन्हें जोर का झटका लग रहा है। किताबी ज्ञान और नौकरी की जरूरत व दायित्व से सामना होते ही उनके सपने टूट रहे हैं। यह खुलासा एएमयू के शारीरिक शिक्षा विभाग के एक अहम शोध में हुआ है।

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शारीरिक शिक्षा विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सैयद खुर्रम निसार के निर्देशन में शोधार्थी लोकेश राघव ने इस शोध में भारत के पांच क्षेत्रों से 76 नवोदित शारीरिक शिक्षा शिक्षकों और 10 स्कूल प्रधानाचार्यों के अनुभव शामिल किए गए। इसमें चौकाने वाला तथ्य यह सामने आया है कि बीपीएड पाठ्यक्रम और स्कूलों की वास्तविक नौकरी के दायित्व के बीच बड़ा अंतर है। 
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शिक्षक प्रशिक्षण के दौरान दिया जाने वाला ज्ञान स्कूलों में जरूरी व्यावहारिक कौशल, तकनीकी दक्षता, संचार क्षमता, छात्र प्रबंधन और आधुनिक शिक्षा नीतियों की आवश्यकताओं से पूरी तरह से मेल नहीं खाता है। शोध में सामने आया है कि नए शिक्षक के लिए पाठ्यक्रम, मूल्यांकन, व्यवहार प्रबंधन, फर्स्ट एड, एडटेक और समन्वय जैसे महत्वपूर्ण कार्यों के लिए पर्याप्त रूप से तैयार नहीं हैं। इसमें मांग के हिसाब से कोर्स बनाने पर जोर दिया गया।

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सिर्फ बीपीएड ही नहीं, बल्कि हर कोर्स और प्रोग्राम को ऐसे डिजाइन किया जाना चाहिए, नौकरी की वास्ताविक जरूरत के अनुसार हो। विद्यार्थियों को नौकरी के दौरान जानकारी नहीं होने के कारण झटका न लगे। इंडस्ट्री की मांग को पूरा करने के लिए एकेडमिक व्यवस्था में व्यापक बदलाव की जरूरत है। इंडस्ट्री की मांग के हिसाब से कोर्स और प्रोग्राम की डिजाइन की जानी चाहिए।-डॉ. सैयद खुर्रम निसार, असिस्टेंट प्रोफेसर, शारीरिक शिक्षा, एएमयू


मॉडल विकसित
शोध के आधार पर शोधकर्ता ने कंसेक्यूटिव जोन्स ऑफ रियलिटी शॉक नामक मॉडल विकसित किया है, जो बताता है कि यह झटका शिक्षक के बीपीएड में प्रवेश से शुरू होकर स्कूल-नौकरी तक अलग-अलग चरणों में जारी रहता है।

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