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ग्रामीण क्षेत्र के हर मरीज का ऑनलाइन दर्ज होगा रिकार्ड
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कौशल कुमार ओझा
ग्रामीण क्षेत्र में यदि किसी व्यक्ति को सर्दी, जुकाम या कोई अन्य बीमारी होती है तो अब उसका रिकार्ड ऑनलाइन दर्ज किया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी मरीज के इलाज, मर्ज की पहचान और उसकी रोकथाम की प्रक्रिया पर नजर रखेंगे ताकि बीमारी (संक्रामक या असामान्य बीमारी) को बढ़ने से रोका जा सके। इसके लिए इंटीग्रेटेड हेल्थ इनफॉरमेशन प्लेटफार्म (आईएचआईपी) शुरू हो रहा है। इस प्लेटफार्म पर एएनएम मरीज का नाम, पता, लक्षण एवं अन्य सूचनाएं दर्ज करेंगी।
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने आईएचआईपी की शुरूआत की है। यह इंट्रीग्रेटेड डिजीज सर्विलांस प्रोग्राम (आईडीएसपी) का विकसित रूप है। इस प्रोग्राम के तहत जिले में पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट के रूप में डॉ. रोहित गोयल की नियुक्ति की गई है। सभी 12 ब्लॉकों में एक-एक डाटा एंट्री ऑपरेटर रखने की प्रक्रिया चल रही है। सभी ब्लॉकों को कंप्यूटर एवं अन्य उपकरण दिए जाएंगे। जिले में 333 एएनएम को टैबलेट के साथ-साथ प्रशिक्षण दिया गया है। ग्राम एवं फैसिलिटी मैपिंग का कार्य पूरा हो गया है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी कोशिश कर रहे हैं कि रियल टाइम रिपोर्टिंग 15 जुलाई के पहले शुरू हो जाए।
इंटीग्रेटेड हेल्थ इनफॉरमेशन प्लेटफार्म स्वास्थ्य विभाग में क्रांतिकारी कदम साबित होगा। किसी भी बीमारी या महामारी का पता तुरंत चल जाएगा। भविष्य में प्राइवेट एवं कॉरपोरेट अस्पतालों को भी इससे जोड़ना है। 15 जुलाई के पहले इसे शुरू करने का प्रयास किया जा रहा है। 33 तरह की बीमारियों पर नजर रखी जाएगी।
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- डॉ. दवेंद्र वार्ष्णेय, मंडलीय सर्विलांस अधिकारी
एएनएम दर्ज करेंगी सूचनाएं
एएनएम सब सेंटर या गांव में विजिट के समय मरीज का नाम, पता, लक्षण एवं अन्य सूचनाएं दर्ज करेंगी। लक्षण के आधार पर मरीज को दवा देंगी। जरूरत पड़ेगी तो सीएचसी में जाकर दिखाने की सलाह देंगी। मरीज जब सीएचसी जाएगा तो पोर्टल के माध्यम से चिकित्सक को पता होगा कि मरीज को कब से कौन सी बीमारी है। चिकित्सक अगर जांच कराता हैं तो उसकी रिपोर्ट भी मरीज के विवरण के साथ पोर्टल पर अपलोड की जाएगी।
इन बीमारियों पर रहेगी नजर
जुकाम, बुखार, डायरिया, मीजल्स, मलेरिया, सांस से संबंधित बीमारी, निमोनिया, संक्रमण, टाइफाइड, डेंगू, चिकनगुनिया, जिका वायरस, हेपेटाइटिस, चिकन पॉक्स, चेचक, हैजा, पोलियो, येलो फीवर, प्लेग, रूबेला, संक्रामक बीमारी समेत कुल 33 बीमारियों पर नजर रखी जाएगी।
स्वास्थ्य सेवाओं की रिपोर्टिंग की जियो टैगिंग होगी
पहले आईडीएसपी में सप्ताह में एक दिन रिपोर्टिंग पेपर पर होती थी जबकि आईएचआईपी में प्रत्येक दिन टैबलेट के माध्यम से रिपोर्टिंग होगी। इसमें डाटा सुरक्षित रखने के साथ ही विश्लेषण की भी सुविधा है। भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) की वजह से पोर्टल पर रोगियों के गांव एवं स्वास्थ्य केंद्रों को भी देख सकते हैं। स्वास्थ्य सुविधाओं की रिपोर्टिंग की जियो टैगिंग होगी।
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ग्रामीण क्षेत्र में यदि किसी व्यक्ति को सर्दी, जुकाम या कोई अन्य बीमारी होती है तो अब उसका रिकार्ड ऑनलाइन दर्ज किया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी मरीज के इलाज, मर्ज की पहचान और उसकी रोकथाम की प्रक्रिया पर नजर रखेंगे ताकि बीमारी (संक्रामक या असामान्य बीमारी) को बढ़ने से रोका जा सके। इसके लिए इंटीग्रेटेड हेल्थ इनफॉरमेशन प्लेटफार्म (आईएचआईपी) शुरू हो रहा है। इस प्लेटफार्म पर एएनएम मरीज का नाम, पता, लक्षण एवं अन्य सूचनाएं दर्ज करेंगी।
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने आईएचआईपी की शुरूआत की है। यह इंट्रीग्रेटेड डिजीज सर्विलांस प्रोग्राम (आईडीएसपी) का विकसित रूप है। इस प्रोग्राम के तहत जिले में पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट के रूप में डॉ. रोहित गोयल की नियुक्ति की गई है। सभी 12 ब्लॉकों में एक-एक डाटा एंट्री ऑपरेटर रखने की प्रक्रिया चल रही है। सभी ब्लॉकों को कंप्यूटर एवं अन्य उपकरण दिए जाएंगे। जिले में 333 एएनएम को टैबलेट के साथ-साथ प्रशिक्षण दिया गया है। ग्राम एवं फैसिलिटी मैपिंग का कार्य पूरा हो गया है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी कोशिश कर रहे हैं कि रियल टाइम रिपोर्टिंग 15 जुलाई के पहले शुरू हो जाए।
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इंटीग्रेटेड हेल्थ इनफॉरमेशन प्लेटफार्म स्वास्थ्य विभाग में क्रांतिकारी कदम साबित होगा। किसी भी बीमारी या महामारी का पता तुरंत चल जाएगा। भविष्य में प्राइवेट एवं कॉरपोरेट अस्पतालों को भी इससे जोड़ना है। 15 जुलाई के पहले इसे शुरू करने का प्रयास किया जा रहा है। 33 तरह की बीमारियों पर नजर रखी जाएगी।
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- डॉ. दवेंद्र वार्ष्णेय, मंडलीय सर्विलांस अधिकारी
एएनएम दर्ज करेंगी सूचनाएं
एएनएम सब सेंटर या गांव में विजिट के समय मरीज का नाम, पता, लक्षण एवं अन्य सूचनाएं दर्ज करेंगी। लक्षण के आधार पर मरीज को दवा देंगी। जरूरत पड़ेगी तो सीएचसी में जाकर दिखाने की सलाह देंगी। मरीज जब सीएचसी जाएगा तो पोर्टल के माध्यम से चिकित्सक को पता होगा कि मरीज को कब से कौन सी बीमारी है। चिकित्सक अगर जांच कराता हैं तो उसकी रिपोर्ट भी मरीज के विवरण के साथ पोर्टल पर अपलोड की जाएगी।
इन बीमारियों पर रहेगी नजर
जुकाम, बुखार, डायरिया, मीजल्स, मलेरिया, सांस से संबंधित बीमारी, निमोनिया, संक्रमण, टाइफाइड, डेंगू, चिकनगुनिया, जिका वायरस, हेपेटाइटिस, चिकन पॉक्स, चेचक, हैजा, पोलियो, येलो फीवर, प्लेग, रूबेला, संक्रामक बीमारी समेत कुल 33 बीमारियों पर नजर रखी जाएगी।
स्वास्थ्य सेवाओं की रिपोर्टिंग की जियो टैगिंग होगी
पहले आईडीएसपी में सप्ताह में एक दिन रिपोर्टिंग पेपर पर होती थी जबकि आईएचआईपी में प्रत्येक दिन टैबलेट के माध्यम से रिपोर्टिंग होगी। इसमें डाटा सुरक्षित रखने के साथ ही विश्लेषण की भी सुविधा है। भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) की वजह से पोर्टल पर रोगियों के गांव एवं स्वास्थ्य केंद्रों को भी देख सकते हैं। स्वास्थ्य सुविधाओं की रिपोर्टिंग की जियो टैगिंग होगी।