रामलीला मैदान में श्री रामलीला गोशाला समिति द्वारा आयोजित रामलीला महोत्सव में कलाकारों ने कुंभकरण व मेघनाद वध की लीला का मंचन किया। इससे पहले अंगद-रावण संवाद सुनकर दर्शक गदगद हो गए। लीला का शुभारंभ रामादल से होता है। युद्ध टालने के उद्देश्य से अंगद को रावण दरबार में भेजा जाता है।
लेकिन रावण अपनी शेखी का बखान करता है। इस पर अंगद कहते हैं कि कई रावणों के बारे में सुना है। एक रावण को तो पिता बालि ने छह महीने कांख में रखा था। तुम कौन से रावण हो। इसके बाद अंगद सभा में अपने पैर को पृथ्वी पर जमाकर कहते हैं कि जो योद्धा पैर को उठा देगा। प्रभु श्रीराम बिना युद्ध के चले जाएंगे। दरबार के योद्धा अंगद के पैर को हिला नहीं सके तो रावण स्वयं पैर उठाने के लिए खड़ा होता है। इस पर अंगद कहते हैं कि मेरे पैरों की जगह श्री राम के पैरों को पकड़ो। निश्चित ही भला होगा। इसके बाद युद्ध शुरू होता है। लीला में कुंभकरण व मेघनाद वध का मंचन होता है। इस मौके पर लीला संयोजक अरविंद कुमार, अमित अग्रवाल, टीएन मित्तल, ऋषभ गर्ग, सर्वेश कुमार, संयम पाराशर आदि मौजूद रहे।