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33 साल बाद रामायण ‘दर्शन’, अलीगढ़ के संगीतकार रविंद्र जैन के सुनेंगे भजन
Fri, 27 Mar 2020 06:45 PM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़
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Published by: अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 27 Mar 2020 06:45 PM IST
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मशहूर संगीतकार रविंद्र जैन के साथ तबला वादक सरताज।
- फोटो : CITY OFFICE
वर्ष 1987 में जब रविवार सुबह साढ़े नौ बजे टीवी पर रामायण दिखाई जाती थी तो उस वक्त शहर की सड़कों और गलियों में सन्नाटा हो जाता था। एक तरह का पूरा लॉकडाउन। अब एक बार फिर रामायाण दिखाई जाएगी, लेकिन इस बार लॉकडाउन के कारण।
अलीगढ़ और रामानंद सागर की इस रामायण का बहुत गहरा नाता है। जिसकी कड़ी हैं संगीतकार, गीतकार और गायक रविंद्र जैन।
एक अमर आवाज और कर्णप्रिय संगीत देने वाला संगीतकार, जो आज भी घर-घर में किसी न किसी तराने के साथ दिल दिमाग में गूंजता रहता है। कभी रामायण के भजनों के रूप में तो कभी किसी फिल्मी तराने के रूप में।
केंद्र सरकार ने वर्तमान में पूरे देश में जारी लॉकडाउन के कारण घर में कैद लोगों के लिए रामायण का प्रसारण फिर से कराने का फैसला किया है। ये प्रसारण शनिवार 28 मार्च से दिन में दो बार होगा। पहला सुबह साढ़े नौ बजे और दूसरा रात नौ बजे।
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अलीगढ़ और रामानंद सागर की इस रामायण का बहुत गहरा नाता है। जिसकी कड़ी हैं संगीतकार, गीतकार और गायक रविंद्र जैन।
एक अमर आवाज और कर्णप्रिय संगीत देने वाला संगीतकार, जो आज भी घर-घर में किसी न किसी तराने के साथ दिल दिमाग में गूंजता रहता है। कभी रामायण के भजनों के रूप में तो कभी किसी फिल्मी तराने के रूप में।
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केंद्र सरकार ने वर्तमान में पूरे देश में जारी लॉकडाउन के कारण घर में कैद लोगों के लिए रामायण का प्रसारण फिर से कराने का फैसला किया है। ये प्रसारण शनिवार 28 मार्च से दिन में दो बार होगा। पहला सुबह साढ़े नौ बजे और दूसरा रात नौ बजे।
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एक दिन में इसके दो एपिसोड दिखाए जाएंगे। 78 एपिसोड का ये सीरीयल 39 दिनों में दिखाया जाएगा।इसका प्रसारण दूरदर्शन पर होगा, ताकि सभी दर्शक इसका आनंद उठा सकेें। इसके साथ ही बीआर चोपड़ा के सीरीयल ‘महाभारत’ को भी दोबारा से दिखाए जाने की तैयारी हो रही है।
कुछ दर्शकों ने कहा है कि अयोध्या में रामलला विराजमान का बहुचर्चित मंदिर बनने जा रहा है, इसलिए केंद्र सरकार देश में राम नाम का माहौल बनाने के लिए ऐसा कर रही है। बहरहाल, कारण लॉकडाउन हो या फिर रामलला।
नवरात्र में घर में बैठे करोड़ों दर्शकों के लिए रामायण का प्रसारण किसी तोहफे से कम नहीं है। विशेष रूप से अलीगढ़ वालों के लिए ये पुरानी यादों को ताजा करने का शानदार मौका है। जब रविंद्र जैन की मधुर आवाज में सभी राम चरित मानस की चौपाइयां और भजन सुना करते थे।
रामायण से मिली थी अलीगढ़ के संगीतकार रविंद्र जैन को प्रसिद्धी
28 फरवरी 1944 को जन्मे रविंद्र जैन जन्मजात दृष्टि बाधित थे। उनको कुछ भी दिखाई नहीं देता था। शुरुआती दौर में किशोरावस्था में वह अलीगढ़ के जैन मंदिर में ही भजन गाया करते थे। इसके बाद कोलकाता गए और फिल्म इंडस्ट्री में उनकी एंट्री हो गई।
कुछ दर्शकों ने कहा है कि अयोध्या में रामलला विराजमान का बहुचर्चित मंदिर बनने जा रहा है, इसलिए केंद्र सरकार देश में राम नाम का माहौल बनाने के लिए ऐसा कर रही है। बहरहाल, कारण लॉकडाउन हो या फिर रामलला।
नवरात्र में घर में बैठे करोड़ों दर्शकों के लिए रामायण का प्रसारण किसी तोहफे से कम नहीं है। विशेष रूप से अलीगढ़ वालों के लिए ये पुरानी यादों को ताजा करने का शानदार मौका है। जब रविंद्र जैन की मधुर आवाज में सभी राम चरित मानस की चौपाइयां और भजन सुना करते थे।
रामायण से मिली थी अलीगढ़ के संगीतकार रविंद्र जैन को प्रसिद्धी
28 फरवरी 1944 को जन्मे रविंद्र जैन जन्मजात दृष्टि बाधित थे। उनको कुछ भी दिखाई नहीं देता था। शुरुआती दौर में किशोरावस्था में वह अलीगढ़ के जैन मंदिर में ही भजन गाया करते थे। इसके बाद कोलकाता गए और फिल्म इंडस्ट्री में उनकी एंट्री हो गई।
उनकी वर्ष 1974 में ‘चोर मचाए शोर’ फिल्म से संगीतकार के रूप में कैरियर की शुरुआत हुई थी। इस फिल्म के गाने बहुत हिट हुए और उनके पास फिल्मों की लाइन लग गई। अंखियों के झरोखे से, गीत गाता चल, सौदागर, चितचोर, फकीरा, दुल्हन वही जो पिया मन भाए, पति, पत्नी और वो, इंसाफ का तराजू, नदिया के पार, राम तेरी गंगा मैली और हिना तक ये सिलसिला चलता रहा।
उनके कर्णप्रिय संगीत और दिल में उतर जाने वाले सुरों से सजे गाने एक के बाद एक हिट होते रहे। उन्होंने अधिकांश गाने पार्श्वगायिका हेमलता और गायक यशुदास से गवाये थे। 1987 में रामायण सीरीयल से उनकी आवाज और संगीत टीवी के माध्यम से घर-घर तक पहुंच गया।
इसके बाद श्रीकृष्णा, अलिफ लैला, जय गंगा मइया, जय महालक्ष्मी, श्री ब्रह्मा विष्णु महेश, साईं बाबा, जय मां दुर्गा टीवी सीरीयल में उन्होंने अपने संगीत का लोहा मनवाया। वर्ष 1985 में उनको राम तेरी गंगा मैली फिल्म के लिए फिल्म फेयर का बेस्ट म्यूजिक डायरेक्टर अवार्ड मिला था।
उनके कर्णप्रिय संगीत और दिल में उतर जाने वाले सुरों से सजे गाने एक के बाद एक हिट होते रहे। उन्होंने अधिकांश गाने पार्श्वगायिका हेमलता और गायक यशुदास से गवाये थे। 1987 में रामायण सीरीयल से उनकी आवाज और संगीत टीवी के माध्यम से घर-घर तक पहुंच गया।
इसके बाद श्रीकृष्णा, अलिफ लैला, जय गंगा मइया, जय महालक्ष्मी, श्री ब्रह्मा विष्णु महेश, साईं बाबा, जय मां दुर्गा टीवी सीरीयल में उन्होंने अपने संगीत का लोहा मनवाया। वर्ष 1985 में उनको राम तेरी गंगा मैली फिल्म के लिए फिल्म फेयर का बेस्ट म्यूजिक डायरेक्टर अवार्ड मिला था।
इसी दरम्यान उनको पदश्री सम्मान से भी नवाजा गया था। 9 अक्टूबर 2015 में उनका मुंबई में निधन हो गया था। आठ भाई बहनों में वह तीसरे नंबर के थे। उनके पिता संस्कृत पंडित थे। परिवार के कुछ लोग अभी अलीगढ़ में कनवरीगंज फर्श के पैतृ़क निवास में रहते हैं।
एमएलसी जगवीर किशोर जैन ने बताया कि उन्हें अच्छी तरह से याद है कि रामायण के आने के दौरान कॉपियां चेक करने वाले शिक्षकों ने टीवी की व्यवस्था कराने अन्यथा की स्थिति में अवकाश पर रहने की शर्त रखी थी। इसके बाद टीवी की व्यवस्था कराई गई और कॉपियां चेक कराई गईं।
रविंद्र जैन का संगीत उस रामायण से अमर हो गया। ये अलीगढ़ के लिए बहुत गर्व की बात है। एक बार फिर लोग उस सर्वाधिक लोकप्रिय सीरीयल को देख पाएंगे। रविंद्र जैन ने अलीगढ़ को एक नई पहचान दिलाई है।
एमएलसी जगवीर किशोर जैन ने बताया कि उन्हें अच्छी तरह से याद है कि रामायण के आने के दौरान कॉपियां चेक करने वाले शिक्षकों ने टीवी की व्यवस्था कराने अन्यथा की स्थिति में अवकाश पर रहने की शर्त रखी थी। इसके बाद टीवी की व्यवस्था कराई गई और कॉपियां चेक कराई गईं।
रविंद्र जैन का संगीत उस रामायण से अमर हो गया। ये अलीगढ़ के लिए बहुत गर्व की बात है। एक बार फिर लोग उस सर्वाधिक लोकप्रिय सीरीयल को देख पाएंगे। रविंद्र जैन ने अलीगढ़ को एक नई पहचान दिलाई है।
बाबूलाल जैन इंटर कॉलेज के प्रिंसिपल अंबुज जैन ने बताया कि रविंद्र जैन से मिलना जुलना एक पारिवारिक सदस्य के रूप में होता था। रामायण को दोबारा से दिखाए जाने से लोगों को उनका संगीत गीत और गायन फिर से सुनने को मिलेगा। वह अलीगढ़ के लिए एक तोहफा बन कर आए थे। हम सभी को उन पर बहुत नाज है। हमें उनका सानिध्य मिला और कई बार रुबरू उनके गाने सुने।
तबला वादक सरताज ने बताया कि उन्होंने रविंद्र जैन के साथ छह महीने तक काम किया था। कुछ जगहों पर घूमने भी गए। वो एक विलक्षण प्रतिभा के धनी थे। रामायण सीरीयल के बाद उनको वैश्विक स्तर पर पहचान मिल चुकी थी। अब दोबारा से रामायण दिखाए जाने के बाद से उनके गीत संगीत की चर्चा फिर से हो रही है।
तबला वादक सरताज ने बताया कि उन्होंने रविंद्र जैन के साथ छह महीने तक काम किया था। कुछ जगहों पर घूमने भी गए। वो एक विलक्षण प्रतिभा के धनी थे। रामायण सीरीयल के बाद उनको वैश्विक स्तर पर पहचान मिल चुकी थी। अब दोबारा से रामायण दिखाए जाने के बाद से उनके गीत संगीत की चर्चा फिर से हो रही है।