फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Aligarh News ›   Rajya Karmachari Samiti Aligarh Scam

राज्य कर्मचारी समिति: आवंटन करने के बाद 750 आवंटियों से छीन लिए थे प्लॉट.. फिर की बंदरबांट

Sun, 30 Mar 2025 04:48 PM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़ Published by: चमन शर्मा Updated Sun, 30 Mar 2025 04:48 PM IST
सार

राज्य कर्मचारी समिति द्वारा पार्क की भूमि पर प्लाटों के पट्टे किए जाने पर एक मुकदमा क्वार्सी थाने में दर्ज कराया गया। मगर सियासी दखल के चलते उसमें एफआर लगा दी गई। अब संघर्ष समिति उस एफआर के खिलाफ अदालत में भी लड़ रही है।

विज्ञापन
Rajya Karmachari Samiti Aligarh Scam
घोटाला सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

राज्य कर्मचारियों व पेंशनरों को घर देने के लिए बनी राज्य कर्मचारी विकास लोक सहकारी आवास समिति ने सियासी संरक्षण में नियमों में बदलाव कर असदपुर साइट के 750 आवंटियों से प्लॉट छीन लिए। फिर नए सिरे से प्लाटों का बंदरबाट कर दिया। इसमें करीब 350 करोड़ रुपये से अधिक का गोलमाल किए जाने का अंदेशा है।

विज्ञापन


2005 में शुरू हुए इस खेला पर दो दशक से आवाज उठाते आ रहे आवंटियों को पिछले वर्ष सीएम के जनता दरबार से न्याय की आस जागी है। सीएम के निर्देश पर गठित एसआईटी ने जांच रिपोर्ट शासन को भेज दी है। वहां से कार्रवाई का इंतजार है। अब इस बंदरबाट में शामिल अफसरों व समिति से जुड़े लोगों में बेचैनी है।
विज्ञापन


दरअसल, 2004-05 में समिति में कुछ आवास विकास परिषद के कुछ अधिकारियों व सियासी संरक्षण वाले कुछ ऐसे लोगों को स्थान मिल गया, जो राज्यकर्मी नहीं थे। फिर उन्होंने अधिकारियों व सियासी इशारे पर ही समिति के नियमों में संशोधन की प्रक्रिया शुरू की। इसमें यह सफल भी रहे। आवंटियों ने विरोध शुरू किया तो सियासी सरपरस्ती के चलते किसी स्तर पर उनकी आवाज नहीं सुनी गई। बसपा व सपा शासन काल में कुछ तत्कालीन जनप्रतिनिधियों, भूमाफिया की सांठगांठ से असल आवंटियों से प्लॉट छीने जाने लगे। प्लाटों पर भरी गईं नीव से ईंटें तक गायब करा दी गईं। आवंटियों ने विरोध किया तो पुलिस व प्रशासनिक स्तर पर भी सुनवाई नहीं हुई।

विज्ञापन
विज्ञापन

पुरानों से छीनकर नए सदस्यों को प्लाटों के पट्टे किए जाने लगे। तब करीब दस वर्ष पहले आवंटियों ने संघर्ष समित बनाई व उसका पंजीकरण कराया। समिति ने सिविल न्यायालय में मुकदमा दायर कर दिया। आवंटियों को राहत नहीं मिली। पिछले वर्ष जून माह में संघर्ष समिति पदाधिकारी सीएम के जनता दरबार में पहुंचे। वहां बात रखी, तब एसआईटी जांच का निर्देश हुआ।

मैं इस लड़ाई को लड़ रही संघर्ष समिति का संरक्षक हूं। जिसमें कई पदाधिकारी व 750 सदस्य हैं। समिति द्वारा किए गए बंदरबाट के खिलाफ लड़ाई आखिरी सांस तक लड़ेंगे। अब तक जो कुछ हुआ, वह सियासी मिलीभगत से हुआ है।-निगम सागर दीक्षित, सेवानिवृत्त निरीक्षक
पूरे मामले की जांच को गठित एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट शासन को भेज दी है। अब आगे की कार्रवाई वहीं से तय होगी।-संगीता सिंह, मंडलायुक्त


एक मुकदमा हुआ दर्ज, पर लगी एफआर
समिति द्वारा पार्क की भूमि पर प्लाटों के पट्टे किए जाने पर एक मुकदमा क्वार्सी थाने में दर्ज कराया गया। मगर सियासी दखल के चलते उसमें एफआर लगा दी गई। अब संघर्ष समिति उस एफआर के खिलाफ अदालत में भी लड़ रही है।

ये किया गया था संशोधन

1988 में अस्तित्व में आई राज्य कर्मचारी विकास लोक सहकारी आवास समिति में 2005 के पहले तक नियम था कि सिर्फ राज्यकर्मी या पेंशनर परिवारों को ही सदस्यता मिलेगी। उन्हीं को आवेदन करने पर 200-200 वर्ग गज के प्लॉट पट्टे के जरिये आवंटित किए जाएंगे। मगर 2005 में सियासी गठजोड़ से आवास विकास परिषद में सांठगांठ कर समिति पदाधिकारियों ने नियम में संशोधन कराया कि बाहरियों को भी सदस्य बनाया जा सकेगा। इसी बदलाव के बाद असदपुर साइट में 750 प्लाटों के सापेक्ष 35000 सदस्य बना दिए गए।

इस तरह से किए पट्टे
पहले समिति ने एक दर्जन किसानों से इकरारनामा कर असल आवंटियों को प्लॉट आवंटित कर दिए। उन्होंने नीव भरवा दीं। बाद में समिति ने गोलमाल शुरू किया। किसानों से फिर नया इकरारनामा कराया। उसके सहारे नए लोगों को प्लाटों पर पट्टे किए गए। इस ऐवज में नए लोगों से पट्टा करते समय जो रकम ली गई, उसका कुछ फीसदी हिस्सा किसानों को भी दिया। बाकी रकम का खुद बंदरबाट किया।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed