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साढ़े चार घंटे ठप रहा रेल संचालन, मुसाफिर परेशान
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
Updated Sat, 08 Sep 2018 12:41 AM IST
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साढ़े चार घंटे ठप रहा रेल संचालन, मुसाफिर परेशान
- फोटो : Dig Vishal
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ग्रुप डी में सरकारी नौकरी देने की मांग को लेकर शुक्रवार को कुलियों ने हाथरस में ट्रेनों का संचालन ठप कर दिया। जिससे अलीगढ़ में भी साढ़े चार घंटे ट्रेनों का आवागमन बंद रहा। जो ट्रेन जहां थी वहीं खड़ी रही। सुबह 7.45 बजे संचालन बंद होने के बाद दोपहर 12.05 बजे यातायात सामान्य हो सका। इस दौरान पूछताछ में दर्जनों मुसाफिर अपनी ट्रेनों की जानकारी लेने को पहुंचते रहे।
मुसाफिरों का कहना था कि इंटरनेट पर मौजूद रेलवे के अलग अलग एप में भी ट्रेनों की सही जानकारी नहीं मिल रही है। अन्यथा वह अपने घरों से ही ट्रेन के आने के समय पर ही आते। अब उनको वापस घर जाना पड़ रहा है। इस दौरान रिजर्वेशन और साधारण मिला कर लगभग 70 टिकट रद कराए गए। मुसाफिर रेलवे की व्यवस्थाओं को जी भर कोसते रहे।
संचालन ठप होने के दौरान अलीगढ़ के तीन नंबर प्लेटफार्म पर नाथ ईस्ट एक्सप्रेस, दो नंबर पर बरेली बांदीकुई पैसेंजर, छह नंबर पर संपर्क क्रांति एक्सप्रेस खड़ी रही। तीनों ही ट्रेनों को टूंडला जाना था। इनके पीछे कालका एक्सप्रेस, महानंदा एक्सप्रेस, सीमांचल एक्सप्रेस सोमना और खुर्जा स्टेशनों पर खड़ी रही।
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इसी तरह से अप साइड की गोमती एक्सप्रेस, वैशाली एक्सप्रेस, मगध एक्सप्रेस सहित अन्य ट्रेनों को हाथरस से पहले रोका गया। स्टेशन मास्टर कार्यालय पर उप स्टेशन अधीक्षक वाईपी सिंह, स्टेशन मास्टर प्रताप सिंह और सहायक राजा बाबू ने बमुश्किल कई मुसाफिरों को समझा कर शांत किया।
हेडिंग
5 से 10 घंटे की देरी से पहुंची ट्रेनें
अलीगढ़। इस दौरान दिल्ली जाने वाली टीएडी पांच घंटे, कानपुर दिल्ली शताब्दी एक्सप्रेस 5 घंटे, मगध एक्सप्रेस 6 घंटे, वैशाली एक्सप्रेस 11 घंटे, ब्रह्मपुत्र मेल 2 घंटे, स्वतंत्रता सेनानी एक्सप्रेस 5 घंटे, गोमती एक्सप्रेस ढाई घंटे, भागलपुर दिल्ली गरीब रथ एक्सप्रेस 10 घंटे की देरी से अलीगढ़ पहुंची। इसी तरह से कानपुर जाने वाली महानंदा एक्सप्रेस 4 घंटे, सीमांचल एक्सप्रेस 3 घंटे, कालका मेल एक्सप्रेस तीन घंटे की देरी से अलीगढ़ पहुंची। दोपहर बाद भी अप और डाउन रूट की तमाम ट्रेनों का संचालन लड़खड़ाता रहा। अलीगढ़ से सुबह लखनऊ जाने वाली शताब्दी भी हाथरस के पास खड़ी रही।
हेडिंग
बीमार मां को प्रतीक्षालय में लिटाया
अलीगढ़। इंदौर बरेली एक्सप्रेस से अलीगढ़ से बरेली जाने के लिए एसके जैन अपनी पत्नी हेमलता जैन और अपने बेटे सौरभ जैन के साथ सुबह ही स्टेशन पहुंच गए थे। लेकिन वहां पहुंचने के बाद उनको पता चला कि हाथरस में कुलियों के प्रदर्शन के कारण ट्रेनें घंटो लेट चल रही हैं। उनकी ट्रेन भी पांच घंटे लेट है। इसी बीच हेमलता की तबियत कुछ खराब हुई। काफी देर इंतजार करने के कारण वह थक गई थीं। सौरभ ने उनको प्रतीक्षालय में लिटाया ताकि वह आराम कर सके। सौरभ ने बताया कि इंटरनेट पर ट्रेनों के समय की जानकारी देने वाले सभी एप इस संबंध में कोई सूचना नहीं दे रहे हैं। जैन परिवार की तरह ही अधिकांश मुसाफिर ट्रेनों के कई घंटे लेट होने से परेशान थे। उनको ट्रेनों के वास्तविक आगमन की सही सूचना नहीं मिल पा रही थी।
बरेली बांदीकुई का ड्राइवर हो गया गायब
स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर दो पर खड़ी बरेली बांदीकुई पैसेंजर का ड्राइवर इस बीच किसी काम से कहीं चल गया। जब संचालन सामान्य हुआ तो पूछताछ से ट्रेन को चलाने की उदघोषणा हुई। लेकिन कुछ ही देर में पता चला कि ट्रेन का ड्राइवर कहीं चला गया है। दोपहर 12.25 बजे से 12.35 बजे तक पूरे दस मिनट तक इस ट्रेन का सिग्नल हरा रहा लेकिन जब ड्राइवर नहीं मिला तो इसका सिबभनल लाल कर दिया गया। इसकी वजह से कालका एक्सप्रेस, महानंदा एक्सप्रेस और सीमांचल एक्सप्रेस को तीन नंबरर प्लेटफार्म से चलाया गया। जबकि नियमानुसार इन ट्रेनों को दो नंबर प्लेटफार्म से संचालित होना था। ऐसे में इन ट्रेनों का इंतजार कर रहे यात्रियों को पैदल पुल पार कर तीन नंबर प्लेटफार्म पर जाना पड़ा। इसके बाद वह अपनी ट्रेन पर चढ़ सके। वहीं इन ट्रेनों को दो मिनट की जगह पांच मिनट का ठहराव दिया गया ताकि मुसाफिरों को परेशानी न हो। वो आराम से दो नंबर से तीन नंबर प्लेटफार्म पर पहुंच सके। इधर, काफी देर बाद अशोक नाम के लोको ड्राइवर को बुलाया गया। जिसके बाद बरेली बांदीकुई पैसेंजर को चलाया गया। ये ट्रेन बांदीकुई को रवाना की गई।
सरकारी नौकरी नहीं तो होता रहेगा प्रदर्शन : कुली
अखिल भारतीय लाल वर्दी कुली यूनियन के सदस्यों ने अलीगढ़ में ही रह कर ट्रेनों का संचालन रोकने में हाथरस के कुलियों की मदद की। इन कुलियों ने बताया कि वर्ष 2008 में तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने कुलियों को ग्रुप डी में नौकरी देने का वादा किया था। लेकिन 10 साल बाद भी कुछ नहीं हुआ है। पूरा पूरा जीवन रेलवे को समर्पित करने के बाद भी कुलियों को किसी तरह की सामाजिक सुरक्षा नहीं मिल रही है। उनका जीवन अनिश्चितता भरा है। उनके परिजन भी गरीबी का दंश झेल रहे हैं। एक तरफ रेलवे में सफाई कर्मचारियों को 30 हजार रुपये महीने की तनख्वाह मिल रही है। वहीं उनको एक रुपया तक नहीं मिल रहा है। रेलवे में लाखों पदों पर नियुक्ति होनी है तो कुलियों को भी वरीयता के आधार पर नियुक्ति दी जाए। अलीगढ़ स्टेशन में लगभग 65 कुली वर्तमान में काम कर रहे हैं। इनमें से अधिकांश सुबह 6 बजे से रात 11 बजे तक काम करते हैं। इन कुलियों ने खुद ही अलग अलग शिफ्ट तय कर रखी है ताकि सभी को काम मिल सके। कुछ कुली बुजुर्ग हो चुके हैं। अध्यक्ष सत्य प्रकाश, कोषाध्यक्ष सुशील कुमार, शाखा सचिव महेश चंद्र ने कहा कि अगर रेल मंत्री और प्रधानमंत्री ने उनकी बात नहीं सुनी तो आगे भी उनका प्रदर्शन जारी रहेगा।
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मुसाफिरों का कहना था कि इंटरनेट पर मौजूद रेलवे के अलग अलग एप में भी ट्रेनों की सही जानकारी नहीं मिल रही है। अन्यथा वह अपने घरों से ही ट्रेन के आने के समय पर ही आते। अब उनको वापस घर जाना पड़ रहा है। इस दौरान रिजर्वेशन और साधारण मिला कर लगभग 70 टिकट रद कराए गए। मुसाफिर रेलवे की व्यवस्थाओं को जी भर कोसते रहे।
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संचालन ठप होने के दौरान अलीगढ़ के तीन नंबर प्लेटफार्म पर नाथ ईस्ट एक्सप्रेस, दो नंबर पर बरेली बांदीकुई पैसेंजर, छह नंबर पर संपर्क क्रांति एक्सप्रेस खड़ी रही। तीनों ही ट्रेनों को टूंडला जाना था। इनके पीछे कालका एक्सप्रेस, महानंदा एक्सप्रेस, सीमांचल एक्सप्रेस सोमना और खुर्जा स्टेशनों पर खड़ी रही।
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इसी तरह से अप साइड की गोमती एक्सप्रेस, वैशाली एक्सप्रेस, मगध एक्सप्रेस सहित अन्य ट्रेनों को हाथरस से पहले रोका गया। स्टेशन मास्टर कार्यालय पर उप स्टेशन अधीक्षक वाईपी सिंह, स्टेशन मास्टर प्रताप सिंह और सहायक राजा बाबू ने बमुश्किल कई मुसाफिरों को समझा कर शांत किया।
हेडिंग
5 से 10 घंटे की देरी से पहुंची ट्रेनें
अलीगढ़। इस दौरान दिल्ली जाने वाली टीएडी पांच घंटे, कानपुर दिल्ली शताब्दी एक्सप्रेस 5 घंटे, मगध एक्सप्रेस 6 घंटे, वैशाली एक्सप्रेस 11 घंटे, ब्रह्मपुत्र मेल 2 घंटे, स्वतंत्रता सेनानी एक्सप्रेस 5 घंटे, गोमती एक्सप्रेस ढाई घंटे, भागलपुर दिल्ली गरीब रथ एक्सप्रेस 10 घंटे की देरी से अलीगढ़ पहुंची। इसी तरह से कानपुर जाने वाली महानंदा एक्सप्रेस 4 घंटे, सीमांचल एक्सप्रेस 3 घंटे, कालका मेल एक्सप्रेस तीन घंटे की देरी से अलीगढ़ पहुंची। दोपहर बाद भी अप और डाउन रूट की तमाम ट्रेनों का संचालन लड़खड़ाता रहा। अलीगढ़ से सुबह लखनऊ जाने वाली शताब्दी भी हाथरस के पास खड़ी रही।
हेडिंग
बीमार मां को प्रतीक्षालय में लिटाया
अलीगढ़। इंदौर बरेली एक्सप्रेस से अलीगढ़ से बरेली जाने के लिए एसके जैन अपनी पत्नी हेमलता जैन और अपने बेटे सौरभ जैन के साथ सुबह ही स्टेशन पहुंच गए थे। लेकिन वहां पहुंचने के बाद उनको पता चला कि हाथरस में कुलियों के प्रदर्शन के कारण ट्रेनें घंटो लेट चल रही हैं। उनकी ट्रेन भी पांच घंटे लेट है। इसी बीच हेमलता की तबियत कुछ खराब हुई। काफी देर इंतजार करने के कारण वह थक गई थीं। सौरभ ने उनको प्रतीक्षालय में लिटाया ताकि वह आराम कर सके। सौरभ ने बताया कि इंटरनेट पर ट्रेनों के समय की जानकारी देने वाले सभी एप इस संबंध में कोई सूचना नहीं दे रहे हैं। जैन परिवार की तरह ही अधिकांश मुसाफिर ट्रेनों के कई घंटे लेट होने से परेशान थे। उनको ट्रेनों के वास्तविक आगमन की सही सूचना नहीं मिल पा रही थी।
बरेली बांदीकुई का ड्राइवर हो गया गायब
स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर दो पर खड़ी बरेली बांदीकुई पैसेंजर का ड्राइवर इस बीच किसी काम से कहीं चल गया। जब संचालन सामान्य हुआ तो पूछताछ से ट्रेन को चलाने की उदघोषणा हुई। लेकिन कुछ ही देर में पता चला कि ट्रेन का ड्राइवर कहीं चला गया है। दोपहर 12.25 बजे से 12.35 बजे तक पूरे दस मिनट तक इस ट्रेन का सिग्नल हरा रहा लेकिन जब ड्राइवर नहीं मिला तो इसका सिबभनल लाल कर दिया गया। इसकी वजह से कालका एक्सप्रेस, महानंदा एक्सप्रेस और सीमांचल एक्सप्रेस को तीन नंबरर प्लेटफार्म से चलाया गया। जबकि नियमानुसार इन ट्रेनों को दो नंबर प्लेटफार्म से संचालित होना था। ऐसे में इन ट्रेनों का इंतजार कर रहे यात्रियों को पैदल पुल पार कर तीन नंबर प्लेटफार्म पर जाना पड़ा। इसके बाद वह अपनी ट्रेन पर चढ़ सके। वहीं इन ट्रेनों को दो मिनट की जगह पांच मिनट का ठहराव दिया गया ताकि मुसाफिरों को परेशानी न हो। वो आराम से दो नंबर से तीन नंबर प्लेटफार्म पर पहुंच सके। इधर, काफी देर बाद अशोक नाम के लोको ड्राइवर को बुलाया गया। जिसके बाद बरेली बांदीकुई पैसेंजर को चलाया गया। ये ट्रेन बांदीकुई को रवाना की गई।
सरकारी नौकरी नहीं तो होता रहेगा प्रदर्शन : कुली
अखिल भारतीय लाल वर्दी कुली यूनियन के सदस्यों ने अलीगढ़ में ही रह कर ट्रेनों का संचालन रोकने में हाथरस के कुलियों की मदद की। इन कुलियों ने बताया कि वर्ष 2008 में तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने कुलियों को ग्रुप डी में नौकरी देने का वादा किया था। लेकिन 10 साल बाद भी कुछ नहीं हुआ है। पूरा पूरा जीवन रेलवे को समर्पित करने के बाद भी कुलियों को किसी तरह की सामाजिक सुरक्षा नहीं मिल रही है। उनका जीवन अनिश्चितता भरा है। उनके परिजन भी गरीबी का दंश झेल रहे हैं। एक तरफ रेलवे में सफाई कर्मचारियों को 30 हजार रुपये महीने की तनख्वाह मिल रही है। वहीं उनको एक रुपया तक नहीं मिल रहा है। रेलवे में लाखों पदों पर नियुक्ति होनी है तो कुलियों को भी वरीयता के आधार पर नियुक्ति दी जाए। अलीगढ़ स्टेशन में लगभग 65 कुली वर्तमान में काम कर रहे हैं। इनमें से अधिकांश सुबह 6 बजे से रात 11 बजे तक काम करते हैं। इन कुलियों ने खुद ही अलग अलग शिफ्ट तय कर रखी है ताकि सभी को काम मिल सके। कुछ कुली बुजुर्ग हो चुके हैं। अध्यक्ष सत्य प्रकाश, कोषाध्यक्ष सुशील कुमार, शाखा सचिव महेश चंद्र ने कहा कि अगर रेल मंत्री और प्रधानमंत्री ने उनकी बात नहीं सुनी तो आगे भी उनका प्रदर्शन जारी रहेगा।