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अलीगढ़ : एएमयू के संग्रहालय में हजरत अली के हाथों से लिखीं कुरान की आयतें
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एएमयू के लाइब्रेरी संग्रहालय में हजरत अली के हाथों लिखी कुरान की आयतें।
- फोटो : CITY OFFICE
इकराम वारिस
पैगंबर मोहम्मद मुस्तफा (सअ) के दामाद और इमाम हसन-हुसैन के वालिद हजरत अली की यौम-ए-पैदाइश 15 फरवरी को है, जिसे दुनियाभर में अली डे के रूप में मनाया जाएगा। हजरत अली के हाथों से लिखीं कुरान की आयतें अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) की लाइब्रेरी के संग्रहालय में हैं।
कोरोना काल के बाद पहली बार हजरत अली की जिंदगी से जुड़ी चीजों का जियारत (दर्शन) होगी। हालांकि, कोविड-19 प्रोटोकाल के तहत चंद लोग ही जियारत कर पाएंगे। कोरोना काल में पिछली दफा हजरत अली से जुड़ी चीजों की लोग जियारत नहीं कर पाए थे, क्योंकि कोरोना काल में यूनिवर्सिटी बंद थी। कोरोना के घटते संक्रमण के चलते इस बार हजरत अली से जुड़ी चीजों की जियारत करने की इजाजत दी गई है, लेकिन जायरीनों (दर्शनार्थी) की तादाद कम होगी। हजरत अली ने कूफी शैली में हिरन की खाल पर ‘सूरह फातिहा व सूरह बकरा की कुछ आयतें लिखी हैं, जो संग्रहालय में है।
हजरत अली की जिंदगी से जुड़ी किताबें
मौलाना आजाद लाइब्रेरी के संग्रहालय में हजरत अली की जिंदगी से जुड़ी किताबें हैं, जो कई भाषाओं में हैं। इनमें प्रमुख अंग्रेजी भाषा में ‘नहजुल बलागा’, शिज्म, बायोग्रॉफी ऑफ अली इब्ने अबु तालिब’, ‘शॉर्ट हिस्ट्री ऑफ फोर्थ खलीफा अली अल मुर्तजा’, हिंदी भाषा में ‘इस्लाम के चिराग’, ‘तौहीद-1’, ‘अमीरुलमोमेनी हजरत अली अलैहिस्लाम’, उर्दू भाषा में ‘हजरत अली’, ‘सैयदना हजरत अली’ की किताबें हैं। इनके अलावा फारसी भाषा में भी किताबें हैं।
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एएमयू के संग्रहालय में हजरत अली की जिंदगी से जुड़ी अंग्रेजी भाषा में 18, हिंदी में तीन, उर्दू में 37 व अरबी में 26, फारसी में 17 किताबें हैं। मौला अली के हाथों से लिखी कुरान की आयतें भी हैं। उनकी यौम-ए-पैदाइश पर उनसे जुड़ी चीजों की प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी।
-प्रो. निशात फातिमा, लाइब्रेरियन, मौलाना आजाद लाइब्रेरी एएमयू
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पैगंबर मोहम्मद मुस्तफा (सअ) के दामाद और इमाम हसन-हुसैन के वालिद हजरत अली की यौम-ए-पैदाइश 15 फरवरी को है, जिसे दुनियाभर में अली डे के रूप में मनाया जाएगा। हजरत अली के हाथों से लिखीं कुरान की आयतें अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) की लाइब्रेरी के संग्रहालय में हैं।
कोरोना काल के बाद पहली बार हजरत अली की जिंदगी से जुड़ी चीजों का जियारत (दर्शन) होगी। हालांकि, कोविड-19 प्रोटोकाल के तहत चंद लोग ही जियारत कर पाएंगे। कोरोना काल में पिछली दफा हजरत अली से जुड़ी चीजों की लोग जियारत नहीं कर पाए थे, क्योंकि कोरोना काल में यूनिवर्सिटी बंद थी। कोरोना के घटते संक्रमण के चलते इस बार हजरत अली से जुड़ी चीजों की जियारत करने की इजाजत दी गई है, लेकिन जायरीनों (दर्शनार्थी) की तादाद कम होगी। हजरत अली ने कूफी शैली में हिरन की खाल पर ‘सूरह फातिहा व सूरह बकरा की कुछ आयतें लिखी हैं, जो संग्रहालय में है।
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हजरत अली की जिंदगी से जुड़ी किताबें
मौलाना आजाद लाइब्रेरी के संग्रहालय में हजरत अली की जिंदगी से जुड़ी किताबें हैं, जो कई भाषाओं में हैं। इनमें प्रमुख अंग्रेजी भाषा में ‘नहजुल बलागा’, शिज्म, बायोग्रॉफी ऑफ अली इब्ने अबु तालिब’, ‘शॉर्ट हिस्ट्री ऑफ फोर्थ खलीफा अली अल मुर्तजा’, हिंदी भाषा में ‘इस्लाम के चिराग’, ‘तौहीद-1’, ‘अमीरुलमोमेनी हजरत अली अलैहिस्लाम’, उर्दू भाषा में ‘हजरत अली’, ‘सैयदना हजरत अली’ की किताबें हैं। इनके अलावा फारसी भाषा में भी किताबें हैं।
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एएमयू के संग्रहालय में हजरत अली की जिंदगी से जुड़ी अंग्रेजी भाषा में 18, हिंदी में तीन, उर्दू में 37 व अरबी में 26, फारसी में 17 किताबें हैं। मौला अली के हाथों से लिखी कुरान की आयतें भी हैं। उनकी यौम-ए-पैदाइश पर उनसे जुड़ी चीजों की प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी।
-प्रो. निशात फातिमा, लाइब्रेरियन, मौलाना आजाद लाइब्रेरी एएमयू

प्रोफेसर निशात फातिमा। - फोटो : CITY OFFICE