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सीएए का विरोधः मुल्क सभी का है, नरेंद्र मोदी, अमित शाह की बपौती नहीं
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शाहजमाल ईदगाह पर एनआरसी व सीएए के विरोध में धरने पर बैठी महिलाएं।
- फोटो : CITY OFFICE
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नागरिकता संशोधन कानून, एनआरसी व एनपीआर के विरोध में शाहजमाल स्थित ईदगाह के सामने पिछले 16 दिन से महिलाएं धरना दे रही हैं। बृहस्पतिवार को धरना स्थल पर पहुंचीं छात्राओं में से एक छात्रा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व गृहमंत्री अमित शाह पर निशाना साधा है। इधर, दोपहर में धूप से बचने के लिए तंबू लगाने की कोशिश की गई तो पुलिस ने मना कर दिया।
सुबह धरना स्थल पर करीब महिलाओं की तादाद 10-20 की थी, लेकिन दोपहर करीब ढाई बजे इनकी तादाद बढ़ने लगी। आसपास के स्कूलों में पढ़ने वालीं छात्राएं भी धरना स्थल पर पहुंचने लगीं। कुछ महिलाओं ने जोहर यानी दोपहर की नमाज धरना स्थल पर पढ़ी। दोपहर ढाई बजे एक छात्रा ने माइक संभाला। अपनी बात उसने पैगंबर इस्लाम मोहम्मद मुस्तफा के किरदार से शुरू की। कहा, उन्होंने अपने हक की लड़ाई लड़ी। उन्हीं के नक्शेकदम पर नागरिकता संशोधन कानून, एनआरसी व एनपीआर के खिलाफ लड़ाई लड़नी होगी।
विरोध तब तक जारी रहेगा, जब तक यह कानून वापस नहीं हो जाता। छात्रा ने कहा कि यह मुल्क सभी का है, केवल नरेंद्र मोदी व अमित शाह के मां-बाप का नहीं है। कपड़े से आतंकवादी की पहचान होती है। अगर कोई इंसान है तो इंसान की जान नहीं ले सकता है। धरना स्थल पर राष्ट्रगान भी हुआ।
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सुबह धरना स्थल पर करीब महिलाओं की तादाद 10-20 की थी, लेकिन दोपहर करीब ढाई बजे इनकी तादाद बढ़ने लगी। आसपास के स्कूलों में पढ़ने वालीं छात्राएं भी धरना स्थल पर पहुंचने लगीं। कुछ महिलाओं ने जोहर यानी दोपहर की नमाज धरना स्थल पर पढ़ी। दोपहर ढाई बजे एक छात्रा ने माइक संभाला। अपनी बात उसने पैगंबर इस्लाम मोहम्मद मुस्तफा के किरदार से शुरू की। कहा, उन्होंने अपने हक की लड़ाई लड़ी। उन्हीं के नक्शेकदम पर नागरिकता संशोधन कानून, एनआरसी व एनपीआर के खिलाफ लड़ाई लड़नी होगी।
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विरोध तब तक जारी रहेगा, जब तक यह कानून वापस नहीं हो जाता। छात्रा ने कहा कि यह मुल्क सभी का है, केवल नरेंद्र मोदी व अमित शाह के मां-बाप का नहीं है। कपड़े से आतंकवादी की पहचान होती है। अगर कोई इंसान है तो इंसान की जान नहीं ले सकता है। धरना स्थल पर राष्ट्रगान भी हुआ।
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