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अलीगढ़ : 15 साल पुराने मुकदमे में जेल गया प्रॉपर्टी डीलर
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गंगीरी के ब्लॉक प्रमुख परिवार के सदस्य व प्रॉपर्टी डीलर उमेश यादव 15 वर्ष पुराने हमले के मुकदमे में वारंट जारी होने पर जेल भेजे गए हैं। उन्हें हाईकोर्ट से स्थगनादेश हटने पर यह झटका लगा है। उनके अधिवक्ता की ओर से जमानत अर्जी दायर कर दी गई है, जिस पर सुनवाई के लिए 11 मई नियत की गई है।
महानगर के देवी नगला निवासी उमेश यादव के परिवार में लंबे समय से प्रमुखी है। वर्तमान में ब्लॉक प्रमुख उनके भाई की पत्नी हैं। वाकया 2007 का है, जब दो पक्षों में देवी नगला इलाके में फायरिंग हुई थी, जिसमें नाहर सिंह की मौत हुई थी। इस पर नाहर सिंह पक्ष की ओर से पहले दिन मुकदमा दर्ज कराया गया।
दूसरे दिन दूसरे पक्ष ने नाहर सिंह व उनके पक्ष के उमेश यादव आदि पर मुकदमा दर्ज कराया गया, जिसमें उमेश के दूसरे भाई महेश व दिनेश भी आरोपी बनाए। इस मुकदमे में पुलिस ने विवेचना में नाहर की मौत होने के कारण उसका नाम निकाला, जबकि उमेश व उनके भाइयों के भी नाम निकाले गए। इसके बाद अधिकारियों के स्तर पर हुई पैरवी में एक बार फिर नाम बढ़ाया और फिर निकाला गया। इसी बीच उमेश पहली बार नाम निकाले जाने की प्रक्रिया पर हाईकोर्ट से अपने पक्ष में स्टे ले आए। लंबे समय से स्टे होने के कारण सब सामान्य था, मगर अब दूसरा पक्ष हाईकोर्ट में पैरवी कर गिरफ्तारी स्टे को हटवा आया है। इसके बाद उमेश यादव के खिलाफ वारंट जारी हो गए। इसी वारंट में महुआ खेड़ा पुलिस ने उन्हें जेल भेज दिया। उमेश यादव के अधिवक्ता चंद्रशेखर दीक्षित के अनुसार, मामले में जमानत अर्जी दायर कर दी गई है। 11 मई नियत है। उमेश यादव के भाई महेश के अनुसार यह पुराना मामला है। इसमें न्यायालय में अपना पक्ष रखा जाएगा।
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महानगर के देवी नगला निवासी उमेश यादव के परिवार में लंबे समय से प्रमुखी है। वर्तमान में ब्लॉक प्रमुख उनके भाई की पत्नी हैं। वाकया 2007 का है, जब दो पक्षों में देवी नगला इलाके में फायरिंग हुई थी, जिसमें नाहर सिंह की मौत हुई थी। इस पर नाहर सिंह पक्ष की ओर से पहले दिन मुकदमा दर्ज कराया गया।
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दूसरे दिन दूसरे पक्ष ने नाहर सिंह व उनके पक्ष के उमेश यादव आदि पर मुकदमा दर्ज कराया गया, जिसमें उमेश के दूसरे भाई महेश व दिनेश भी आरोपी बनाए। इस मुकदमे में पुलिस ने विवेचना में नाहर की मौत होने के कारण उसका नाम निकाला, जबकि उमेश व उनके भाइयों के भी नाम निकाले गए। इसके बाद अधिकारियों के स्तर पर हुई पैरवी में एक बार फिर नाम बढ़ाया और फिर निकाला गया। इसी बीच उमेश पहली बार नाम निकाले जाने की प्रक्रिया पर हाईकोर्ट से अपने पक्ष में स्टे ले आए। लंबे समय से स्टे होने के कारण सब सामान्य था, मगर अब दूसरा पक्ष हाईकोर्ट में पैरवी कर गिरफ्तारी स्टे को हटवा आया है। इसके बाद उमेश यादव के खिलाफ वारंट जारी हो गए। इसी वारंट में महुआ खेड़ा पुलिस ने उन्हें जेल भेज दिया। उमेश यादव के अधिवक्ता चंद्रशेखर दीक्षित के अनुसार, मामले में जमानत अर्जी दायर कर दी गई है। 11 मई नियत है। उमेश यादव के भाई महेश के अनुसार यह पुराना मामला है। इसमें न्यायालय में अपना पक्ष रखा जाएगा।
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